
-जिले के छह ब्लॉकों की 1053 आंगनबाड़ी केन्द्र 15 पर्यवेक्षकों के भरोसे
-सैंपऊ की हालत खराब, 156 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर एक ही एलएस-पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा से लेकर निरीक्षण कार्यों तक में आ रही परेशानी
धौलपुर. महिला एवं बाल विकास विभाग संचालित जिले की 1053 आंगनबाड़ी केन्द्र केवल 15 पर्यवेक्षकों के भरोसे हैं। जिस कारण नियमित निरीक्षण सहित सरकार की योजनाओं को ढंग से लागू कराना संभव नहीं हो पा रहा। यानी देखा जाए तो एक महिला पर्यवेक्षक के जिम्मे 70 आंगनबाडिय़ां हैं। जबकि नियमानुसार 25 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर एक पर्यवेक्षक होना चाहिए।एक ओर सरकार जहां आंगनबाड़ी केन्द्रों को हाईटेक बनाने का कार्य कर रही है। लेकिन इन आंगनबाड़ी केन्द्रों को हाइटेक बनाने से क्या...क्यूंकि विभाग में कार्य करने वालों का पहले से ही टोटा है। जिस कारण इन आंगनबाड़ी केन्द्रों के कार्यों को ठीक से अमल में भी नहीं लाया जा परा। धौलपुर ब्लॉक सहित 6 ब्लॉकों में 34 पर्यवेक्षकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन कार्यरत केवल 15 महिला पर्यवेक्षक ही हैं। जिस कारण पोषण आहार, निरीक्षण, समन्वय, सरकार की योजनाओं को ठीक से लागू करना सहित अन्य कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है। जिला कार्यालय और ब्लॉक कार्यालय से समन्वय का कार्य महिला पर्यवेक्षकों के कंधों पर होता है। वहीं इन केन्द्रों के नियंत्रण व सेक्टर बैठक लेना, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित अन्य का प्रशिक्षण देने का कार्य करती हैं। लेकिन एक पर्यवेक्षक पर अधिक केन्द्रों का दबाव होने के कारण ये सभी कार्य प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहे।
285 केन्द्रों पर केवल एक पर्यवेक्षक
जिले में सबसे ज्यादा हालत खबरा सरमथुरा ब्लॉक की है। जहां पर 129 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित होते हैं, लेकिन इन आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए स्वीकृत 4 पर्यवेक्षकों के पदों में से कोई भी पद भरा नहीं है। यानी सरमथुरा में एक भी पर्यवेक्षक नहीं है। जिस कारण यहां की आंगनबाडिय़ों के निरीक्षण सहित अन्य कार्यों का समन्वय भगवान भरोसे है। तो वहीं सैंपऊ में संचालित 156 केन्द्रों पर केवल 1 पर्यवेक्षक है। यानी 1 पर्यवेक्षक के जिम्मे 156 केन्द्र। हालांकि सरमथुरा सेंटर को अभी बसेड़ी से अलग कर नवीन केन्द्र बनाया गया है।
परियोजना अधिकारी तक नहीं
आंगनबाड़ी केन्द्रों की खस्ताहालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिले के 6 ब्लॉकों में 1053 आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है। यानी इन ब्लॉकों की परियोजनाओं में 6 ही परियोजना अधिकारी नियुक्त होनी चाहिए। लेकिन राजखेड़ा, बाड़ी, बसेड़ी, सरमथुरा को छोडकऱ धौलपुर और सैंपऊ में परियोजना अधिकारी का पद कई दिनों से रिक्त हैं। नियमानुसार हर परियोजना में दो मंत्रालयिक संवर्ग के कर्मचारी होना चाहिए।
पर्यवेक्षकों की नियुक्ति राज्य स्तर से
आखिर क्यों इन केन्द्रों के निरीक्षण एवं अन्य कार्यों के लिए महिला पर्यवेक्षकों की कमी है तो उसमें पता चला कि समस्या नियुक्ति प्रक्रिया की है। क्योंकि पर्यवेक्षकों की नियुक्ति राज्य स्तर पर की जाती है ऐसे में अन्य जिलों से आने वाली महिला पर्यवेक्षक गृज जिले में स्थानांतरण लेकर चली जाती है। यह कार्य ग्रहण करने से पहलीे ही वहां नियुक्ति ले लेती है।
महिला पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारियां
- आंगनबाड़ी केंद्रों के कार्यों की निगरानी और समन्वय करना।
- महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा अभियान आयोजित करना।
- प्रगति रिपोर्ट तैयार करना।
- कार्यक्रमों का उचित दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करना।
- पोषण, स्वास्थ्य और महिला अधिकार जैसे विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना।
- सरकारी कार्यक्रमों की प्रगति और प्रभाव पर नजर रखना।
- महिलाओं और बच्चों के मुद्दों के बारे में समुदायों को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए वकालत और जागरूकता अभियान की योजना बनाना।
जिले में पर्यवेक्षकों की स्थिति
ब्लॉक केन्द्र स्वीकृत कार्यरत
धौलपुर 232 07 04
राजाखेड़ा 192 07 03
बाड़ी 218 07 05
बसेड़ी 126 04 02
सरमथुरा 129 04 00
सैंपऊ 156 05 01
जिले में महिला पर्यवेक्षकों के पद खाली हैं। लेकिन कार्य में कोई परेशानी ना हो इसके लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों का पर्यवेक्षकों को अतिरिक्त चार्ज दे रखा है।
-धीरेन्द्र सिंह, उपनिदेशक महिला एवं बाल विकास
Published on:
23 Feb 2025 07:04 pm
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