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नगर पालिका के पास संसाधनों का अभाव, सफाई व्यवस्था चौपट

बाड़ी नगर पालिका में बजट तो हर साल आता है। लेकिन इसके बाद भी संसाधनों की कमी बनी हुई है। संसाधन नहीं होने से सफाई कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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नगर पालिका के पास संसाधनों का अभाव, सफाई व्यवस्था चौपट

नगर पालिका के पास संसाधनों का अभाव, सफाई व्यवस्था चौपट

धौलपुर. बाड़ी नगर पालिका में बजट तो हर साल आता है। लेकिन इसके बाद भी संसाधनों की कमी बनी हुई है। संसाधन नहीं होने से सफाई कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कर्मचारी क्षतिग्रस्त और जर्जर हो चुकी हथ गाडिय़ों से कचरा उठा रहे हैं। उधर, नगर पालिका प्रशास का कहना है कि बजट का अभाव होने से परेशानी बनी हुई है। पिछले कुछ माह से नगरपालिका में अपने अपने चहेतों के बिल पास हो रहे हैं। वहीं, दूसरी और सडक़ों से कचरा उठाने की हाथ गाड़ी खरीदने के लिए नगरपालिका पर पैसे न होना हास्यास्पद है। बाड़ी में कहने को तो नियमित सफाई व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। अगर कोई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन भी करता है। तो उसे इस तरह के संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं कि वह कचरा उठाने के स्थान पर कचरा फैलाने का काम करता है। बाड़ी में कई ऐसे सफाई कर्मचारी हंै, जो बिना संसाधनों या फिर ऐसे संसाधनों का उपयोग करते है। जिनसे कचरा साफ होने के स्थान पर गलियों में फैल जाता है।

सफाई व्यवस्था पर नहीं ध्यान

सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग नहीं होने से कस्बे में सफाई का हाल बेहाल है। जिम्मेदार अधिकारी के ध्यान नहीं देने से सफाई कार्य रामभरोसे बना हुआ है। वहीं, सफाई को लेकर पालिका प्रशासन स्थानीय लोगों से फीडबैक तक नहीं लेता, जिससे सफाई व्यवस्था में सुधार हो सके। जब कभी कचरा उठाने वाला ट्रेक्टर सडक़ों पर दिख भी जाता था तो उसके कर्मचारी मनमाने ढंग से गलियों में निकलते हैं जिससे लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है।


भागवत कथा में भक्त प्रहलाद चरित्र का किया वर्णन

बाड़ी कस्बा में बसेड़ी रोड स्थित एक पैलेस में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में औरंगाबाद से आए कथावाचक प्रिया शरण शास्त्री ने प्रहलाद चरित्र, भरत चरित्र व हिरणकश्यप वध, नरसिंह अवतार व समुद्र मंथन का वर्णन किया। कथावाचक ने व्याख्यान करते हुए कहा कि भागवत कथा एक ऐसा अमृत है कि इसका जितना भी पान किया जाए मन तृप्त नहीं होता है। उन्होंने कहा कि हिरणकश्यप नामक दैत्य ने घोर तप किया। तप से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी प्रकट हुए व कहा कि मांगों जो मांगना है। यह सुनकर हिरणकश्यप ने अपनी आंखें खोली और ब्रह्माजी को अपने समक्ष खड़ा देखकर कहा प्रभु मुझे केवल यही वर चाहिए। मैं न दिन में मरू न रात को, न अंदरए न बाहर, न कोई हथियार काट सके, न आग जला सके, न ही मैं पानी में डूबकर मरू, सदैव जीवित रहूं।