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धौलपुर

स्कूल पहुंचे रहे वाहनों की जांच में ढिलाई, नियम-कायदे ताक पर

बड़े वाहनों में सीसीटीवी व ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य, छोटे दिखा रहे ठेंंगा

– जिले में 12वीं तक के 266 निजी स्कूल संचालित

धौलपुरJul 05, 2024 / 05:36 pm

Naresh

स्कूल पहुंचे रहे वाहनों की जांच में ढिलाई, नियम-कायदे ताक पर Laxity in checking vehicles reaching school, rules and regulations flouted
– बड़े वाहनों में सीसीटीवी व ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य, छोटे दिखा रहे ठेंंगा

– जिले में 12वीं तक के 266 निजी स्कूल संचालित

धौलपुर. नया सत्र शुरू हो गया। स्कूलों में पढऩे के लिए बच्चे पहुंचने लगे है। लेकिन बच्चों को स्कूल ले जाने वाले वाहनों की स्थिति बदहाल है। इन वाहनों में सुरक्षा इंतजामों में लापरवाही बरती जा रही है। वहीं, जिम्मेदार विभाग अनजान बने हुए हैं। सडक़ों पर दौड़ रहे टैम्पो, ऑटो, वैन व स्कूल बसों की जांच नहीं होने से ये कभी भी बड़े हादसे को न्योता दे सकती हैं। बता दें कि स्कूल वाहनों के संचालन के लिए पहली बार नई शैक्षणिक वाहन नियंत्रण पॉलिसी के अनुसार स्कूलों में चलने वाले पीले रंग के वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) लगाना जरूरी है। इसके साथ ही इन वाहनों को कैमरों और पैनिक बटन से भी लैस करना अनिवार्य है। जो वीटीएस इन बसों या वाहनों में लगाई जाएगी, उसकी जानकारी परिवहन विभाग, शैक्षणिक संस्था या स्कूल और अभिभावकों को भी दिया जाना है। शहर में इन वाहनों की स्पीड लिमिट तय है। लेकिन ट्रेफिक पुलिस का इंटरसेप्टर वाहन हाइवे पर ही दौड़ लगाता रहता है पर इन वाहनों की जांच से दूरी बनाकर रखी है। बता दें कि गत दिनों जिला पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरड़ा ने स्कूल संचालकों की बैठक लेकर आवश्यक निर्देश दिए थे। लेकिन उसके बाद भी लापरवाही बरती जा रही है।
परिजन देख सकते हैं बच्चों की लोकेशन

विद्यार्थियों के सुरक्षित परिवहन के लिए बनाई गई। नई नीति अक्टूबर 2019 से लागू है। इसमें सभी स्कूल व कॉलेज वाहनों में ट्रैकिंग उपकरण लगाने का प्रावधान हैं। जिससे परिजन अपने बच्चों की लाइव लोकेशन देख सकते हैं। कोई भी वाहन 15 साल से अधिक पुराना नहीं होगा। सभी वाहनों पर डायल 100 हेल्पलाइन का नंबर अंकित होना चाहिए। सभी वाहन पीले रंग के होंगे। स्कूल, कॉलेज का नाम, पता, फोन नंबर लिखना भी अनिवार्य है।
स्कूल वैन में ये सुविधाएं जरूरी

स्कूल बसों में विद्यार्थियों के बस्ते, टिफिन तथा पानी की बोतल रखने का पर्याप्त एवं सुरक्षित स्थान होगा। वैन की हार्ड टॉप बॉडी होना अनिवार्य है। इसके साथ ही बस चालकों का हर साल मेडिकल परीक्षण होगा, आंखों की जांच भी करानी होगी। वर्दी अनिवार्य होगी। वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग, धूम्रपान करने पर भी पूर्णत रोक रहेगी।
5 साल पुराने लाइसेंस की अनिवार्यता

बस चालकों के पास पांच साल पुराना व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य है। ऐसे चालक जिनका दो बार से अधिक यातायात नियम तोडऩे के उल्लंघन में चालान हुआ हो, उन्हें नहीं रखा जाएगा। साल में एक बार भी गति से वाहन चलाने, नशे की स्थिति, आपराधिक व्यक्ति के वाहन चलाने पर चालान होने पर उसे नहीं रखा जा सकेगा।
ट्रेफिक पुलिस के सामने से गुजर रहे वाहन, फिर भी अनजान

बता दें कि शहर में ट्रेफिक पुलिस के सामने से प्रतिदिन स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहन गुजरते हैं लेकिन इनकी औचक जांच नहीं होती है। हालांकि, पूर्व में एसपी ने निर्देश पर ट्रेफिक और परिवहन विभाग ने संयुक्त अभियान चला जांच कार्रवाई की लेकिन वो सिर्फ खानापूर्ति रही। उधर, परिवहन विभाग भी इन वाहनों को लेकर रुचि नहीं दिखाता है। वह ट्रेफिक पुलिस की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ लेता है। उक्त मामले में टीआई टीनू सोगरवाल से संपर्क किया नहीं बात नहीं हो पाई। वहीं, डीटीओ से भी मामले में संपर्क साधा पर बात नहीं हो सकी।
शिक्षा विभाग को कुछ नहीं पता, झाड़ा पल्ला

खास बात ये है कि जिम्मेदार शिक्षा विभाग निजी स्कूलों के संचालित वाहनों से पूरी तरह से अनभिज्ञ है। उनका कहना है कि बसों का रेकॉर्ड परिवहन विभाग रखता है। उनके पास केवल पंजीकरण होता है। जबकि बता दें कि हरियाणा में हुए एक हादसे के बाद शिक्षा विभाग समेत कई अधिकारियों पर गाज गिर चुकी है।
निजी स्कूल के आंकड़े- कक्षा एक से 10 तक विद्यालय की संख्या 163- कक्षा एक से 12 तक विद्यालय की संख्या 103- प्ले स्कूल के आंकड़ों की संख्या नहीं

निजी स्कूलों में संचालित बसों की जानकारी परिवहन विभाग के पास है। हमारे कार्यालय में स्कूलों का पंजीकरण है।
– गिर्राज शर्मा, प्रशासनिक अधिकारी शिक्षा विभाग धौलपुर

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