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किराये के भवनों में छंट रही चिट्टियां, सुविधाएं तो दूर डाकघर शाखाओं में बैंच तक नहीं

धौलपुर. डाक विभाग की ओर से जिले में संचालित डाकघर में आधे से ज्यादा के पास अपना खुद का भवन नहीं है। इनका संचालन किराए के भवन या मकान में हो रहा है। किराये के भवन में चल रहे डाकघर एक ही कमरे में चल रहे हैं।

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 Letters are being sorted in rented buildings, forget facilities, there are not even benches in post office branches.

किराये के भवनों में छंट रही चिट्टियां, सुविधाएं तो दूर डाकघर शाखाओं में बैंच तक नहीं

धौलपुर. डाक विभाग की ओर से जिले में संचालित डाकघर में आधे से ज्यादा के पास अपना खुद का भवन नहीं है। इनका संचालन किराए के भवन या मकान में हो रहा है। किराये के भवन में चल रहे डाकघर एक ही कमरे में चल रहे हैं। हाल ये है कि कार्मिक के लिए बैठने तक की जगह नहीं है ग्राहक तो बेचारा खड़ा ही रहता है। जबकि यहां प्रतिदिन दर्जनों ग्राहकों का आना जाना रहता है। केन्द्र सरकार के अहम महकमे के बाद आजादी के 76 सालों बाद भी खुद के भवन तक नहीं हैं।

पत्रिका टीम ने जिले में डाकघर के हालात देखें तो मालूम पड़ा कि मंडल में 28 विभागीय डाकघर और 256 डाक घर ग्रामीण शाखा के संचालित हैं। जिनमें से केवल 4 भवन डाक विभाग के अपने है। बाकि भवन किराये के मकानों में संचालित हैं। जिनमें न तो ग्राहको के लिए बैठने की जगह है ना तो उनके लिए पानी की व्यवस्था है। जिससे ग्राहकों को परेशानी उठानी पड़ती है। जबकि यहां आधार कार्ड बनाने समेत सरकारी योजनाओं के लाभ लेने के लिए ग्राहक आते हंै। लेकिन ग्राहकों का सत्कार तो दूर बैठने के लिए बैंच भी नहीं मिलती है। बता दें कि धौलपुर मण्डल में डाकघर शाखाओं में 5 लाख 60 हजार खाते संचालित हैं।

दिव्यांग ग्राहकों को ऊपरी मंजिल पर चढऩे में आती हैं दिक्कत

डाक विभाग की सुविधाएं पहले से तो काफी डिजिटल हो गई हैं। जिससे ग्राहकों ने डाकघर से लेनदेन अब वापस शुरू कर दिया है। इसके साथ ही किसानों को मिलने वाली सुविधाएं भी मिल रही हैं। लेकिन यहां पर पहुंचने के लिए ग्राहकों को परेशानी होती है। वहीं बड़ी संख्या में डाक विभाग के किराये पर संचालित हो रहे भवन एक मंजिला पर हंै। जिन पर दिव्यांग ग्राहकों को चढऩा दुश्वार हो जाता है। ये भवन पुराने होने के कारण बारिश में इनकी छत टपकने लगती है। जिससे कई जरूरी दस्तावेज भी भीग जाते हैं। लेकिन डाक विभाग ने अभी तक खुद के भवन को डिजिटल नहीं बना पाया है। उधर, भारतीय डाक कर्मचारी संघ धौलपुर के सचिव महेन्द्र कुमार ने बताया कि डाक घर शाखाओं में कार्यरत कर्मचारियों को पानी व शौचालय की परेशानी उठानी पड़ती है। संघ ने इसको लेकर कई दफा अधिकारियों को पत्र सौंपा है।

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केस 1.

धौलपुर शहर के कोर्ट परिसर में बना डाक घर एक कमरे में संचालित हो रहा है। जिससे ग्राहकों को लेने देन सहित कई परेशानी आती हैं। जबकि यहां पर आसपास के काफी लोग लेनदेन सहित डाक भेजने के लिए आते हैं। लेकिन सुविधाओं के अभाव में डिजिटल नहीं हो पाया भवन।

केस 2.

धौलपुर शहर के सुनार मार्केट में बना डाक घर एक कमरे में संचालित हो रहा है। जिससे यहां पर ग्राहकों को आना भी कम पसंद है। वह ग्राहक अब प्रधान डाक घर में जाने लगे हंै। इसका कारण यह भी है। कि यहां पर बैठने से लेकर कोई सुविधा तक नहीं है। स्टाफ भी कम है।

केस 3.

कंचनपुर में संचालित डाक घर प्रथम मंजिल पर है। यहां ग्राहकों को ऊपर चढकर जाना पड़ता है। कई बार तो सर्वर ना होने की वजह से कई घंटों ग्राहकों को खड़ा रहना पड़ता है। दिव्यांग ग्राहक ऊपर चढकऱ लेनदेन करने नहीं पहुंच पाते हैं। जिसके कारण कई ग्राहको ने खाता बंद करा दिए हैं।

डाकघर की स्थिति पर एक नजर

- कुल 506000 खाते धौलपुर मंडल के डाकघरों में

- 28 विभागीय डाकघर जिले में संचालित

- 256 डाकघर ग्रामीण शाखा में संचालित

- डाक विभाग के पास स्वयं के चार भवन हैं। अन्य स्थानों पर अनुबंध के आधार पर भवन किराये पर लिया हुआ है। सभी डाकघरों में सुविधाएं उपलब्ध हैं। ग्राहकों को बैठने के लिए इंतजाम नहीं है तो उसकी व्यवस्था कराई जाएगी। डाकघर प्रशासन ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के कृत संकल्पित है।

- रामवीर शर्मा, मंडल डाक अधीक्षक धौलपुर