
भगवान श्री कृष्ण ने खड़े होकर देखा था पंचकुण्डीय यज्ञ, आज भी मौजूद हैं वहां चरण चिह्न
भगवान श्री कृष्ण ने खड़े होकर देखा था पंचकुण्डीय यज्ञ, आज भी मौजूद हैं वहां चरण चिह्न
मचकुण्ड धाम में हुआ था यज्ञ
धौलपुर. तीर्थराज मुचुकुंद मेंं हुए पंचकुण्डीय महायज्ञ में आए भगवान श्री कृष्ण ने शिला पर से यज्ञ का अवलोकन किया था। इसके प्रमाण के रूप में चरण चिह्न भी आज भी मौजूद हैं। वहीं तीर्थराज मुचकुंद के पास स्थित श्यामासचल पर्वत, जिसे अब मोनी सिद्ध पहाड़ के नाम से जाना जाता है। वह भी मौजूद है। जहां पर महाराज मुचुकुंद को भगवान श्री कृष्ण ने चतुर्भुज रूप में साक्षात दर्शन दिए थे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस पर्वत पर स्थित गुफा में भगवान श्री कृष्ण ने जरासंध के सहयोगी कालियावन का वध मुचकुंद ऋषि द्वारा कराया था। कालियावन वध के बाद मुचुकुंद ऋषि ने यहां पंच कुंडीय यज्ञ कराया। जिसके साक्षी भगवान श्री कृष्ण बने। माना जाता है कि वध का प्रायश्चित करने के लिए मुचुकुंद महाराज ने यज्ञ कराया था। उस जगह को तीर्थराज मचकुंड के नाम से जाना जाता है। इसका उल्लेख विष्णु पुराण के व श्रीमद्भागवत की दसवें स्कंध के पंचम अंश 23 वें व 51वें अध्याय में मिलता है।
गुफा में बना हुआ है मंदिर
लाडली जगमोहन मंदिर के महंत कृष्णदास ने बताया कि जिस गुफा में महाराज मुचुकुंद सोए थे। वह गुफा पहाड़ी के अंदर जाती है। लेकिन बाद में उसमें मंदिर बना दिया गया है। इसमेंं कृष्ण भगवान की मूर्ति को स्थापित किया गया है। गुफा इस बात की गवाही देती है कि भगवान श्रीकृष्ण ने यहां पर म्लेच्छ देश के राजा कालियावन का वध किया था। बाद में मुचुकुंद महाराज को चतुर्भुज रूप में दर्शन दिए। इसके बाद भगवान द्वारिकापुरी चले गए और मुचुकुंद उत्तराखण्ड में तपस्या करने चले गए। इसका बड़ा पौराणिक इतिहास रहा है।
Published on:
03 Apr 2021 05:37 pm

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