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- मेला कौमी एकता और सौहार्द की मिसाल पेश करता है
- 8 को मुशायरा तो 9 को होगा कव्वाली का आयोजन
धौलपुर. कौमी एकता और सौहार्द की मिसाल माने जाने वाले ऐतिहासिक तीर्थराज मचकुंड पर मेले का शुभारंभ 8 सितम्बर ऋषि पंचमी को संतों के शाही स्नान के साथ होगा। तीर्थराज मचकुंड मेले में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के आस-पास के क्षेत्रों और दूरदराज से लाखों की तादाद में श्रद्धालु सरोवर में डुबकी लगाने पहुंचते हैं। तो वहीं पहाड़ वाले अब्दाल शाह बाबा की दरगाह में भी माथा टेकते हैं। और शाम को उर्स और कव्वाली का लुत्फ उठाते हैं।
धौलपुर के अरावली पर्वत शृंखलाओं की गोद में स्थित सुरम्य प्राकृतिक सरोवर मचकुंड को सभी तीर्थों का भान्जा कहा जाता है। जो कि 108 मंदिरों की शृंखला से घिरा हुआ है। इस बार मचकुंड मेला का आयोजन 8 सितम्बर से संतों के शाही स्नान के साथ होगा। जहां संत सुबह 6 बजे अखाड़े के रूप में भारती हनुमान मंदिर से धाम की ओर प्रस्थान करेंगे और कुंड में शाही स्नान करेंगे। मंगल भारती हनुमान मंदिर के महंत रणछोड़ दास ने बताया कि इसके बाद संतों का भंडारा आयोजित किया जाएगा। जिसके बाद मेला का शुभारंभ होगा।
मान्यता है कि यहां नवविवाहित जोड़ों के सहरे की कलंगी को सरोवर में विसर्जित कर उनके जीवन की मंगलकामना की जाती हैं। हजारों की संख्या में नवविवाहित जोड़े हर वर्ष यहां आते है। वहीं इस मेले की एक मान्यता है कि सुबह श्रद्धालु तीर्थराज सरोवर में श्रद्धा की डुबकी लगाते हैं फिर शाम को पहाड़ अब्दुल शाह की दरगाह पर माथा टेक कर रात्रि में होने वाले मुशायरे और कव्वाली का लुफ्त उठाते हैं। मेले में आने वाली भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए हैं।
सात को तकरीर, आठ को मुशायरा, नौ को कव्वाली
कौमी एकता के प्रतीक मचकुण्ड मेले वाले दिन दरगाह पहाड़ वाले बाबा पर उर्स का आयोजन होता है। और इस बार 131वां सालाना उर्स आयोजित किया जाएगा। जिसके अंतर्गत 7 अगस्त को मीलाद शरीफ (तकरीर) तो 8 अगस्त को मुशायरा का आयोजन होगा। 9 अगस्त को कव्वाली की शाम सजेगी। इस दौरान कव्वाली में सिंगर सलीम अल्ताफ गुलशानाबाद जावरा रतलाम और सलमान अजमेरी सिंगर नागपुर महाराष्ट्र अपनी कव्वाली प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन रात 10 बजे से होगा।
गुरुद्वारा में भी उमड़ेगा भक्तों का सैलाब
सौहार्द और एकता का प्रतीक मचकुण्ड मेले वाले दिन वहीं पास स्थित शेर शिकार दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारे पर भी हजारों की संख्या में सिख भाई पहुंचेंगे जो सुख, शांति और भाईचारे की अरदास लगाएंगे। गुरुद्वारा के प्रबंधक संत ठाकुर सिंह ने बताया कि मचकुण्ड मेला सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस दिन यहां तीन धर्मों के लोगों का समागम होता है। मेला वाले दिन गुरुद्वार पर भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। जो इस स्वर्णिम काल का हिस्सा बनते हैं।
Published on:
04 Sept 2024 05:46 pm
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