
दिव्यांगों को बना रहे आत्मनिर्भर, आगरा-ग्वालियर से भी आ रहे लोग
दिव्यांगों को बना रहे आत्मनिर्भर, आगरा-ग्वालियर से भी आ रहे लोग
धौलपुर. भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (बीएमवीएसएस) की ओर से धौलपुर में स्थापित किया गया केन्द्र सिर्फ धौलपुर ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के दिव्यांगों के लिए भी लाभकारी साबित हो रहा है। आगरा और ग्वालियर के भी दिव्यांग अथवा दुर्घटना में अंग गंवाने वाले लोग यहां आकर निशुल्क कृत्रिम अंग प्राप्त कर रहे हैं।
धौलपुर में जिला अस्पताल परिसर में बीएमवीएसएस का कार्यालय एवं वर्कशॉप है। यहां दिव्यांगों को उनकी आश्यकता के अनुसार जयपुर फुट समेत कृत्रिम हाथ-पैर, पंजे आदि बना कर दिए जा रहे हैं। स्थापना के करीब तीन माह में ही 46 लोगों ने इस केन्द्र से लाभ लिया है। केन्द्र के प्रभारी सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक सक्सेना ने बताया कि धौलपुर में केन्द्र खोलने का मकसद ही तीन राज्यों में दिव्यांगों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाना था। धौलपुर मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है। ऐसे में सीमावर्ती जिलों के लोग भी इससे लाभ उठा रहे हैं।
विधायक बोहरा ने किए थे प्रयास
राजाखेड़ा विधायक रोहित बोहरा ने बीएमवीएसएस के पदाधिकारियों से मिलकर प्रयासों से धौलपुर में केन्द्र की स्थापना की मांग की थी। उन्होंने धौलपुर में केन्द्र खोले जाने से तीन राज्यों के लोगों को होने वाले लाभ के बारे में भी पदाधिकारियों को बताया। इसके बाद 21 फरवरी को धौलपुर में केन्द्र की स्थापना की गई।
यह प्रदान किए कृत्रिम अंग
सक्सेना ने बताया कि धौलपुर केन्द्र से अब तक कुल 46 कृत्रिम अंग प्रदान किए गए हैं। इनमें घुटने के नीचे के कटे हिस्से वालों के 16, घुटने के ऊपर के कटे हिस्से वालों के 7, पोलियोग्रसित लोगों के 15, पंजे से कटे हाथों के 5 और बांह से कटे हाथों के 3 कृत्रिम अंग प्रदान किए गए हैं।
धौलपुर में ही बना रहे
धौलपुर स्थित केन्द्र की वर्कशॉप में ही कृत्रिम अंगों का निर्माण किया जा रहा है। यहां कुशल तकनीशियनों की मदद से दिव्यांगों को नाप के अनुसार कृत्रिम अंग लगाए जा रहे हैं। कुछ बने हुए कृत्रिम अंग व जूते आदि जयपुर से मंगाए गए हैं।
यह है बीएमवीएसएस
भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (बीएमवीएसएस) की स्थापना 29 मार्च 1975 में जयपुर में भगवान महावीर के निर्वाण के 2500वें वर्ष के उपलक्ष्य में की गई थी। यह एक धर्मनिरपेक्ष, गैर-धार्मिक, गैर-सरकारी, गैर-राजनीतिक, गैर-सांप्रदायिक, गैर-क्षेत्रीय और लाभ के लिए नहीं धर्मार्थ संगठन है। यह शारीरिक रूप से अक्षम लोगों, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और वंचितों की मदद के लिए स्थापित किया गया है। बीएमवीएसएस के संस्थापक और मुख्य संरक्षक डी.आर. मेहता के जीवन में एक दर्दनाक घटना से संस्था का जन्म हुआ। एक सडक़ दुर्घटना में उनका एक पैर कुचल गया। इससे मेहता को कृत्रिम अंग प्राप्त करने के लिए विकलांगों, विशेष रूप से वंचितों को होने वाली समस्याओं का एहसास हुआ।
27 देशों में कर रही काम
बीएमवीएसएस ने भारत और दुनिया भर के 27 देशों में कृत्रिम अंग (जयपुर फुट किस्म), कैलीपर्स, और अन्य सहायक उपकरण और उपकरण प्रदान करके 20 लाख से अधिक विकलांगों और पोलियो रोगियों का पुनर्वास किया है।
इनका कहना है
बीएमवीएसएस के केन्द्र में कृत्रिम अंग व उनको लगाना बिलकुल मुफ्त है। लोगों को एक भी रुपया खर्च नहीं करना होता है। आगरा, मुरैना, ग्वालियर आदि स्थानों से भी लोग यहां आ रहे हैं।
- अशोक सक्सेना, केन्द्र प्रभारी, बीएमवीएसएस धौलपुर
Published on:
25 May 2023 07:45 pm
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