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मोबाइल की लत बिगाड़ रही नौनिहालों के आंखों की सेहत

मोबाइल फोन आज जहां बड़ों की जरूरत बन चुका हैं, वहीं अब यह नन्हे बच्चों के लिए भी खतरे की घंटी बनता जा रहा है। धौलपुर जिले में ३ से 7 वर्ष की आयु के बच्चों में मोबाइल देखने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। लगातार मोबाइल देखने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, भूख में कमी, नींद की समस्या और आंखों से पानी आना जैसी दिक्कतें सामने आ रही हैं।

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मोबाइल की लत बिगाड़ रही नौनिहालों के आंखों की सेहत Mobile addiction is ruining the eye health of children

-अभिभावक नहीं दे रहे ध्यान...बच्चों में बढ़ रही मायोपिया की समस्या

-तीन से सात वर्ष आयु के बच्चों में बढ़ा मोबाइल देखने का के्रज

धौलपुर. मोबाइल फोन आज जहां बड़ों की जरूरत बन चुका हैं, वहीं अब यह नन्हे बच्चों के लिए भी खतरे की घंटी बनता जा रहा है। धौलपुर जिले में ३ से 7 वर्ष की आयु के बच्चों में मोबाइल देखने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। लगातार मोबाइल देखने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, भूख में कमी, नींद की समस्या और आंखों से पानी आना जैसी दिक्कतें सामने आ रही हैं।

जिला चिकित्सालय में इन दिनों काफी केस ऐसे सामने आ रहे हैं जिनमें तीन से सात वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में मोबाइल की लत से मायोपिया की समस्या के साथ उनकी आंखों में अन्य परेशानियां बढ़ रही हैं। वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों में ड्राइनेस, जलन और रोशनी कम होने की समस्या हो सकती है। खासकर जो बच्चे लेटकर मोबाइल देखते हैं, उनके लिए यह आदत और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। ऐसे बच्चों में कम उम्र में ही चश्मा लगने की संभावना बढ़ जाती है।

दिमागी विकास को प्रभावित करता है मोबाइल

डॉ. शर्मा के अनुसार मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों के दिमागी विकास को भी प्रभावित करता है। इससे पढ़ाई में मन नहीं लगता और एकाग्रता कम हो जाती है। माता-पिता को चाहिए कि बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करें और उन्हें आउटडोर गतिविधियों की ओर प्रेरित करें। मोबाइल की लत का असर अब बच्चों के व्यवहार में भी साफ नजर आने लगा है। कई बच्चे ऐसे हैं जो मोबाइल के बिना खाना तक नहीं खाते। मोबाइल न मिलने पर चेहरे पर मायूसी, गुस्सा और चिड़चिड़ापन दिखने लगता है। कुछ बच्चों की आंखों के नीचे काले धब्बे भी पडऩे लगे हैं।

माता-पिता दें बच्चों पर ध्यान

डॉ शर्मा ने बताया कि ३ से 7 साल की उम्र में मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की आंखों के लिए बेहद नुकसानदायक है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में ड्राइनेस जलन और रोशनी कम होने की समस्या होती है। जो बच्चे लेटकर मोबाइल देखते हैं, उनमें कम उम्र में चश्मा लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। माता-पिता समय रहते बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करें और बाहर खेलने की आदत डालें। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते सावधानी बरती जाए तो बच्चों की आंखों को सुरक्षित रखा जा सकता है। बच्चों को दिन में सीमित समय के लिए ही मोबाइल दें, बीच-बीच में आंखों को आराम दें, हरी सब्जियां, फल और पौष्टिक आहार दें तथा बाहर खेलने के लिए प्रेरित करें।

केस 1

अस्पताल में अपने बच्चे का इलाज कराने आई प्रेमवती ने बताया कि उनका बच्चा मोबाइल देखने के कारण चिड़चिड़ा हो गया है। मोबाइल देखने से उसकी भूख कम हो गई है, नींद भी पूरी नहीं आती। हम मोबाइल छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मोबाइल न मिलने पर बच्चा खाना भी नहीं खाता।

केस 2

संतर रोड पर रहने वाले दिवाकर शर्मा ने बताया कि उनके बच्चे को कुछ दिनों से कम दिखने लगा है, और उसके सिर में दर्द भी रहता है। उन्होंने बताया कि यह सब मोबाइल के कारण ही हुआ है। उसे खुश करने के लिए कभी-कभी मोबाइल दे देते थे, जो अब उसकी आदत में आ गया।

सावधानी बरतना सबसे जरूरी

:: बच्चों को दूर रखी चीज को पहचानने का अभ्यास कराएं।

:: मोबाइल फोन देखने का समय धीरे-धीरे कम करें।

:: आसमान में ऊंचे तक गेंद उछालकर कैच करने का अभ्यास कराएं।

:: मोबाइल की जगह अन्य खेल गतिविधियों में रुचि बढ़ाएं