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पशुओं के उपचार के लिए मोबाइल वेटरनरी यूनिट शुरू, मौके पर मिलेगा इलाज

प्रदेश में 536 मोबाइल वेटरनरी यूनिट संचालित हैं। इस योजना के तहत पशुपालक अपने बीमार पशु के उपचार के लिए 1962 पर कॉल करेगा उसके बाद मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा की वैन उसके घर पर उपचार करने के लिए पहुंचेगी।

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पशुओं के उपचार के लिए मोबाइल वेटरनरी यूनिट शुरू, मौके पर मिलेगा इलाज Mobile veterinary unit started for treatment of animals, treatment will be available on the spot

- पशु पालक 1962 पर फोन कर ले सकेंगे मदद

धौलपुर. खुशहाल पशुपालक और समृद्ध राजस्थान के तहत केंद्रीय प्रवर्तित योजना मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा के लिए बुधवार सुबह पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत व राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने आगरा रोड स्थित राज्य पशुधन प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान जयपुर में कॉल सेंटर का लोकार्पण किया। गौरतलब है कि प्रदेश में 536 मोबाइल वेटरनरी यूनिट संचालित हैं। इस योजना के तहत पशुपालक अपने बीमार पशु के उपचार के लिए 1962 पर कॉल करेगा उसके बाद मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा की वैन उसके घर पर उपचार करने के लिए पहुंचेगी।

जिला कलेक्टर श्री निधि बीटी के तत्वावधान में पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने पुरानी सब्जी मंडी स्थित कार्यालय संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग से 1962 मोबाइल पशु वेटरनरी यूनिट वैन को एकीकृत कॉल सेंटर 1962 से प्राप्त सूचना के आधार पशुपालक के लिए उपचार के लिए रवाना किया। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ.रामावतार सिंघल ने बताया कि जिले में पांच मोबाइल वेटरनरी यूनिट संचालित हैं जो पशुपालक के एकीकृत कॉल सेंटर 1962 पर कॉल करने पर प्राप्त सूचना के आधार पर सुबह 9 से सांय 5 बजे के बीच बीमार पशुओं की चिकित्सा का कार्य करेंगी। इस दौरान विभागीय अधिकारियों में डॉ.संदीप भार्गव, डॉ.इंद्रमणि त्रिपाठी, डॉ.रवि मित्तल, डॉ.सुशांत शर्मा, घनश्याम शर्मा, पूर्व सरपंच अनुराग मुदगल, गौ सेवक, किसान और पशुपालक मौजूद रहे।

मोबाइल यूनिट में चिकित्सक व रहेगी दवा

पशुपालन विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.अजय पाठक ने बताया कि इन गाडिय़ों में एक चिकित्सक, एक पैरावेट, एक चालक कम हेल्पर, दवाइयां व चिकित्सकीय उपकरण होंगे। उन्होंने बताया की मोबाइल वेटरनरी यूनिट धौलपुर सहित राजाखेड़ा, बाड़ी बसेड़ी और सैंपऊ ब्लॉक में संचालित हैं। डॉ.इंद्रप्रकाश शुक्ला ने बताया कि इस योजना से पशुपालकों को समय पर उपचार मिल सकेगा व पशु को अस्पताल लाने ले जाने में होने वाले आर्थिक नुकसान व परेशानी से बचा जा सकेगा।