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लालच देकर रकम हड़पी तो होगी नीलामी, मामला दर्ज होते ही बैंक खाते फ्रीज

- बड्स अधिनियम-2019: ज्यादा वापसी का लालच देने वालों पर कसेगा शिकंजा, पुलिस को मिले अधिकार, मामला गैर जमानती - थाना प्रभारी ही कर सकेंगे जांच, बिना वारंट के प्रवेश कर ले सकेंगे तलाशी   धौलपुर. जमा पर ज्यादा वापसी का लालच देकर लोगों को ठगने वालों पर शिकंजा कसा गया है।

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 Money will be auctioned by greed, bank accounts freeze as soon as the case is registered

लालच देकर रकम हड़पी तो होगी नीलामी, मामला दर्ज होते ही बैंक खाते फ्रीज

लालच देकर रकम हड़पी तो होगी नीलामी, मामला दर्ज होते ही बैंक खाते फ्रीज


- बड्स अधिनियम-2019: ज्यादा वापसी का लालच देने वालों पर कसेगा शिकंजा, पुलिस को मिले अधिकार, मामला गैर जमानती

- थाना प्रभारी ही कर सकेंगे जांच, बिना वारंट के प्रवेश कर ले सकेंगे तलाशी

धौलपुर. जमा पर ज्यादा वापसी का लालच देकर लोगों को ठगने वालों पर शिकंजा कसा गया है। धोखाधड़ी करने वाला व्यक्ति/संस्था हो या फिर नॉन बैंकिंग फाइनेंस कम्पनी, उन पर अब आसानी से मामले दर्ज हो सकेंगे, इनकी जांच थाना प्रभारी ही करेगा। प्रतिबंधित स्कीम के अलावा गैर कानूनी ढंग से चांदी काट रही अनगिनत कंपनी/सोसायटी के साथ फर्जीवाड़ा करने वाले व्यक्ति के भी बैंक खाते मामला दर्ज होते ही फ्रीज होंगे। सूत्रों के अनुसार बढ़ती फाइनेंस कंपनियों के बीच ज्यादा ब्याज, बम्पर इनाम समेत आकर्षक लॉटरी का प्रलोभन देकर धौलपुर जिले में भी दर्जनों लोग/संस्था लोगों से रकम जमा कर रहे हैं। अनियंत्रित जमा योजना प्रतिषेध अधिनियम (बड्स 2019) के तहत इन योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। रजिस्टर्ड बैंक अथवा सोसायटी भी अगर रकम लौटाने से इनकार करे तो सहकारी विभाग इस्तगासा पेश करेगा। हाल ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पुलिस अधिकारियों को बड्स-2019 अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। धौलपुर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ने सभी पुलिस अधिकारियों को इसकी गाइडलाइन जारी की है। अधिनियम में दंड देने और जमा हो चुकी राशि को वसूलने के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं जो लोगों को नुकसान से बचाएंगे।

जमानत नहीं होगी, तलाशी भी बिना वारंट के

सूत्रों के अनुसार अनियंत्रित निक्षेप योजनाएं संलाचित करना तथा अनियमित जमा राशि एकत्र कर लालच देने वाली योजनाओं का प्रचार-प्रसार अब दण्डनीय है। संज्ञेय अपराध और दण्ड के प्रावधान हैं। राजस्थान सहकार पोर्टल पर जो इस तरह की शिकायतें आती थीं। उनको जिले के उप रजिस्ट्रार के पास भेजा जाता है, इसमें धारा 4/22 का अपराध है तो वे न्यायालय में इस्तगासा पेश करेंगे, लेकिन संज्ञेय अपराध का मामला होने पर उप रजिस्ट्रार अब इसे थानों पर भेजेंगे जहां मामला दर्ज कर थाना प्रभारी इसकी जांच कर न्यायालय को रिपोर्ट करेंगे। इस अधिनियम के तहत चिटफंड व धोखाधड़ी की सभी धाराएं लगाई जाएंगी। इस तरह के मामलों में परिवादी उप रजिस्ट्रार नहीं शिकायतकर्ता होगा। इसमें सभी अपराध संज्ञेय व गैर जमानती हैं, इसमें कुर्की का प्रावधान तक है। और तो और बिना वारंट के जांच अधिकारी प्रवेश कर तलाशी कर सकता है। एफआईआर की कॉपी एसओजी (एसएफआईयू) को भेजी जाएगी।

तरह-तरह के तकनीकी पेंच

बड्स अधिनियम-2019 ने कई तरह के तकनीकी पेंच से राहत दी है। अपराध के तीन तरीके माने गए,जिनमें अनियमित जमा योजनाएं चलाना, नियमित जमा योजनाओं में धोखाधड़ी के उद्देश्य से डिफॉल्ट करना और अनियमित जमा योजनाओं के संबंध में गलत इरादे से प्रलोभन देना शामिल है। कठोर दंड देने और भारी जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है, ताकि इस तरह की गतिविधियों पर अंकुश लग सके। जमा राशि को वापस लौटाने या पुनर्भुगतान करने के पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत ये योजनाएं किसी भी तरह से अवैध तौर पर जमा राशि जुटाने में सफल हो जाती हैं। सक्षम प्राधिकरण द्वारा संपत्तियों/परिसंपत्तियों को ज्ब्त करने और जमाकर्ता को पुनर्भुगतान किए जाने के उद्देश्य से इन परिसंपत्तियों को हासिल करने का प्रावधान किया गया है। पहले ऐसा नहीं था, कई कानूनी अड़चन के बीच कार्रवाई तक ही नहीं हो पाती थी।

खुलेआम हो रहा खेल

सूत्रों के अनुसार गड़बड़ी के इस खेल से धौलपुर अछूता नहीं है। अनिगनत चल रही नॉन फाइनेंस कंपनियों का पता ही नहीं। असल में व्यक्ति/संस्था हो या कोई अन्य, इनके खिलाफ मामले थानों तक पहुंचते ही नहीं है। कभी-कभार, बतौर उधार वापस नहीं देने अथवा झांसा देकर रकम हड़पने की बात दर्ज की जाती है। एक अनुमान के मुताबिक धौलपुर में ही कई कंपनियां अपने-अपने तरीके से एफडी, ज्यादा रिटर्न, पांच साल में तीन गुना जैसे झांसे के साथ पिछले कई बरसों से सक्रिय हैं। असल में इस तरह के मामले पहले तो लोग दर्ज ही नहीं कराते, कराते भी हैं तो उन्हें दाखिल दफ्तर कर दिया जाता है।

फोटो... इनका कहना है

गाढ़ी कमाई को डूबने से बचाने के लिए यह बड़ा कदम है। पोंजी कंपनियों पर प्रतिबंध की प्रभावी व्यवस्था की गई है। अनियमित जमा योजना को बढ़ावा देने, संचालित करने, विज्ञापन निकालने या जमा स्वीकार करने पर भी शिकंजा कसा गया है। मुख्यालय से मिले दिशा-निर्देश के तहत कार्रवाई कर धरपकड़ करेंगे।

- मनोज कुमार, पुलिस अधीक्षक, धौलपुर