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Dholpur: सरसों के तेल का तडक़ा अब महंगा, भावों में भारी तेजी

धौलपुर. सरसों के दामों में बीते बीस दिनों में खासी तेजी आई है और दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसकी वजह ईरान-इजरायल युद्ध के बादल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव का माहौल और खाद्य सामग्री की सप्लाई पर पड़ रहा असर है। देश में खाद्य तेल का आयात कम हो रहा है।

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Dholpur news

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धौलपुर. सरसों के दामों में बीते बीस दिनों में खासी तेजी आई है और दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसकी वजह ईरान-इजरायल युद्ध के बादल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव का माहौल और खाद्य सामग्री की सप्लाई पर पड़ रहा असर है। देश में खाद्य तेल का आयात कम हो रहा है। बाहर से पॉम ऑयल इत्यादि नहीं आने से देश में सरसों के तेल की डिमांड तेजी से बढ़ी है।

कृषि उपज मंडी में प्रति क्विंटल सरसों फसल के भाव 7690 रुपए तक जा पहुंचे थे। जबकि यह कुछ दिन पहले तक मंडी में भाव 7300 से 7500 के बीच बने हुए थे। उधर, बाजार में खुले खुदरा (रिटेल) भाव में भी बढ़ोतरी हुई है। अब एक लीटर सरसों का तेल करीब 180 से 190 रुपए के बीच बना हुआ है। वहीं, ब्रांड के अनुसार भी दामों में अंतर है। जबकि एमएसपी का भाव 6200 रुपए था।

मंडी में भी आवक कम, किसान ने रोकी फसल

उधर, दामों के बढऩे के साथ ही कृषि उपज मंडी में बीते एक सप्ताह से सरसों की फसल में कमी आई है। भाव बढऩे से किसान भी मौके का फायदा उठाने के चलते मंडी में फसल नहीं ला रहा है। जो फसल आ रही है, वह कम है। जबकि कुछ दिन पहले मंडी में खूब ट्रेक्टर-ट्रॉलियों ग्रामीण क्षेत्र से आ रही थी। यहां आढ़तियों के दुकानों के सामने जमकर खरीद हो रही थी। आढ़तिया ब्रजेश दीक्षित ने बताया कि भाव चढऩे मंडी में भी फसल अब सीमित आ रही है। भावों के और भी बढऩे की आशंका है। देश में डिमांड तेजी से बढ़ी है।

बाजार में मांग बढऩे से पड़ा असर

खाड़ी देशों में बदले हालात से देश में भी खाद्य तेल की मांग तेजी से बढ़ी है। जबकि आयात कम हो रहा है। अभी तक पॉम आयल समेत अन्य तेल पहुंचने से भावों में खास उछाल नहीं आता था लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदली स्थिति ने सरसों के तेल के भाव बढ़ा दिए हैं। जबकि फसल कटाई के समय अप्रेल माह में प्रति लीटर सरसों के तेल का भाव 135 से 140 रुपए के बीच बना हुआ था। बता दें कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सरसों उत्पादक देश है और अभी तक बाहर निर्यात होता था। लेकिन डिमांड बढऩे से इस पर भी असर पड़ा है।

किचन में भी हिसाब बिगडऩे की आशंका

उत्तर भारत में विशेषकर राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, दिल्ली और पंजाब इत्यादि प्रदेशों में सरसों तेल की खासी मांग रहती है। यहां पर भोजन में सरसों का तेल अधिक इस्तेमाल होता है। ऐसे में भाव बढऩे से आम व्यक्ति की किचन पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, जिन्होंने अप्रेल में सरसों का तेल खरीद कर रख लिया था, उन्हें कुछ राहत है। लेकिन आमजन और गरीब तबके के लोगों के अब थोड़ा मुश्किल हो जाएगा। भाव बढऩे से खुले बाजार में भी करीब-करीब रोजाना भाव बदल रहे हैं। साथ ही होटल और रेस्टोरेंट पर भी जायका महंगा हो सकता है। बता दें कि पूर्वी राजस्थान में सरसों की फसल की खासी पैदावार होती है।