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फसल सूखने का मेरे पास कोई इलाज नहीं है, पानी आते ही आएगा

किसानों की फसल पानी के अभाव में सूख रहीं है और अधिकारी उन्हें राहत का भरोसा देने के बजाय यह कहकर दुत्कार रहे हैं कि फसल सूखने का मेरे पास कोई इलाज नहीं है, पानी तो आते ही आएगा। सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचे करीब एक दर्जन गांवों के किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता केएल मीणा को समस्या को बताई त
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रायबरेली

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narendra singh

•

Updated: 21 Feb 2017, 1:03 PM IST

no cure for crop drying,

no cure for crop drying,

किसानों की फसल पानी के अभाव में सूख रहीं है और अधिकारी उन्हें राहत का भरोसा देने के बजाय यह कहकर दुत्कार रहे हैं कि फसल सूखने का मेरे पास कोई इलाज नहीं है, पानी तो आते ही आएगा। सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचे करीब एक दर्जन गांवों के किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता केएल मीणा को समस्या को बताई तो उन्होंने इन्हीं शब्दों में जवाब मिला।

समस्या बताने पर मीणा ने उनसे कहा कि पानी तो आएगा जैसे ही आएगा, मेरे पास कोई इलाज नहीं है। किसानों ने आंगई बांध से पानी के लिए एक और गेट खोलने की मांग रखी तो एक्सईएन ने कहा कि गेट तो बंद है ही नहीं।

किसान बोले कि फसल सूख रही है तो मीणा का कहना था कि पहले में भी पानी देर से पहुंचा तो अब कोई एक-दो दिन में तो पहुंचेगा नहीं। आठ दिन भी लग सकते हैं और पन्द्रह दिन भी। एक्सईएन के रुख को देख किसानों ने खासी तकरार भी की। इस दौरान बाबूलाल, राधेश्याम, विनोद, महेश, पप्पू परमार, मोहन, करणसिंह, खेतसिंह, बाबू सहित कई किसान मौजूद थे।

समझाइश नहीं आई काम
इस दौरान पहुंचे पूर्व विधायक जसवंत सिंह ने किसानों से समझाइश की, तब जाकर किसान शांत हुए। किसानों की मांग पर पूर्व विधायक ने एक्सईएन से मौके पर एईएन को भेजने की बात कही, जिससे गेट खुले होने या नहीं खुले होने की वस्तुस्थिति सामने आ सके। उनके सामने भी एक्सईएन किसानों को ही गलत ठहराते रहे।

यह थी समस्या
दरअसल, कनासिल, परुआ, कुरेंधा, भूरापुरा, चितौरा, सरगना सहित करीब एक दर्जन गांवों के किसान दोपहर में कलक्ट्रेट को ज्ञापन देने के लिए सूखी फसल को लेकर पहुंचे। वे कलक्टर को ज्ञापन देने का इंतजार कर रहे थे। इतने में सिंचाई विभाग के एक्सईएन केएल मीणा उन्हें मिल गए।

किसानों का कहना था कि गत माह प्रशासन ने २६ जनवरी की बारिश के बाद नहर में पानी बंद किया। अब पानी के अभाव में फसल सूख रही है। इस पर एक्सईएन उखड़ गए और बोले कि किसानों को तो एक ही दिन में पानी चाहिए, कैनाल में फुल स्पीड से पानी छोड़ा जा रहा है। पानी आने में समय लगेगा।

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सिंचाई विभाग के अधिकारियों को डेड स्टॉक को रखते हुए पूर्ण रूप से पानी छोडऩे के निर्देश दिए हैं, ताकि फसल को नुकसान नहीं हो। किसी का कार्य हो या नहीं हो, अफसरों का व्यवहार संयमित होना चाहिए।
शुचि त्यागी,
जिला कलक्टर, धौलपुर।

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गलती खुद अधिकारियों की है। उन्हें पहले ही नहर खोलनी चाहिए थी। जब उन्होंने कहा कि तो एक्सईएन ने मुझसे ही बोला कि आपके पास डिमाण्ड आना जरूरी है क्या। सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वह किसानों की समस्या सुने और निदान करें ना कि उन्हें परेशान करें।
गिर्राजसिंह मलिंगा, विधायक, बाड़ी।