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अब ‘शुगर बोर्ड’ सुधारेगा स्कूली बच्चों की सेहत !

डायबिटीज धीरे-धीरे अपना पैर पसार रही है। बीमारी की जद में तो बच्चे भी आ रहे हैं। कई मामले ऐसे सामने आ चुके हैं जिनमें स्कूली बच्चों को टाइप-2 डायबिटीज पाई गई। सीबीएसई बोर्ड ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। जिसको लेकर बोर्ड अपने संबद्ध स्कूलों में ‘शुगर बोर्ड’ का गठन करेगा।

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अब ‘शुगर बोर्ड’ सुधारेगा स्कूली बच्चों की सेहत ! Now 'Sugar Board' will improve the health of school children!

- सीबीएसई स्कूलों में ‘शुगर बोर्ड’ का किया जाएगा गठन

- बच्चों में बढ़ते टाइप-2 डायबिटीज को लेकर सीबीएसई का फैसला

- शिक्षक देंगे विद्यार्थियों अच्छी सेहत का संदेश करेंगे जागरूक

धौलपुर. स्कूली बच्चों में बढ़ते टाइप-2 डायबिटीज के मामलों को रोकथाम के लिए सीबीएसई बोर्ड गंभीर है। बोर्ड ने मामले में गंभीरता बरतते हुए निर्देश पारित किया है। बोर्ड सभी संबद्ध सीबीएसई स्कूलों में ‘शुगर बोर्ड’ का गठन करने जा रहा है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अत्यधिक चीनी के सेवन से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा और उन्हें संतुलित व पौष्टिक आहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

डायबिटीज धीरे-धीरे अपना पैर पसार रही है। बीमारी की जद में तो बच्चे भी आ रहे हैं। कई मामले ऐसे सामने आ चुके हैं जिनमें स्कूली बच्चों को टाइप-2 डायबिटीज पाई गई। सीबीएसई बोर्ड ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। जिसको लेकर बोर्ड अपने संबद्ध स्कूलों में ‘शुगर बोर्ड’ का गठन करेगा। बोर्ड का मानना है कि बढ़ती हुई डायबिटीज की समस्या अब सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, सामाजिक और राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी है। यदि देश की युवा पीढ़ी शारीरिक रूप से कमजोर होगी तो वह राष्ट्र निर्माण में भी कमजोर सिद्ध होगी। पता चला कि इस संबंध में सीबीएसई बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर कुछ समय पहले नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आज कई अभिभावक बच्चों की गलत खानपान की आदतों को आधुनिक सोच मानकर प्रोत्साहित कर रहे हैं। वीकेंड में रेस्टोरेंट जाना, फास्ट फूड स्टॉल पर भीड़ लगाना और बच्चों को खाने-पीने में रोक-टोक न करना इस संकट को और बढ़ा रहा है।

फिजिकल एक्टिविटी बड़ा कारण

बच्चों में बढ़ते डायबिटीज के मामलों पर सीबीएसई का कहना है कि आज के समय में बच्चों की दिनचर्या काफी बदल चुकी है, पहले जहां बच्चे फिजिकल एक्टिविटी करते हुए गली-मोहल्लों में खेला करते थे। इस दौरान बच्चे खो-खो, कबड्डी तैराकी और सतोलिया जैसे पारंपरिक खेल खेलते थे, जो कि आज नहीं है। आज कल बच्चों का समय घर और स्कूलों में बीत रहा है। फिजिकल एजुकेशन की कक्षाओं में भी बच्चे मैदान का एक चक्कर तक नहीं लगा पा रहे। इसी का असर उनकी शारीरिक क्षमता और रोग प्रतिरोधक शक्ति पर पड़ रहा है।

शुगर बोर्ड करेगा यह कार्य

शुगर बोर्ड विद्यार्थियों को यह बताएगा कि अधिक चीनी से कैसे मोटापा, दांतों की बीमारियां, अस्थमा और डायबिटीज जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसके साथ ही उन्हें जंक फूड और मीठे पेयों के नुकसानों के बारे में जागरूक किया जाएगा। स्कूलों में इसके लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें विशेषज्ञ विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली के लिए जरूरी जानकारी देंगे।

अध्ययन में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

हाल ही में हुए एक अध्ययन में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।4 से 10 वर्ष के बच्चों में प्रतिदिन औसतन 13 ग्राम चीनी युक्त पदार्थों का सेवन पाया गया।

11 से 18 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों में यह मात्रा 15 ग्राम तक पहुंच गई है, जबकि चिकित्सकों के अनुसार यह मात्रा अधिकतम 5 ग्राम प्रतिदिन होनी चाहिए।

कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट, प्रोसेस्ड फूड और स्नैक्स के अत्यधिक सेवन से बच्चों में मोटापा, दांतों की समस्याएं, अस्थमा और डायबिटीज जैसे खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं।

- जिले के सीबीएसई स्कूलों में डायबिटीज को लेकर जागरूक करने शुगर बोर्ड गठन के अभी तक कोई आदेश हमारे पास नहीं आए हैं।

-अनीता त्यागी, कोऑर्डिनेटर सीबीएसई

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