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Dholpur: कलेक्शन सेंटर की आड़ में अवैध पैथोलॉजी लैबों का संचालन

धौलपुर शहर में कलेक्शन सेंटर की आड़ में धड़ल्ले से अवैध पैथोलॉजी लैबों का संचालन किया जा रहा है। यह लैब संचालक न किसी नियमों की पालना कर रहे हैं और ना ही अधिकतरों ने स्वास्थ्य विभाग से रजिस्ट्रेशन करा रखा है।
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Dholpur news

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धौलपुर. शहर से लेकर जिले भर में अवैध पैथोलॉजी लैब की बाढ़ आ गई है। कलेक्शन सेंटर की आड़ में धड़ल्ले से अवैध पैथोलॉजी लैबों का संचालन किया जा रहा है। यह लैब संचालक न किसी नियमों की पालना कर रहे हैं और ना ही अधिकतरों ने स्वास्थ्य विभाग से रजिस्ट्रेशन करा रखा है। आंकड़ों के अनुसार जिले भर में संचालित लैबों में से मात्र 17 लैबों ने ही एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत अपना पंजीयन कराया हुआ है, जबकि शेष लैबों का संचालन अवैध तरीके से किया जा रहा है।

समय के साथ मरीज के इलाज में ब्लड टेस्ट, सोनोग्राफी सहित अन्य शरीरिक जांचों की भूमिका में विस्तार हुआ है। यही कारण है कि लोगों ने अब लैब संचालन को मोटी कमाई का जरिया बना लिया है। देखा जाए तो लैब संचालन के स्वास्थ्य विभाग ने मानक तय कर रखे हैं। जिनमें स्वास्थ्य विभाग से रजिस्ट्रेशन, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का रजिस्ट्रेशन, पंजीकृत मेडिकल वेस्ट सर्विस से एग्रीमेंट, नगर पालिका का अनुमति पत्र व गुमाश्ता लायसेंस, दुकान का किरायानामा होना आवश्यक है, लेकिन शहर से लेकर जिले भर में संचालित अधिकतर लैब संचालक इन मानकों की पालना नहीं कर रहे हैं। तो वहीं कई लैब संचालकों ने स्वास्थ्य विभाग में पंजीयन तक नहीं कराया है। विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले भर के केवल 17 लैबों ने ही विभाग में अपना रजिस्ट्रेशन करा रखा है। जिनमें से 4 डाइग्नोस्टिक सेंटर हैं तो दो एक्स-रे सेन्टर, शेष लैबों का संचालन बगैर पंजीयन के धड़ल्ले से किया जा रहा है। निजी लैब व चिकित्सालयों के प्रबंधन की ओर से ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन न कराने के पीछे की वजह चिकित्सा विभाग के स्थानीय अधिकारी इनके द्वारा नियम कानून व कायदों को पूरा नहीं करना मानते हैं।

धौलपुर ब्लॉक के अलावा बाड़ी की दो लैबों का पंजीयन

शहर में ही लगभग 30 से 35 के आसपास लैबों का संचालन किया जा रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग मेें 17 लैब संचालकों ने ही पंजीयन करा रखा है, इनमें से 3 लैब बाड़ी, 1 बसेड़ी और 1 सैंपऊ की लैब का रजिस्ट्रेशन है और शेष 12 लैब धौलपुर शहर में संचालित हो रही हैं। इसके अलावा जिले के अन्य ब्लॉकों राजाखेड़ा, सरमथुरा सहित मनियां तक में एक भी लैब संचालक ने स्वास्थ्य विभाग में रजिस्ट्रेशन नहीं करा रखा है। लैब संचालन जैसी कहानी निजी अस्पतालों की भी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार शहर से लेकर जिले भर में मात्र 43 निजी चिकित्सालयों ने विभाग में रजिस्टे्रशन कराया है, जबकि जिले भर में संचालित होने वाले निजी अस्पतालों की संख्या 100 से ज्यादा है। यानी देखा जाए तो शेष अस्पतालों का संचालन भी अवैध तरीके से किया जा रहा है।

एक लाइसेंस पर अन्य लैबों का संचालन

यह अवैध पैथलॉजी लैब संचालक यही नहीं रुकते बल्कि इसमें खास बात यह है कि एक ही लाइसेंस पर अन्य पैथोलोजी लैबों का संचालन किया जा रहा है। ऐसा नहीं है इन सब बातों की जानकारी अधिकारियों को न हो, बावजूद इसके कार्रवाई न होने की वजह से अवैध लैब संचालकों के हौंसले इतने बढ़ गए हैं कि लैब में मरीजों का खुले आम खून चूसा जा रहा है, क्योंकि इन लैब में कराई गई जांचों की रिपोर्ट कितनी सही होगी, इसका जवाब देने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। कई बार यह भी देखने को मिला है कि दो अलग-अलग लैबों से जांच कराने के दौरान दोनों की रिपोर्ट अलग-अलग पाई गईं हैं।

विभाग ने अवैध अस्पतालों पर की कार्रवाई

अवैध लैबों के साथ संचालित अवैध अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर कार्रवाई जरूर करता है, लेकिन उसके बाद भी आर्टिफिशियल अस्पतालों और लैबों का संचालन बदस्तूर जारी है। गत दिनों भी स्वास्थ्य विभाग ने 8 ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई की जिनका संचालन अवैध तरीके से किया जा रहा था। लेकिन जांच के नाम पर मरीजों को लूटने वाले इन सफेदपोशों पर विभाग का चाबुक चलना फिर जरूरी है, जो लैब कलेक्शन सेंटर की आड़ में चल रही इन लैब में लोगों के सैंपल लेकर जांच कर रहे हैं। जिनके पास न तो लैब के पास पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का रजिस्ट्रेशन, पंजीकृत मेडिकल वेस्ट सर्विस से एग्रीमेंट, सीएमएचओ ऑफिस का रजिस्ट्रेशन, नगर पालिका का अनुमति पत्र व गुमाश्ता लायसेंस, दुकान का किरायानामा तक नहीं होता।

अवैध अस्पताल सहित अवैध पैथोलॉजी लैबों पर कार्रवाई की गई है और विभाग की ओर से निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी।

-धर्म सिंह मीणा, सीएमएचओ