
Dholpur news
Dholpur, राजाखेड़ा. अपनी भौगोलिक परिस्थितियों से देश भर में विख्यात राजाखेड़ा में पिछले दो दशकों से खनन माफिया की गडग़ड़ाती भारी मशीनों के शोर और डंपरों के कोलाहल ने अब क्षेत्र की विशेषता को खत्म प्राय: कर दिया है। अब यहां बीहड़ों के खांदर खो चुके हैं और उनकी मिट्टी खनन होकर गायब। वन क्षेत्रों के खात्मे के चलते सपाट होते मैदान यहां की भौगोलिक विशेषताओं को अब भूतकाल की कथाओं में तब्दील कर चुके हैं,
राजाखेड़ा उपखंड चम्बल और उत्तनगन नदियों के बहाव क्षेत्र के बीच बसा हुआ है। एक ओर चम्बल मध्यप्रदेश की सीमा और एक ओर उत्तनगन उत्तरप्रदेश की सीमा बनाती है। इन नदियों के बीहड़ गहरे ऊंचे नीचे खांदर क्षेत्र की विशेषता का भान कराते रहे हैं। बीहड़ों में अथाह वन संपदा परिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखती थी। जिसके संरक्ष्ण के लिए सरकार के वन विभाग का बड़ा अमला हमेशा तैनात रहा, लेकिन न जाने कैसे उसकी उपस्थिति के बीच भी यहां का वन क्षेेत्र गायब होता चला गया और आज सिर्फ यह वन क्षेत्र सरकार के रेकॉर्ड में ही दिखाई देता है अन्यथा सिर्फ छोटी मोटी झाडिय़ां ही यहां कही कही शेष बची हैं। लेकिन इस सबके लिए जिम्मेदार जिला, उपखंड, वन और खनन विभाग प्रशासन की नींद कभी खुल ही नही पाई और क्षेत्र के विकास के नारों पर भाषणों पर ही समय व्यतीत होता चला गया।
पहले पहाड़ अब जमीन से मिट्टी गायब
धौलपुर राजाखेड़ा स्टेट हाइवे पर पहाड़ी गांव में एक विशाल पहाड़ी क्षेत्र की पहचान हुआ करती थी, लेकिन इस पहाड़ी से पिछले दो दशक में दिन रात हुए वैध के साथ अवैध खनन ने अब इसे इतिहास की बात बना दिया। कई सौ फीट ऊंची बड़ी पहाड़ी अब गायब होकर गहरे विशाल गड्ढे में तब्दील हो चुकी है। कुछ शेष बचा है तो बस पहाड़ी गांव का नाम जो पहाड़ के नाम से था।
अब मिट्टी पर संकट...
पहाड़ के बाद खनन माफिया पिछले एक दशक से सरकारी भूमियों पर अपनी काली नजर जमा चुका तो अब सरकारी भूमियों से मिट्टी भी गायब होने लगी है। ईंट भ_ा माफिया के साथ मोटी कमाई की जुगलबंदी कर दिन रात आरम्भ हुई खुदाई सरकारी भूमियों को गहरे खतरनाक गड्ढों में तब्दील कर चुकी है। नयागांव के प्राचीन सोमनाथ मंदिर के पास माफिया सैकड़ों एकड़ सरकारी भूमि का गहराई तक खनन कर चुका है। जो अब आगामी मानसून में लोगों के लिए जानलेवा बन जाएंगे। पर माफिया के बाहुबल के आगे आमजन विरोध नहीं कर पाता और माफिया पर प्रशासन का कथित वरदहस्त क्षेत्र में पर्यावरण बर्बादी की नई कहानी लिखता नजर आ रहा है।
धूल के गुबार बन रहे जानलेवा
इस सारे गोरखधंधे में सैकड़ों डंपरों से उड़ते धूल के गुबार यहां के वातावरण को धूल धूसरित लयार चुके हैं जो लाखों नागरिकों के फेंफड़ों में समाहित होकर उनके जीवन से खिलवाड़ कर रहा है। बड़ी संख्या में बढ़ते श्वांस रोगी हालात के बदतर होने को बयां कर रहे हैं।
जिम्मेदारों ने उस रास्ते पर जाना ही छोड़ा...
विशेष बात ये है भारी मात्रा में मिट्टी का अवैध अभी अभी नहीं बल्कि काफी समय से बदस्तूर जारी है, लेकिन अब तो रफ्तार बढ़ा दी है। बीहड़ों में मिट्टी का हो रहे उठाव को लेकर कोई जांचने और देखने का वाला नहीं है। दिन-रात मिट्टी निकाल और जमीन को समतल कर कब्जे किए जा रहे हैं। न तो राजस्व विभाग के जिम्मेदार देख रहे और न ही वनों के संरक्षण के बात करने वाला वन विभाग ही इस ओर ध्यान दे रहा है। जिम्मेदारों ने तो अब इन इलाकों में आना ही छोड़ दिया है। कुछ इसी तरह की स्थिति धौलपुर मुख्यालय पर है। यहां भी बेहिसाब मिट्टी पहुंच रही है लेकिन कोई सोर्स का पता लगाने वाला तक नहीं है।
Published on:
03 Jul 2026 06:48 pm
