
विरोध में उतरे निजी चिकित्सक, अस्पतालों का संचालन नहीं करने का निर्णय
धौलपुर. राज्य सरकार की ओर से विधानसभा में लाए राइट टू हेल्थ विधेयक के विरोध में रविवार को जिला अस्पताल में दो घंटे स्वास्थ्य सेवाएं ठप रही। उधर, निजी चिकित्सकों ने शहर में अपने अस्पताल व क्लीनिकों को बंद रखा जिससे मरीज व उनके परिजन परेशान दिखे। विधेयक को लेकर चिकित्सकों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के नेतृत्व में यहां भार्गव वाटिका में बैठक की। एसोसिएशन ने कहा कि विधेयक के विरोध में निजी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं अनिश्चितकालीन तक बंद रहेंगी, जब तक सरकार निर्णय नहीं कर लेती। वहीं, सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक भी 2 घंटे की पेन डाउन हड़ताल पर रहेंगे। जिला अस्पताल में प्रतिदिन चिकित्सकों ने सुबह 9 से 11 बजे तक तक 2 घंटे विरोध जताएंगे। इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉ.रामलखन गोयल ने कहा कि राज्य सरकार ने राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में सभी निजी अस्पताल अब बंद रहेंगे। वहीं, सरकारी चिकित्सक निजी घर पर प्रेक्टिस करते हैं वह भी अब नहीं करेंगे। चिकित्सकों ने इस बिल को गलत बताया। बैठक में डॉ.केके अग्रवाल, डॉ.महेश अग्रवाल, डॉ.विजय शर्मा, डॉ.हरिओम गर्ग, डॉ.ब्रज मोहन गोयल, डॉ.एससी जैन, डॉ.रामविलास, डॉ.प्रदीप गर्ग, डॉ.राजेश गोयल और डॉ.निखिल गोयल समेत अन्य चिकित्सक शामिल हुए।
चिकित्सा सेवाएं रही ठप
राइट टू हेत्थ बिल का विरोध दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। वहीं, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने निजी अस्पतालों को अब बंद रखने का निर्णय लिया है। इसका विरोध जताते हुए सभी निजी चिकित्सकों ने हड़ताल पर रहने की योजना बनाई। चिकित्सकों का कहना है कि सरकार को अपने निर्णय पर पुन: विचार करना चाहिए और चिकित्सकों की बातों को भी समझना होगा। अचानक से बिल थोपना गलत है।
जिला अस्पताल में पसरा रहा सन्नाटा
जिला अस्पताल में भी बिल को लेकर चिकित्सकों ने विरोध दिखा। यहां रविवार को अस्पताल में सन्नाटा पसरा रहा। इमरजेंसी में भी मरीज परेशान दिखे। सरकारी चिकित्सकों ने प्रतिदिन 2 घंटे पेन डाउन करने का निर्णय लिया है। जिससे सरकारी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल में चिकित्सकों की कुर्सी सूनी पड़ी रही। वही मरीज कक्ष के बाहर इंतजार करते रहे। लेकिन चिकित्सक नहीं मिले। जिससे मरीज बिना दिखाए वापस लौट गए।
निजी अस्पतालों के गेट रहे बंद
राइट टू हेल्थ बिल के विरोध को लेकर शहर के करीब एक दर्जन निजी अस्पताल के संचालक ने भी विरोध में रहे। जिले के निजी अस्पतालों ने भी अनिश्चितकालीन विरोध में सम्मिलित हुए। यहां पर चिकित्सा सेवाएं ठप रही। निजी चिकित्सक का मानना है कि सरकार यह बिल जबरन प्राइवेट अस्पतालों पर थोप रही है, जो कि गलत है। सरकार जब तक अपने निर्णय पर पुन: विचार विमर्श नहीं करती, तब तक विरोध जारी रहेगा। सरकार का यह फैसला पूरी तरह एक तरफा है। बैठक के दौरान ज्यादातर निजी चिकित्सक शामिल हुए और बिल को लेकर चर्चा की।
Published on:
27 Mar 2023 11:52 am
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