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मरीजों के स्वास्थ्य से खेल रहे झोलाछाप, चुप्पी साध कर बैठा विभाग

- जिले में 100 से अधिक चल रहे नर्सिंग होम व पैथलॉजी पर भी अंकुश नहीं - एक सप्ताह में इलाज के दौरान दो जनों की मौत, फिर भी जिम्मेदारों पर नहीं असर

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Quacks playing with patients' health, department sitting in silence

मरीजों के स्वास्थ्य से खेल रहे झोलाछाप, चुप्पी साध कर बैठा विभाग

धौलपुर. पिछले एक सप्ताह में कथित झोलाछापों के इलाज से दो लोग जान गवा चुके हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार आंखे मूंद कर बैठे हैं। हाल ये है कि संबंधित क्लीनिक पर जांच करने टीम भी नहीं पहुंची। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इससे पल्ला झाड़ रहे हैं। जबकि जिले में महज 30 निजी अस्पताल पंजीकृत है। शेष रामभरोस संचालित हैं। इनमें अप्रशिक्षित कर्मचारी इलाज कर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे है। इसके बाद भी एक भी इन नर्सिंग होम व अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं हो पाई है। जबकि जिले में सौ से अधिक नर्सिंग होम, क्लीनिक व अस्पताल संचालित हैं। खास बात ये है कि हर माह स्वास्थ्य विभाग की बैठक होती है। बैठक में जिला कलक्टर झोलाछाप व अवैध अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देते हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ धरे हुए बैठा है। यही कारण है कि जिले में एक सप्ताह में कथित झोलाछापों के इलाज से दो जने जान गवा चुके हैं। जिले के बसई नबाव क्षेत्र में बुखार के दौरान गलत इलाज से तबियत बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर कथित झोलाछापों ने इन्हें बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजनों ने गलत इलाज करने का आरोप भी लगाया था। जिसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग मौन साधे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मृतक के परिजनों से मिलकर जानकारी ली है।

बोर्ड पर अंकित 4 चिकित्सक, इलाज कर रहा झोलाछाप

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में 29 एलोपैथिक अस्पताल, एक होम्योपैथिक, दो डेंटल एवं 17 पैथलॉजी लैब पंजीकृत हैं। जबकि अवैध क्लीनिक शहर के साथ आसपास कस्बों में भी संचालित हो रहे हैं। अधिकांश कस्बों में झोलाछाप क्लीनिक खोलकर बैठे हुए हंै। यही हाल पैथलॉजी का है। गली मोहल्ले में चलने वाली पैथलॉजी पर भी अप्रशिक्षित लोग जांच के नाम पर लूट रहे हैं। यहां भी विभाग लगाम नहीं लगा पा रहा है। जिले में सरकारी के साथ प्राइवेट अस्पतालों में भी डॉक्टरों की कमी है। पर नर्सिंग होम के बाहर चार-चार डॉक्टरों के बोर्ड लगे दिखाई देते हैं। अंदर पहुंचने पर पता चलता है कि डॉक्टर तो कभी आते ही नहीं है। कथित झोलाछाप ही इलाज करते हैं। वहां तैनात कर्मचारी भी अप्रशिक्षित है। ये नर्सिंग होम व क्लीनिक जिलेभर में धड़ल्ले से चल रहे हैं।

एक चिकित्सक हमेशा रहना चाहिए

दस बेड के नर्सिंग होम के मानक की बात करें तो एक एमबीबीएस डॉक्टर वहां पर होना चाहिए। उनके साथ एक बीएएमएस डॉक्टर रह सकता है। प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ में एक वार्ड ब्वाय, स्टाफ नर्स होनी चाहिए। इसके साथ ही अग्निशमन व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी होनी चाहिए।

- झोलाछापों पर सोमवार से कार्रवाई की जाएगी। जिले के बसई नवाब में दो लोगों की मौत हुई थी। उनके परिजनों की जांच कर उपचार भी किया गया। अगर वो झोलाछाप का नाम बताते हैं तो संबंधित क्लीनिक को सील कर मामला दर्ज कराया जाएगा।

- डॉ.चेतराम मीणा, उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी धौलपुर