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धौलपुर करौली टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ जीव सियाहगोस

धौलपुर. विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके एशियाटिक कैराकल के संरक्षण में राज्य सरकार कोई रुचि नहीं दिखा रही। देश के 90 प्रतिशत हिस्से से यह जीव विलुप्त हो चुका हैए जो शेष हैं वह धौलपुर करैली और रणथंभौर टाइगर एरिया के जंगलों में ही बचे हैं। आंकड़ों के अनुसार देशभर में इस दुर्लभ और शर्मीले जीव की संख्या केवल 100 के आसपास ही रह गई है। बिल्ली-तेंदुआ प्रजाति का यह वन्य जीव गत दिनों धौलपुर.करौली टाइगर रिजर्व एरिया में ट्रैप किया गया है। 2014 के आंकड़ों के अनुसार उस समय अकेले धौलपुर-करौली, रणथंभौर टाइगर रिजर्व एरिया में इनकी 85 से 90 के बीच थीए लेकिन समय के साथ इसकी संख्या में भी गिरावट आई है। 2018.20 के आंकड़ों के अनुसार देश में इनकी संख्या करीब 100 के आसपास ही रह गई। यह जीव धौलपुर करौली और रणथंभौर से कूनो के जंगलए कच्छ के रण और पाकिस्तान के बलूचए ईरान और तजाकिस्तान में ही देखे जाते हैंए लेकिन धीरे-धीरे अब इन इलाकों से भी नहीं संख्या कम होती जा रही है। मध्यप्रदेश सरकार इनके संरक्षण के लिए काम गत सालों पहले शुरू कर चुकी है, मगर राज्य सरकार की ओर से खास रुचि नहीं दिखाई जा रही। हालांकि गत वर्ष के बजट में इसको लेकर राशि आवंटित जरूर की गई थीए लेकिन इस बार वह भी नहीं हुआ। अगर समय रहते राज्य सरकार नहीं जागी तो देश की आजादी के बाद देश में चीता के बाद विलुप्त होने वाला यह दूसरा खूबसूरत वन्य जीव होगा।

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धौलपुर करौली टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ जीव सियाहगोस Rare animal Siahgos spotted in Dholpur Karauli Tiger Reserve

- देश के 95 प्रतिशत हिस्से से विलुप्त हुआ बिल्ली प्रजाति का दुर्लभ जीव

- देश भर में 100 के आसपास ही बचे एशियाटिक कैराकल यानी सियाहगोस

- एशियाटिक कैराकल के संरक्षण में राज्य सरकार की कोई रुचि नहीं

भगवती प्रसाद तिवारी

धौलपुर. विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके एशियाटिक कैराकल के संरक्षण में राज्य सरकार कोई रुचि नहीं दिखा रही। देश के 90 प्रतिशत हिस्से से यह जीव विलुप्त हो चुका हैए जो शेष हैं वह धौलपुर करैली और रणथंभौर टाइगर एरिया के जंगलों में ही बचे हैं। आंकड़ों के अनुसार देशभर में इस दुर्लभ और शर्मीले जीव की संख्या केवल 100 के आसपास ही रह गई है।

बिल्ली-तेंदुआ प्रजाति का यह वन्य जीव गत दिनों धौलपुर.करौली टाइगर रिजर्व एरिया में ट्रैप किया गया है। 2014 के आंकड़ों के अनुसार उस समय अकेले धौलपुर-करौली, रणथंभौर टाइगर रिजर्व एरिया में इनकी 85 से 90 के बीच थीए लेकिन समय के साथ इसकी संख्या में भी गिरावट आई है। 2018.20 के आंकड़ों के अनुसार देश में इनकी संख्या करीब 100 के आसपास ही रह गई। यह जीव धौलपुर करौली और रणथंभौर से कूनो के जंगलए कच्छ के रण और पाकिस्तान के बलूचए ईरान और तजाकिस्तान में ही देखे जाते हैंए लेकिन धीरे-धीरे अब इन इलाकों से भी नहीं संख्या कम होती जा रही है। मध्यप्रदेश सरकार इनके संरक्षण के लिए काम गत सालों पहले शुरू कर चुकी है, मगर राज्य सरकार की ओर से खास रुचि नहीं दिखाई जा रही। हालांकि गत वर्ष के बजट में इसको लेकर राशि आवंटित जरूर की गई थीए लेकिन इस बार वह भी नहीं हुआ। अगर समय रहते राज्य सरकार नहीं जागी तो देश की आजादी के बाद देश में चीता के बाद विलुप्त होने वाला यह दूसरा खूबसूरत वन्य जीव होगा।

रिजर्व एरिया में सियाहगोस की संख्या 20

कैराकल दुनिया में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। बिल्ली प्रजाति का दुर्लभ जीव एशियाटिक कैराकल बेहद ही खूबसूरत और फुर्तीला होता हैए जिसे हिंदी में सियाहगोस कहते हैं। गत दिनों यह जीव धौलपुर.करौली टाइगर रिजर्व एरिया में स्पॉट किया गयाए जो कि वन्यजीव प्रेमियों के लिए सुखद खबर भी है। धौलपुर टाइगर रिजर्व एरिया के जंगलों में सियागोस की संख्या लगभग 20 बताई जा रही हैए हालांकि अभी इनकी गणना नहीं हो सकी है। यह जीव जंगल में लगे टाइगर कैमरे में ट्रैप हुए हैं। जिसके बाद दुर्लभ जीव सियाहगोस के संरक्षण के लिए रिजर्व एरिया के स्टाफ ने जंगल में सुरक्षा बढ़ा दी है। धौलपुर.करौली टाइगर रिजर्व एरिया खुला वन क्षेत्र जो इनके लिए सबसे अच्छा आवास माना जाता है और यही कारण है कि यह दुर्लभ जीव यहां अब यदा कदा दिखने भी लगा है।

तेंदुआ-बिल्ली प्रजाति का जीवन सियाहगोस

दुर्लभ वन्य जीव एशियाटिक कैराकल (सियाहगोस) तेंदुआ और छोटी जंगली बिल्ली के बीच का जीव है। यह दिखने में बहुत ही खूबसूरत और फुर्तीला होता है। यह दुर्लभ जीव अपना इलाका बना कर अकेला और छिपकर जंगल में रहता है। यह मानव गतिविधियों से दूर रहता है और ज्यादातर रात में ही भोजन का शिकार करता हैए लेकिन धौलपुर के जंगलों में अच्छी संख्या होने पर यह दिन के उजाले में कैमरा में ट्रैप हुआ है।

संरक्षण मॉडल लागू कर बचाएं सियाहगोस को

धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व एरिया में सियाहगोस की मौजूदगी पर वन्य जीव प्रेमी खुश हैं। विशेषज्ञ यहां उनका दिखना वापसी का संकेत मान रहे हैं। वन्य जीव प्रेमी प्रभाकर शर्मा ने बताया कि धीरे-धीरे दुर्लभ जीव सियाहगोस की संख्या कम होती जा रही है, जो शेष बचें हैं वह धौलपुर-करौली और रणथंभौर टाइगर रिजर्व एरिया के जंगलों में ही हैं। सरकार इनके संरक्षण के प्रयास करने के साथ आवास बचाने का कार्य करे तो इनकी संख्या बढ़ सकती है साथ ही सामुदायिक नेतृत्व के संरक्षण मॉडल को लागू कर प्रजाति को बचाया जा सकता है।