14 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आरजीएचएस बनी मजाक…इस दर से उस दर भटक रहे पेंशनभोगी

-जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा राजस्थान गवर्मेंट हेल्थ योजना का लाभ -संबंधित मेडिकल संचालकों ने खींचे हाथ, नहीं दे रहे दवाइयां धौलपुर.राजस्थान गवर्मेंट हेल्थ योजना … यानी आरजीएचएस जिले में मजाक बनी हुई है। सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों को दी जाने वाले चिकित्सा सुविधा पिछले १५ दिनों से बंद है। योजना का लाभ लेने वालों […]

3 min read
Google source verification
आरजीएचएस बनी मजाक...इस दर से उस दर भटक रहे पेंशनभोगी RGHS becomes a joke... pensioners are wandering from one rate to another

-जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा राजस्थान गवर्मेंट हेल्थ योजना का लाभ

-संबंधित मेडिकल संचालकों ने खींचे हाथ, नहीं दे रहे दवाइयां

धौलपुर.राजस्थान गवर्मेंट हेल्थ योजना ... यानी आरजीएचएस जिले में मजाक बनी हुई है। सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों को दी जाने वाले चिकित्सा सुविधा पिछले १५ दिनों से बंद है। योजना का लाभ लेने वालों को संबंधित मेडिकल संचालक दवाइयां उपलब्ध नहीं करा रहे। जिससे बीमारियों से ग्रासित योजना का लाभ लेने वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदेश की महत्वाकांक्षी आरजीएचएस के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैैं। योजना का लाभ लेने वाले पेंशनर भोगी सहित कर्मचारी मेडिकल दुकानों पर दवाइयों को लेकर इधर से उधर भटक रहे हैं, लेकिन योजना से संबंधित मेडिकल स्टोर संचालकों ने हाथ खड़े करते हुए दवाइयां उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। जिससे हजारों पेंशनर्स और उनके आश्रितों की सेहत दांव पर लगी है।निजी अस्पतालों, मेडिकल स्टोरों और जांच केंद्रों का भुगतान समय पर नहीं होने से वे केशलैस इलाज से पीछे हट रहे हैं। नियमों में बार-बार बदलाव से प्रशासनिक क्षमता पर सवाल खड़े होने लगे हैं, जिसका खामियाजा मरीजों को जेब से खर्च कर उठाना पड़ रहा है। धौलपुर जिले में वर्तमान में आरजीएचएस योजना से करीब 30 हजार और राज्य भर में लगभग 14 लाख कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके परिवारजन जुड़े हुए हैं, जो योजना के प्रभावी रूप से संचालन नहीं होने से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में इसका प्रभावी संचालन बेहद जरूरी है। योजना का उद्देश्य केशलैस उपचार, आर्थिक सुरक्षा, त्वरित चिकित्सा सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, लेकिन इसके लिए भुगतान प्रणाली को मजबूत करना और नियमों में स्थिरता लाना आवश्यक है।

प्रति माह 1200 से 1500 रुपए की लिमिट

जानकारी के अनुसार गत माह पहले सरकार ने आजीएचएस योजना से कई बीमारियों जिनमें चर्म रोग, दर्द निवारक, कब्ज, एसिडिटी, विटामिन और आयरन जैसी जरूरी दवाओं को सूची से बाहर कर दिया है। जिससे बुजुर्गों सहित प्रसूताओं को काफी परेशानी हो रही है। मौखिक आदेशों के अनुसार अब दवाओं के लिए प्रति माह 1200 से 1500 रुपए की लिमिट भी तय कर दी गई है, जो कि लोगों की जरूरत के हिसाब से अपर्याप्त है। उसके बाद भी दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रहीं। दवा विके्रताओं को सरकार से करोड़ों रुपए का भुगतान नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे दवा देने से कतरा रहे हैं।

जिले भर में लगभग 10 करोड़ की राशि अटकी

आरजीएचएस योजना का लाभ लेने वाले पेंशनर्स और कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ निजी अस्पताल भी योजना का लाभ देने हिचकिचा रहे हैं। तो दवा विक्रेताओं ने तो पूर्ण रूप से इस योजना से किनारा कर लिया है। पेंशनरों ने बताया कि ३० मार्च तक तो मेडिकल संचालकों ने दवाइयां उपलब्ध कराईं थी, लेकिन उसके बाद से मेडिकल संचालक दवा उपलब्ध नहीं करा रहे। उनका कहना है कि अब तक का भुगतान बकाया है। एक-एक दवा विके्रता का 10 से 20 लाख रुपए अटका है। धौलपुर जिले में यह बकाया राशि लगभग 10 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।

1 अप्रेल 2021 से आरजीएचएस योजना

राज्य सकरार ने सीजीएचएस की तर्ज पर 1 अप्रेल 2021 से आरजीएचएस योजना को लागू की थी। आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2022 तक कर्मचारियों और पेंशनर्स का करीब 2400 करोड़ रुपए अंशदान सरकारी खजाने में जमा हो चुका है। इसके बावजूद लाभार्थियों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं और वह एक दर से दूसरे दर भटकते नजर आ रहे हैं, जो कि सरकार को दिखाई नहीं दे रहा।

केस-1

डीओ माध्यमिक कार्यालय से शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त अशोक कुमार सिंघल कैंसर, मोतियाबिंद, पाइल्स, बीपी की बीमारियोंं से ग्रसित हैं। जिनका इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि 30 मार्च के बाद से मेडिकल स्टोर वालों ने दवाइयां देना बंद कर दिया है। शरीर में इतनी बीमारियां, उम्रदराज होने के साथ आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं होने के कारण जेब से रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।

केस-२

शिक्षा विभाग से ही रिटायर मदन कुमार का कहना है कि उनको शुगर, बीपी सहित अन्य बीमारियां हैं। अब तक वह आरजीएचएस योजना के तहत इलाज और दवाओं का लाभ ले रहे थे, लेकिन गत २० दिनों से मेडिकल स्टोर संचालक दवाएं उलब्ध नहीं करा रहे, जबकि सरकार इस योजना के अधीनों का हर प्रकार की सुविधा देने का वादा करती है, लेकिन जमीनी हालात अलग ही हैं।

आरजीएचएस योजना के तहत लाभार्थियों को इलाज और दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं। अगर कोई मेडिकल संचालक दवाइयां उपलब्ध नहीं करा रहा है तो उसकी लिखित शिकायत हमसे या फिर संबंंधित सीएमएचओ ऑफिस में कर सकता है।

-अश्विनी कुमार, मेडिकल ऑफिसर आरजीएचएस जयपुर