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अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ती ऐतिहासिक ‘बारादरी’

शासन से लेकर पुरातत्व विभाग भूला अनमोल धरोहर कोरख -रखाव न होने से क्षतिग्रस्त हो रही 250 वर्ष पुरानी इमारत dholpur, बाड़ी. 250 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक बारादरी इमारत रख रखाव के अभाव में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। कलाकारी का अजूब नमूना रखने वाली बारादरी का निर्माण राजा भागवंत सिंह ने कराया था। […]

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अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ती ऐतिहासिक ‘बारादरी’ The historic 'Baradari' is fighting for its existence

शासन से लेकर पुरातत्व विभाग भूला अनमोल धरोहर कोरख

-रखाव न होने से क्षतिग्रस्त हो रही 250 वर्ष पुरानी इमारत

dholpur, बाड़ी. 250 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक बारादरी इमारत रख रखाव के अभाव में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। कलाकारी का अजूब नमूना रखने वाली बारादरी का निर्माण राजा भागवंत सिंह ने कराया था। तीन मंजिल से सुसज्जित इस इमारत में 12 दरवाजे हैं। यह मुख्य रूप से राजाओं के विश्राम और सामाजिक समारोहों का स्थल हुआ करता था, जो अब देख रेख के अभाव में उपेक्षित अवस्था में है।

बारादरी इमारत राजा महाराजाओं के लिए महत्वपूर्ण स्थान हुआ करती थी, लेकिन वर्तमान में सरकार के अनदेखी के चलते वह जमींदोज होती जा रही है। हालांकि कुछ महीने पहले कार्यवाहक नगर पालिका अधिशासी अधिकारी अमिताभ मीणा ने इस इमारत पर सफाई कार्य कराया गया था, जिसमें चारों तरफ जाल की बाउंड्री कराकर इमारत पर लगी धूल मिट्टी को सफाई करके हटाया गया था। ऐसे में इमारत की फिर से सुंदरता दिखाई दी, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया, जिसमें जगह-जगह क्षतिग्रस्त इमारत को समय-समय पर ठीक करना जरूरी था जो अभी तक नहीं हो पाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार और ना ही पुरातत्व विभाग का ध्यान बरादरी की ओर है। यही कारण है कि शहर की एतिहासिक और बहुुुमूल्य इमारत खंडहर हेाती जा रही है। नगर पालिका ने बारादरी इमारत की साफ सफाई जरूर कराई।

19वीं शताब्दी में बनाई गई थी इमारत

बारादरी इमारत के इतिहास पर प्रकाश डालें तो या शासक का काल महाराजा भगवंत सिंह ने धौलपुर रियासत पर 1836 से 1873 के बीच शासन किया, इसी दौरान उन्होंने बाड़ी में इस ऐतिहासिक ‘बारादरी’ का निर्माण करवाया था। जो सुंदरता और नक्काशी की बेहतरीन गठजोड़ है, लेकिन अब धूल की परतें रोज दर रोज इस गौरवशाली इतिहास को धूमिल कर रही है।

जगह-जगह क्षतिग्रस्त इमारत

मौजूदा समय में बारादरी इमारत की बात की जाए तो जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। जिसमें कई पत्थर जाली नुमा टूटी पड़ी हुई हैं, वहीं ऊपर की छतरी नमा कई जगह से क्षतिग्रस्त हुई हैं, ऐसे में पुरातत्व विभाग को ध्यान देना चाहिए और ऐतिहासिक पुरानी इमारत को बचाए रखना जरूरी है नहीं तो यह धीर-धीरे ध्वस्त होती चली जाएगी।