
धौलपुर। जिले के सैंपऊ उपखंड की नुनहेरा ग्राम पंचायत के ढाढियों में आज भी स्थानीय लोग नदी पार करने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। यहां बह रही पार्वती नदी को पार करने के लिए ग्रामीण से लेकर बच्चों को खतरों से खेल कर दूसरी तरफ जाना पड़ता है। यह सिलसिला काफी सालों से चल रहा है लेकिन इसके बाद भी न तो प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं।
स्थानीय बच्चे रोजाना नदी के गहरे पानी को पार करने के लिए ट्यूब पर चारपाई बांधकर बने खटोले का सहारा लेते हैं। यही नहीं, बीमार मरीजों को अस्पताल ले जाना हो या घर-गृहस्थी का सामान खरीदने बाजार जाना हो। ग्रामीणों को हमेशा इसी खटोले पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे मुख्य सड़क तक पहुंचने का करीब 5-6 किलोमीटर लंबा रास्ता महज एक किमी का रह जाता है।
बरसों से आरी, मढ़ैया, भूरा का पुरा, बघेलों का पुरा, महंत का अड्डा और पंछी का पुरा जैसे गांवों के लोग इसी तरह नदी पार करते आ रहे हैं। ग्रामीण मोहन सिंह व राम खिलाड़ी बताते हैं कि कई बार नदी पर पुल या रपट बनाने की मांग पंचायत और प्रशासन से की गई लेकिन केवल आश्वासन ही मिला कुछ हुआ नहीं।
आरी, मढ़ैया और आसपास के गांवों से तसीमों कस्बे की सडक़ से दूरी करीब 6 किलोमीटर है जबकि उपखंड मुख्यालय सैंपऊ 5 किलोमीटर दूर पड़ता है। ऐसे में लोग जोखिम उठाकर भी एक किलोमीटर की नदी पार करना बेहतर समझते हैं। लेकिन इससे हादसे की आशंका रहती है।
Updated on:
07 Jul 2025 02:49 pm
Published on:
07 Jul 2025 02:49 pm
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