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निजी स्कूलों में सीट आवंटन और बच्चों की फीस ने बढ़ाई परेशानियां

-जिन स्कूलों में एक या पांच सीट आवंटित…वहां आवेदन ज्यादा – अभिभावकों से निजी विद्यालय मांग रहे एडमिशन की फीस धौलपुर.राइट टू एजुकेशन के तहत गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में मुफ्त शिक्षा हासिल करने का अधिकार सरकार की कारगुजारियों के कारण मजाक बनकर रह गया है। स्कूलों में एडमिशन की सीमित संख्या करने के […]

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निजी स्कूलों में सीट आवंटन और बच्चों की फीस ने बढ़ाई परेशानियां Seat allocation and children's fees in private schools have increased problems

-जिन स्कूलों में एक या पांच सीट आवंटित...वहां आवेदन ज्यादा

- अभिभावकों से निजी विद्यालय मांग रहे एडमिशन की फीस

धौलपुर.राइट टू एजुकेशन के तहत गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में मुफ्त शिक्षा हासिल करने का अधिकार सरकार की कारगुजारियों के कारण मजाक बनकर रह गया है। स्कूलों में एडमिशन की सीमित संख्या करने के साथ नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी की फीस से हाथ खींचने के कारण कई गरीब बच्चे एडमिशन बगैर होते दिख रहे हैं। वहीं निजी स्कूल भी इस योजना में कोई खास रुचि नहीं दिखा रहे।

गरीब और असहाय बच्चों को भी पढऩे का अधिकार मिले इसको लेकर सरकार ने राइट टू एजुकेश के तहत निजी विद्यालयों को इस योजना से जोड़ते हुए बच्चों को नि:शुल्क अध्ययन कराने योजना प्रारंभ की थी, लेकिन धीरे-धीरे सरकार ने इस योजना में कई बदलाव करते हुए निजी स्कूलों सहित अभिभावकों के भी सामने संकट खड़ा कर दिया है। जिस कारण लॉटरी जारी होने और बच्चों का नाम आने के बाद भी अभिभावक इधर से उधर भटक रहे हैं। निजी स्कूल संचालक अभिभावकों से एक साल तक की भी जमा कराने तक की बात कर रहे हैं तो कोई आरटीई की कोई जानकारी न होने की बात कह पल्ला झाड़ रहे हैं। इसके अलावा लॉटरी में नाम आने के बावजूद आधार वेरिफिकेशन में दिक्कत, स्कूल द्वारा प्रवेश से इनकार करने जैसे मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि अभी 17 अप्रेल को प्रथम आवंटन होने के बाद एडमिशन की प्रक्रिया जारी है और अभी आवेदनों के सत्यापन का काम चल रहा है, जो 2 अप्रेल तक चलेगा।

सीटों के आवंटन ने बढ़ाई परेशानी

राइट टू एजुकेशन के तहत बच्चों के एडमिशन में सबसे ज्यादा परेशानी सीटों को लेकर आ रही है, क्योंकि पहले जहां निजी विद्यालयों में स्कूल में पढऩे वाले बच्चों के हिसाब से २५ प्रतिशत सीट आवंटित होती थी, लेकिन अब सरकार ने उनके गत सत्रों के हिसाब से सीट आवंटित की हैं। देखा जाए तो किसी विद्यालय को 10 तो किसी को 5 तो किसी को 1 सीट एडमिशन को आवंटित की गई हैं। अब ऐसी स्थिति में जिन स्कूलों में सीट आवंटित हैं और आवेदन उससे ज्यादा हैं तो आवंटित सीट के हिसाब से बच्चों को एडमिशन तो मिल जाएगा, लेकिन शेष बच्चे एडमिशन बगैर रह रहे हैं।

स्कूल में एक सीट आवंटित, आवेदन आए नौ

निजी स्कूल संचालकों ने बताया कि जिले में कई स्कूल ऐसे हैं जहां सरकार ने सीट कम आवंटित की हैं और बच्चों के एडमिशन को आवेदन ज्यादा आए हैं। जानकारी के अनुसार एक निजी विद्यालय को आरटीई के तहत केवल 1 सीट आवंटित की गई है, जबकि उसके यहां 9आवेदन आए हैं, तो एक अन्य स्कूल में 5 सीट दी गई हैं, जबकि आवेदन11 हैं। अब ऐसी स्थिति में बच्चों को आवंटित सीट तो मिल जाएगी, लेकिन शेष आवेदन करने वाले बच्चे एडमिशन बगैर रह जाएंगे। जिले में ऐसे दर्जनों स्कूल हैं यहां सीट कम दी गईं हैं और आवेदन ज्यादा आए हैं।

सरकार ने खींचा बच्चों की फीस से हाथ

राइट टू एजुकेशन के तहत प्राइमरी से कक्षा 8 तक गरीब बच्चों को पढ़ाने सरकार ने यह योजना प्रारंभ की थी। जिसके तहत शुरुआती सालों में सरकार प्राइमरी कक्षा से 8वीं तक पढऩे वाले बच्चों को प्रति बच्चे 13000 की फीस निजी विद्यालयों को भुगतान करती थी, लेकिन कोविड के बाद से सरकार ने प्राइमरी, एलकेजी और यूकेजी कक्षाओं में पढऩे वाले छात्रों की फीस से हाथ खींच लिया। मामले को लेकर निजी विद्यालयों और सरकार के बीच तकरार बढऩे के बाद निजी विद्यालयों ने कोर्ट की शरण ली। निजी स्कूल संचालकों ने बताया कि मामले में 2023 में कोर्ट ने सरकार को स्कूलों को फीस देने के आदेश दिए, लेकिन उसके बाद भी सरकार कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं कर रही और निजी स्कूल प्राइमरी, एलकेजी और यूकेजी की फीस बच्चों से वसूल कर रहे हैं।

गत वर्ष 748 बच्चों को मिला था एडमिशन

जिले में गत वर्ष राइट टू एजुकेशन के तहत नर्सरी से कक्षा आठ तक पढऩे वाले बच्चों की संख्या64 हजार 671 थी। जिनमें से 406 बच्चों को नर्सरी कक्षा और 342 बच्चों का कक्षा 1 में नवीन एडमिशन दिया गया था। इनमें सबसे ज्यादा बच्च 431 को धौलपुर ब्लॉक के निजी स्कूलों में एडमिशन दिया गया था। धौलपुर के बाद राजाखेड़ा ब्लॉक में72 बच्चों को एडमिशन मिला था।

सरकार एक ओर जहां राइट टू एजुकेशन के तहत बच्चों को पढ़ाने की बात करती है, वहीं उसके कार्य इस योजना को ठीक से संचालित करने वाले नहीं दिखाई दे रहे। स्कूलों में सीट आवंटित करने से कई गरीब बच्चे एडमिशन बगैर रह जाएंगे। सरकार निजी स्कूलों को प्राइमरी, एलकेजी और यूकेजी के लिए फीस भी आवंटित करे।

-बृजकिशोर राजपूत जिलाध्यक्ष स्कूल शिक्षा परिवार

ये रहेगा अब टाइम फ्रेमपोर्टल पर स्कूल चयन : 16 मार्च तकप्रथम आवंटन : 17 मार्चदस्तावेज सत्यापन : 16 से 25 मार्च तकपरिवेदनाओं का निस्तारण: 17 मार्च से 2 अप्रेल तकप्रवेश का द्वितीय चरण : 7 अप्रेल से

इतने स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया

340 प्रावि.उप्रा निजी विद्यालय

232मावि.उमावि निजी विद्यालयइन कक्षाओं में हो रहा दाखिला

कक्षा उम्र

नर्सरी 3 से 4 वर्ष

एलकेजी 4 से 5 वर्ष

यूकेजी 5 से 6 वर्ष

कक्षा 1 6 से 7 वर्ष