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विक्रेताओं का किसानों को एक ही जवाब, नहीं है यूरिया

- कलक्टर के निर्देश पर भी दुकानदारों ने नहीं लगाई स्टॉक की सूचना     - किसानों को नहीं मिल पा रहा यूरिया - कृषि विभाग के अधिकारी कर रहे मॉनिटरिंग का दावा #fertilizer shortage news:धौलपुर. बेहतर और अच्छी पैदावार के लिए किसानों को इन दिनों यूरिया की आवश्यकता है लेकिन जिले में यूरिया की कमी के चलते

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Sellers have only one answer to farmers, there is no urea

विक्रेताओं का किसानों को एक ही जवाब, नहीं है यूरिया

विक्रेताओं का किसानों को एक ही जवाब, नहीं है यूरिया
- कलक्टर के निर्देश पर भी दुकानदारों ने नहीं लगाई स्टॉक की सूचना

- किसानों को नहीं मिल पा रहा यूरिया

- कृषि विभाग के अधिकारी कर रहे मॉनिटरिंग का दावा

#fertilizer shortage news:धौलपुर. बेहतर और अच्छी पैदावार के लिए किसानों को इन दिनों यूरिया की आवश्यकता है लेकिन जिले में यूरिया की कमी के चलते किसान इधर-उधर भटक रहा है। वहीं, खाद विक्रेताओं के पास किसान दूर-दराज से लेने पहुंचता है तो उसे टका सा एक ही जवाब मिलता है खाद नहीं है।

किसान जानकारी लेता है कि कब तक खाद मिल सकेगी तो उसे कोई संतोषजनक जवाब दुकानदारों की ओर से नहीं दिया जाता है। ज्यादा सवाल जवाब करने पर दुकानदार गुस्से में जाने तक की कह देते हैं। जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ जाती है। जबकि दुकानदारों को दुकानों पर सूचना पट्ट या बोर्ड पर स्टॉक की स्थिति जानकारी प्रतिदिन लगाना जरूरी है। लेकिन दुकानदार अपने स्टॉक की जानकारी देने से बचते हैं और सूचना नहीं लगाते हैं।

जबकि रविवार को पत्रिका के जानकारी लेने पर जिला कलक्टर ने कृषि विभाग के उपनिदेशक (कृषि विस्तार) को स्पष्ट निर्देश दिए कि दुकानदार अपने स्टॉक की जानकारी आवश्यक रूप से लगाए और खाद कब मिलेगी इसकी भी जानकारी दें। लेकिन जिला कलक्टर के निर्देश के बाद भी सोमवार को ज्यादातर दुकानों को कोई सूचना चस्पा नहीं मिली। वहीं, जिन दुकानों पर बोर्ड लगे थे, उन पर कोई सूचना अंकित नहीं थी। गौरतलब रहे कि सोमवार के अंक में पत्रिका खाद की किल्लत, भटक रहा किसान शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।

उत्पादों की मूल्य सूची लगाना जरूरी

खाद-बीज विक्रेताओं को दुकानों पर उत्पादों की मूल्य सूची बोर्ड पर चस्पा करना जरूरी है। साथ ही अपने स्टॉक रजिस्टर, नवीनतम लाइसेस प्रति भी रखना आवश्यक है। उधर, किसान को खाद या बीज खरीदने पर उसे पक्का बिल देना होता है लेकिन यहां भी दुकानदार पक्का बिल देने से बचता है। इसकी वजह सरकार ने यूरिया के एक बैग की बिक्री दर करीब 270 रुपए तय कर रखी है जबकि विक्रेता उससे उससे 350 से 400 रुपए वसूलते हैं।

दुकानदार बोले- ये कोई जरूरी नहीं

जिला मुख्यालय पर खाद-बीज की करीब 20 से अधिक दुकानें संचालित हैं। जिन पर करीब आधा दर्जन उर्वरक की कंपनियों का माल सप्लाई होता है। इन दुकानों पर सूचना पट्ट तो लग रहा है लेकिन उस पर स्टॉक या खाद खत्म होने की किसी तरह की कोई सूचना इत्यादि नहीं है। पत्रिका ने इस संबंध में बस स्टैण्ड समेत अन्य स्थानों पर संचालित दुकानदारों से जानकारी ली तो उनका कहना था कि सूचना लगाना कोई जरूरी नहीं है। जब स्टॉक ही नहीं है तो किस बात की सूचना। माल कब आएगा, ये तो कंपनी अधिकारी ही बताएंगे। इस दौरान एक-दो किसान यूरिया लेने पहुंचे तो उन्हें खत्म होने की बात कही। किसान ने पूछा कब मिलेगी तो दुकानदार झुनझुला कर बोला, अभी अधिकारी से पूछकर बताता हूं।

शिकायत के लिए नम्बर तक नहीं

खाद नहीं मिलने से परेशान किसान अगर शिकायत भी करना चाहे तो कृषि विभाग के अधिकारियों के मोबाइल नम्बर तक उनके पास नहीं है। जबकि जिला कलक्टर ने इन दुकानों पर अधिकारियों के मोबाइल नम्बर चस्पा करने के निर्देश दिए थे जिससे किसान अपनी शिकायत संबंधित अधिकारी को अवगत करा सके और किसान को भ्ी इधर-उधर नहीं भटकना पड़े।