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Dholpur: सूखे की आहट, अन्नदाता चिंतित,जिले में मात्र 105 एमएम बारिश

जुलाई महीना आधा बीत चुका है, लेकिन अभी तक जिले भर में केवल 105.6 एमएम बारिश ही हुई है। जिस वजह से खरीफ फसल बुवाई में भी रुकावट आ रही है और जहां बुवाई हो चुकी है वहां गर्मी के कारण फसल प्रभावित होने लगी है।
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धौलपुर, बारिश के अभाव में खाली पड़ा खेत

धौलपुर. शहर सहित जिले भर में सूखे के संकट गहराने लगे हैं। 24 साल बाद फिर ऐसे हालात बनते दिखाई दे रहे हैं। जुलाई महीना आधा बीत चुका है, लेकिन अभी तक केवल 105.6 एमएम बारिश ही हुई है। जिस वजह से खरीफ फसल बुवाई में भी रुकावट आ रही है और जहां बुवाई हो चुकी है वहां गर्मी के कारण फसल प्रभावित होने लगी है। इस सीजन अभी तक खरीफ फसल बुवाई का लक्ष्य भी 50 प्रतिशत ही हो पाया है।

जिलावासियों को इस मानसून सीजन सूखे के हालातों से जूझना पड़ सकता है, खासकर किसानों को। क्योंकि मौसम विभाग भी पहले ही सामान्य से कम बारिश होने की बात कह चुका है और हालात भी अब इस ओर इशारा कर रहे हैं। मानसून आए हुए 20 दिन होने को हैं, लेकिन अभी तक जिले में केवल 105.5 एमएम बारिश ही दर्ज हुई है, जबकि गत वर्ष 16 जुलाई तक 459.0 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी, जो कि औसत मानसून 650 एमएम का 70.6 प्रतिशित था। मानसून को लेकर जिले के इतिहास के पन्नों को पलटें तो पहले भी जिला सूखे का सामना कर चुका है। 1986, 1987, 1991 और 2002 में हालात बहुत भयाभय रहे थे। तब इन सालों में 300 एमएम से भी कम बारिश दर्ज की गई थी, जो कि जिले की औसत बारिश का 40 प्रतिशत से भी कम रहा। सबसे बड़ी बात यह कि 1986 और 1987 में लगातार दो वर्षों तक सूखे के हालात बने रहे और इन दोनों सालों में क्रमश: 40, 42 एमएम ही बारिश हुई थी, जिसमें बसेड़ी ब्लॉक में सबसे कम मात्र 194.50 एमएम बारिश से किसानों को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा था।

चार सूखों का सामना कर चुका धौलपुर

राजस्थान का पूर्वी जिला धौलपुर मानसून की बेरुखी का कई बार गवाह बन चुका है। जहां चार साल 1986, 1987, 1991 और 2002 सूखे के हालात बने रहे, तो वहीं धौलपुर के इतिहास में 19 वर्षों का मानसून सीजन ऐसा भी रहा जिसमें औसत से भी कम बारिश दर्ज की गई थी। इनमें 1983, 1989, 1990, 1993, 1994, 1999, 2000, 2001, 2004, 2006, 2007, 2009, 1012, 1014, 2014, 2016, 2017, 2020 और 2021 शामिल हैं। इनमें से कई वर्षों में 500 एमएम तो कुछ में 400 मिली मीटर से भी कम बारिश दर्ज की गई थी।

गत दो वर्ष हुई जलप्रलय ने मचाई तबाही

ऐसा नहीं है कि धौलपुर की धरा ने हमेशा सूखे का ही सामना किया है। बल्कि धौलपुर वासियों ने कई वर्ष बाढ़ के हालातों का भी सामना कर चुके हैं। 1995, 2024 और 2025 में मानसून ने जिले में गदर के साथ जमकर तबाही भी मचाई थी। इस दौरान इन तीनों सालों में एक हजार एमएम से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई थी। गत दो वर्षों की बात की जाए तो इस दौरान जिले में रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने हाहाकार मचा कर रख दिया था। 2024 में जिले भर में 1317 एमएम बारिश दर्ज की गई थी जो कि औसत बारिश से दोगुना ज्यादा थी। तो वहीं 2025 में 1020 एमएम यानी 150 प्रतिशत बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इन दोनों वर्षों में शहर से लेकर जिले भर में हालात बहुत ही भयाभय देखने को मिले। इस दौरान धन हानि से लेकर जन हानि भी सामने आईं थी, तो कई हेक्टेयर फसल बर्बाद भी हो गई थी।

50 प्रतिशत हेक्टेयर फसल बुवाई नहीं

गत वर्ष मानसून के कमजोर होने के कारण हालात पिछले दो सालों की अपेक्षा बिल्कुल विपरीत हैं। यही कारण है कि जुलाई माह आधा बीतने के बाद भी 105.6 एमएम बारिश ही हो पाई है यानी औसत बारिश का 16.3 प्रतिशत हिस्सा। बारिश नहीं होने की स्थिति में खरीफ फसल बुवाई भी पिछड़ती दिख रही है। और जहां बुवाई हो चुकी है वहां भीषण गर्मी के कारण फसल पर विपरीत प्रभाव पडऩा प्रारंभ हो चुका है। इस सीजन कृषि विभाग ने 9 हजार 8700 हेक्टेयर खरीफ फसल बुवाई का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 90 हजार हेक्टेयर केवल बाजरा के लिए ही आवंटित किया गया है और अभी तक जिले में केवल 40 से 50 प्रतिशत हेक्टेयर पर ही बुवाई हो पाई है। बारिश नहीं हो पाने की स्थिति और लगातार तीखी धूप गर्मी के कारण खेतों से नमी भी समाप्त हो चुकी है, जिस कारण अब किसान बुवाई करने से भी कतना रहे हैं। इस स्थिति में मानसून ने अन्नदाता को मुसीबत में डाल रखा है।