
किडनी का भी रखें ख्याल, अपशिष्ट पदार्थों रोकने में निभाती है मुख्य किरदार
धौलपुर. भारत के साथ-साथ पूरे विश्व में मार्च माह के दूसरे सप्ताह के गुरुवार को विश्व किडनी दिवस साल 2006 से मनाया जा रहा है। इस बार यह 9 मार्च को मनाया जा रहा है और इस वर्ष की थीम किडनी हेल्थ फॉर ऑल है। आजकल अनेक लोग किडनी रोग से जूझ रहे हैं, उन्हें इसके लक्षणों का पता नहीं होता है। इसलिए विश्व किडनी दिवस मनाने का उद्देश्य गुर्दे में होने वाली बीमारियां के लक्षणों एवं बचाव के उपाय के साथ-साथ गुर्दों को कैसे स्वस्थ रखा जा सकता है। इसके लिए आम जनता को जागरूक करना है। आजकल जो गैर संक्रामक रोग जैसे मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तदाव, ह्रदय रोग, कैंसर आदि बीमारी तेजी से बढ़ रही हैं। जिनमें की गुर्दे की बीमारी भी भारतीय जनमानस में एक नई उभरती हुई समस्या है जिसके बारे में आमतौर पर लोग जागरुक नहीं है या अपेक्षा करते हैं।
अमूमन देखा जाता है कि दुनिया की लगभग 9.1 फीसदी आबादी क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) से पीडि़त है। गुर्दा विकार दुनिया भर में मृत्यु का 12वां प्रमुख कारण है। जिसकी वार्षिक मृत्यु दर 15.7 प्रति एक लाख है। भारत में यह मृत्यु का 8वां प्रमुख कारण है। वर्तमान में दुनिया भर में 2 मिलियन से अधिक लोगों को जीवन के लिए डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता है। वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ.विनोद गर्ग का कहना है कि किडनी ऐसे गुमनाम नायक हैं जो बुरे को छानते हैं और अच्छे को रखते हैं इसलिए हमें किडनी की देखभाल व ध्यान रखना चाहिए। किडनी का मुख्य कार्य अतिरिक्त अपशिष्ट और तरल पदार्थ को रक्त से अलग करके शरीर से उत्सर्जित करने का काम करते हैं। किडनी शरीर में खनिज लवण एवं रासायनिक संतुलन को समान रखती है। जिससे कि ब्लड प्रेशर कंट्रोल में सहायता मिलती है। किडनी में बनने वाला एरिथ्रोपोएटिन नामक हार्मोन की मदद से खून निर्माण एतथा एक्टिव विटामिन-डी के कारण हड्डियों को मजबूत बनाने मे सहायता करती है।
गुर्दा रोगों के कारण
गुर्दा रोगों के कई कारण हैं जिनमें आजकल अनियमित खानपान, शारीरिक श्रम का अभाव, मादक पदार्थ का सेवन, धूम्रपान, जंक फूड का सेवन, पानी कम पीना, लंबे समय तक दर्द निवारक व अन्य दवाइयों का प्रयोग, अनुवांशिकता, अनियंत्रित मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर दोनों ऐसी बीमारिया हैं, जो किडनी को नुकसान पहुंचाती है। पथरी, प्रोस्टेट, ट्यूमर आदि के कारण मूत्र का प्रवाह रुक जाता है। जिससे रुके हुए मूत्र के प्रवाह का गुर्दों पर दबाव डालता है। उसकी कार्य क्षमता को कम करता है। किडनी पर चोट लगने से या विषैले पदार्थों का धीरे-धीरे शरीर में प्रवेश होने से आदि अनेक गुर्दा मे होने वाली बीमारियों के कारण है।
गुर्दा रोगों के सामान्य लक्षण
- पैरों के निचले हिस्से में सूजन आना,
- प्राय: सुबह के समय आंखों के चारों तरफ और चेहरे पर सूजन आना
- खाने में अरुचि होना, जी मिचलाना, उल्टी का मन करना, सांस का फूलना
- खून में फीकापन, रक्तअल्पता (एनीमिया) होना।
- पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना
- विशेष रूप से रात के समय बार-बार पेशाब जाना
- मूत्र में रक्त आना, मूत्र की मात्रा में कमी आना
- मूत्र में जलन होना, मूत्र का रंग परिवर्तित होना
- दवा लेने के बाद भी उच्च रक्तचाप, डायबिटीज का नियत्रण में नहीं आना
गुर्दों को खराब होने से बचाने के उपाय
गुर्दे को स्वस्थ रखने के लिए स्वस्थ दिनचर्या, नियमित व्यायाम, शारीरिक श्रम करना, संतुलित भोजन, उचित मात्रा में तरल पदार्थ का लेना, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें। लंबे समय तक दर्द निवारक दवाइयां को ना लें। धूम्रपान एवं शराब सेवन से बचें, जंक फूड एवं नमक का सेवन कम करें। गुर्दा रोगों की विकृति का पता लगाने के लिए समय-समय पर खून एवं मूत्र की जांच भी कराते रहें। शुरुआत में दवाइयों के द्वारा चिकित्सा की जाती है बाद में डायलिसिस एवं किडनी ट्रांसप्लांट ही करना पड़ता है।
आयुर्वेद में भी है गुर्दा रोगों का इलाज
आयुर्वेद में किडनी को वृक्क की संज्ञा दी गई है। आयुर्वेद संहिताओं में वृक्क में मूत्र निर्माण एवं इनमें होने वाली बीमारियो अश्मरी, मूत्रकृच्छ, मूत्राघात, ग्रंथि आदि के निदान एवं आयुर्वेद चिकित्सा का वर्णन किया है। वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ.विनोद गर्ग ने बताया कि वृक्क विकारों का मुख्य कारण अपान वायु की विकृति, दोषपूर्ण आहार सेवन, आम संचित (इंटरमीडिएट प्रोडक्ट) मूत्रवह संस्थान की व्याधियों आदि होते हैं। गुर्दा विकारों के लिए शोधन चिकित्सा के साथ साथ औषधियों द्वारा शमन चिकित्सा की जाती है। आयुर्वेद के अनुसार हमें आदर्श दिनचर्या, योग, प्राणायाम, घूमना-फिरना, शारीरिक व्यायाम का पालन, नशीले पदार्थों का त्याग एवं मूत्र का वेग नहीं रोकना चाहिए। साथ ही आयुर्वेद में किडनी को स्वस्थ रखने के लिए पुनर्नवा, गोक्षुर, वरुण, शिलाजीत, नारियल पानी, चांगेरी, गाय का दूध, छाछ आदि का प्रयोग चिकित्सक के निर्देशानुसार करना चाहिए।
Published on:
09 Mar 2023 01:19 pm
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