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वन्यजीवों की सुरक्षा को चंबल किनारे गाड़े तम्बू, चौबीस घंटे निगरानी

धौलपुर. चंबल नदी किनारे में बड़ी संख्या में वन्यजीव बसेरा करते हैं, लेकिन इन वन्यजीवों की दुनिया में खलल डालने वाले बजरी माफिया को रोकने के लिए अब वन विभाग के राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का दस्ता सतर्क हो गया है। जिले में बड़े इलाके से गुजर रही चंबल नदी के घाटों को सुरक्षित बनाने क ेलिए अब विभागीय दस्ते ने मोर्चा संभाल लिया है। जिन घाटों पर वन्यजीव अंडे छोड़ते हैैं, उन्हें सुरक्षित रखने के लिए अब यहां वन अभ्यारण्य का दस्ता दिन में पहरा दे रहा है तो रात्रि में तंबू गाड़ पहरेदारी कर रहा रहा। साथ ही स्थानीय पुलिस की भी मदद की जा रही है। गौतलब रहे कि चंबल किनारे घाटों पर बड़ी संख्या में घडिय़ाल, कछुआ और अन्य वन्यजीव अंडे देते हैं। इन घाटों पर इन सैंकड़ों घरौंदा हैं, जिन्हें अब सुरक्षित किया जा रहा है। दस्ते यहां पर बढ़ाई निगरानी वन विभाग की टीम ने जिले में प्रमुख स्थानों पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है। इसमें दुर्गासी घाट, बसई डांग, सेवर पाली घाट, अंडवा पुरैनी, तिर्घरा इत्यादि महत्वपूर्ण स्थान हैं। यहां पर स्टाफ तैनात किया गया। पैदल गश्त के साथ यहां पर रात्रि में तंबू में दो जवान निगरानी के लिए तैनात किए गए हैं। यहां पर विशेषकर घडिय़ाल, कछुओं के साथ साथ इंडियन स्कीमर पक्षी के अंडों को सुरक्षा दी जा रही है।

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वन्यजीवों की सुरक्षा को चंबल किनारे गाड़े तम्बू, चौबीस घंटे निगरानी Tents pitched on the banks of Chambal River for wildlife protection, 24-hour surveillance

- जिले के बसई डांग, सेवर पाली और तिर्घरा घाटां पर कड़ी चौकसी

- घडिय़ाल और कछुआ और पक्षियों के अंडों को नुकसान से बचाने की कवायद

- बजरी माफिया की गतिविधियों से वन्यजीवों के ठिकाने होते हैं प्रभावित

धौलपुर. चंबल नदी किनारे में बड़ी संख्या में वन्यजीव बसेरा करते हैं, लेकिन इन वन्यजीवों की दुनिया में खलल डालने वाले बजरी माफिया को रोकने के लिए अब वन विभाग के राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का दस्ता सतर्क हो गया है। जिले में बड़े इलाके से गुजर रही चंबल नदी के घाटों को सुरक्षित बनाने क ेलिए अब विभागीय दस्ते ने मोर्चा संभाल लिया है। जिन घाटों पर वन्यजीव अंडे छोड़ते हैैं, उन्हें सुरक्षित रखने के लिए अब यहां वन अभ्यारण्य का दस्ता दिन में पहरा दे रहा है तो रात्रि में तंबू गाड़ पहरेदारी कर रहा रहा। साथ ही स्थानीय पुलिस की भी मदद की जा रही है। गौतलब रहे कि चंबल किनारे घाटों पर बड़ी संख्या में घडिय़ाल, कछुआ और अन्य वन्यजीव अंडे देते हैं। इन घाटों पर इन सैंकड़ों घरौंदा हैं, जिन्हें अब सुरक्षित किया जा रहा है।

दस्ते यहां पर बढ़ाई निगरानी

वन विभाग की टीम ने जिले में प्रमुख स्थानों पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है। इसमें दुर्गासी घाट, बसई डांग, सेवर पाली घाट, अंडवा पुरैनी, तिर्घरा इत्यादि महत्वपूर्ण स्थान हैं। यहां पर स्टाफ तैनात किया गया। पैदल गश्त के साथ यहां पर रात्रि में तंबू में दो जवान निगरानी के लिए तैनात किए गए हैं। यहां पर विशेषकर घडिय़ाल, कछुओं के साथ साथ इंडियन स्कीमर पक्षी के अंडों को सुरक्षा दी जा रही है।

बजरी माफिया की गतिविधियों से पहुंचता है नुकसान

जिले में चंबल नदी किनारे कई इलाकों में अवैध बजरी निकासी के चलते इन वन्यजीवों को खासा नुकसान पहुंचता है। इसमें विशेषकर बसई डांग, सेवर पाली घाट, अंडवा पुरैना और तिर्घरा हैं। यहां पर हर साल वन्यजीव प्रजनन क्रिया के बाद अंडे छोड़ते हैं। लेकिन इन घाटों पर बजरी माफिया की गतिविधियों के चलते यह ट्रेक्टर-ट्रॉलियों से कुचल जाते हैं। बड़ी संख्या में इन घाटों पर माफिया के ट्रेक्टर-ट्रॉली निकलते हैं। हालाकि, बीते कुछ दिनों से पुलिस की सख्ती के चलते गतिविधि थमी है लेकिन नजर चूकते हैं ही बजरी माफिया इलाके में गतिविधि शुरू कर देता है। ऐसे में वन्यजीवों के अंडों को बचाने लिए इलाके में मॉनिटरिंग बढ़ाई है।

बजरी माफिया की होगी घेराबंदी...

मध्यप्रदेश-राजस्थान की सीमा पर बजरी माफिया की गतिविधियों को रोकने के लिए दोनों प्रदेशों की सरकारें जल्द ज्वाइंट ऑपरेशन चलाएंगी। साथ ही इलाके में नियमित गश्त होगी, जिससे अवैध बजरी परिवहन को रोका जा सके। सुप्रीम कोर्ट की सख्त नाराजगी के बाद धौलपुर और मुरैना जिला प्रशासन ने इलाके में घेराबंदी तेज कर दी है।

- जिले में चंबल नदी किनारे के कई घाटों पर पहरा बढ़ाया है। यहां टीमें लगातार गश्त कर रही हैं जिससे अंडों को नुकसान नहीं पहुंचे। साथ ही अवैध बजरी परिवहन की गतिविधि रोकने के लिए रात्रि में ड्यूटी लगाई है। रेंज कार्यालय की टीमों को अलर्ट पर रखा है जिससे सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

- डॉ.आशाीष व्यास, डीएफओ वन्यजीव