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देश-विदेश में विख्यात है सरमथुरा का लाल पत्थर

सरमथुरा . धौलपुर सैंड स्टोन के नाम से विख्यात इमारती लाल पत्थर मुख्यता सरमथुरा क्षेत्र से निकलता है। यह खनिज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पहचान बनाए हुए हंै। देश की आन-बान-शान संसद भवन, किला, इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन जैसी इमारत भी इसी लाल पत्थर से बनाई गई हैं, जो आज भी अपनी अपनी रौबदार छवि से इस पत्थर को विख्यात कर रही हैं।

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The red stone of Sarmathura is famous in the country and abroad.

देश-विदेश में विख्यात है सरमथुरा का लाल पत्थर

देश-विदेश में विख्यात है सरमथुरा का लाल पत्थर

सरमथुरा . धौलपुर सैंड स्टोन के नाम से विख्यात इमारती लाल पत्थर मुख्यता सरमथुरा क्षेत्र से निकलता है। यह खनिज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पहचान बनाए हुए हंै। देश की आन-बान-शान संसद भवन, किला, इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन जैसी इमारत भी इसी लाल पत्थर से बनाई गई हैं, जो आज भी अपनी अपनी रौबदार छवि से इस पत्थर को विख्यात कर रही हैं।सैकड़ों बरसों से सरमथुरा क्षेत्र के भू भाग के गर्भ से निकलने वाला यह पत्थर हालांकि हजारों वर्षों से मकानों इत्यादि अन्य कार्यों में काम आ रहा है, लेकिन आज से 100 वर्ष पूर्व ब्रिटिश काल में इस पत्थर की ख्याति और बढ़ गई थी। यही नहीं इस पत्थर की धुलाई के लिए ब्रिटिश शासन काल एवं धौलपुर महाराज के बीच हुए एक समझौते में इस पत्थर को ही देश विदेश में पहुंचाने के लिए रेल भी चलाई गई थी। इसके डिब्बों में पत्थर भरकर इसको अन्यत्र पहुंचाया जाता रहा। इस पत्थर उद्योग को चमकाने में प्रमुख भूमिका यहां के पूर्व विधायक दलजीत सिंह चीकू के परिवार का रहा है। इनके पूर्वज दादा धर्म सिंह एवं पिताजी स्वर्गीय शक्तिसिंह के कार्यकाल में इस खनिज भंडार का उत्पादन जोर-शोर से शुरू हुआ और इसको देश विदेश तक पहुंचाया जाने लगा। अब भी पत्थर उद्योग की छोटी-छोटी समस्याओं पर भी इनका बारीकी से ध्यान रहता है। पूर्व विधायक दलजीत सिंह चीकू वर्तमान में भी गैंगसा यूनिटों के संगठन चैम्बर ऑफ स्टोन सोसाइटी के अध्यक्ष हैं।