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बंदोबस्त विभाग चौथी बार पहुंचा पर नहीं मिली विद्यालय की गुम हुई भूमि

राजाखेड़ा के बालिका विद्यालय के लिए आवंटित करोड़ों की गुम हुई भूमि को तलाश करने भूप्रबंधन विभाग का दस्ता चौथी बार राजाखेड़ा पहुंचा और दिन भर की मशक्कत के बाद भी गुम हुई 13 बिस्वा भूमि को तलाश कर अतिक्रमण हटाने में विफल रहने पर वापस भरतपुर लौट गया।

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बंदोबस्त विभाग चौथी बार पहुंचा पर नहीं मिली विद्यालय की गुम हुई भूमि The settlement department visited for the fourth time but could not find the school's lost land.

जेसीबी लेकर आया दस्ता मायूस हुआ लौटा वापस

dholpur. राजाखेड़ा के बालिका विद्यालय के लिए आवंटित करोड़ों की गुम हुई भूमि को तलाश करने भूप्रबंधन विभाग का दस्ता चौथी बार राजाखेड़ा पहुंचा और दिन भर की मशक्कत के बाद भी गुम हुई 13 बिस्वा भूमि को तलाश कर अतिक्रमण हटाने में विफल रहने पर वापस भरतपुर लौट गया। दस्ते के साथ नायब तहसीलदार राजाखेड़ा व कार्यवाहक अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका देवेंद्र मुद्गल, बालिका विद्यालय की प्रधानाचार्य व राजस्व विभाग, के कर्मचारियों के साथ पुलिस बल भी मौजूद रहा पर भूमि का पता नहीं चल पाया।

गौरतलब है कि राजनीतिज्ञों, अधिकारियों और प्रभावशालियों का गठजोड़ उपखंड में इस कदर हावी हो चुका है कि वर्ष 2002 में राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए आवंटित 13 बिस्वा बेशकीमती जमीन को जिसकी वर्तमान बाजार कीमत 5 करोड़ से भी अधिक आंकी जा रही है, को नगर पालिका ने अतिक्रमण मुक्त करवाने के स्थान पर विद्यालय को शहरी क्षेत्र से दूर अन्य भूमि का आवंटन कर दिया और इस कीमती जमीन को भूल बैठी। हालांकि आवंटन के समय इस भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं था और यह पूरी तरह खाली थी, लेकिन बजट के अभाव में विद्यालय इसकी चहारदीवारी नहीं करवा सका। लोगों का आरोप है कि शिक्षा विभाग की लापरवाही और नगर पालिका की जानबूझकर की गई अनदेखी से कुछ ही वर्षो में प्रशासनिक शह पर इसपर कब्जा कर लिया गया। वहीं दरियादिल नगर पालिका ने भी इस कब्जे को हटवाकर अतिक्रमियों पर कार्रवाई करने के स्थान पर बालिका विद्यालय को अन्यत्र जमीन आवंटित कर अतिक्रमियों को इस पर बाजार बनाने की मूक ओर अघोषित स्वीकृति दे दी। जो एक गंभीर मामला है ।

दर्जनों ज्ञापन,तहसीलदार से मुख्यमंत्री तक गुहार पर सब बेकार

इस जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाने के लिए विभिन्न संगठनों और संस्थाओं ने स्थानीय नगर पालिका, तहसीलदार, उपखंड अधिकारी, जिला कलेक्टर, शिक्षा सचिव , शिक्षा मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई लेकिन स्थानीय प्रशासन में यह फ़ाइल एक सीट से दूसरी सीट पर घूम रही पर एक दशक में निर्णायक कार्यवाही नहीं हो पाई है । ख़ुद बालिका विद्यालय प्रशासन 2015 से इस बेशकीमती जमीन को मुक्त करवाने के लिये प्रयास कर रहा है। पर किसी के भी कानो पर जूं नही रेंग रही।

2002 में हुई आवंटित

बालिका विद्यालय दशकों से एक छोटे से निजी भवन में संचालित हो रहा था। जिसमें 500 से अधिक बालिकाएं अमानवीय हालात में अध्ययनरत थीं। पत्रिका के इस बाबत अभियान के बाद प्रशासन ने नगरपालिका से वर्ष 2002 में हाट मैदान बाई पास मार्ग पर 13 बिस्वा जमीन बालिका विद्यालय के नवीन भवन निर्माण के लिए आवंटित करवाई, लेकिन बजट के अभाव में जमीन पर भवन तो नही बना पर भू माफिया ने इस पर कुदृष्टि डाली और इस पर कब्जा कर डाला। आम जनता की मांग पर बालिका विद्यालय ने अतिक्रमण हटवाने के लिए तमाम पत्र तहसीलदार को लिखे पर कार्रवाई हुई नहीं या माफिया के दबाव में होने नहीं दी गयी।बल्कि बालिका विद्यालय के लिए कोर्ट के पास नवीन भूमि आवंटन कर भवन निर्माण आरम्भ करवा दिया गया और इस बेशकीमती जमीन को अन्य उपयोग में लेने की जगह भू माफिया को उपकृत कर दिया गया।

प्रशासन को नहीं मिल रही जमीन

आमजन के बढ़ते दबाव के बीच तहीसलदार ने भूमि की नाप करवाई, लेकिन इसे आबादी के बीच आ जाने का कारण बताते हुए पैमाइश नहीं किए जाने बाबत रिपोर्ट लगाकर मामला बंद कर दिया गया। नाराज लोगों के आंदोलन को देख बालिका विद्यालय ने जिला कलक्टर की मदद से बंदोबस्त विभाग से इस जमीन की नापतोल के निर्देश करवाए, लेकिन जुलाई से अब तक कई बार पैमाइश के बाद भी बंदोबस्त विभाग की रिपोर्ट पर कार्रवाई न होना अब लोगों के समक्ष प्रश्न चिह्न खड़े कर रहा है।

जिस व्यक्ति का कब्जा बताया जा रहा था, उसने नवंबर माह 2024 का न्यायालय का स्टे ऑर्डर पेश किया। जिसके बाद सीमाज्ञान का कार्य बंद करना पड़ा। अब न्यायालय से इस बाबत दिशानिर्देश प्राप्त कर आगामी कार्रवाई के लिए रूपरेखा तैयार की जाएगी।

दीप्ति देव, तहसीलदार राजाखेड़ा

हम अतिक्रमण हटाने के लिए दल बल के साथ पहुंचे थे लेकिन स्टे ऑर्डर पेस करने पर दस्ते को वापस लौटना पड़ा।

देवेंद्र तिवारी, अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका