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दो साल बाद भी अधर में एसटीपी प्लांट, पंप ही सहारा

-70करोड़ की लागत से बन रहा अत्याधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट -कछुआ चाल से कार्य, अभी तक80 फीसदी ही हो पाया निर्माण धौलपुर.सीवरेज के चैम्बरों और नालों से उफन रहे गंदे पानी से फिलहाल शहरवासियों को निजात मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। 70 करोड़ की लागत से बना तगावली स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का अपग्रेडशन […]

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दो साल बाद भी अधर में एसटीपी प्लांट, पंप ही सहारा Two years later, the STP plant remains in limbo, with the pump as its sole support

-70करोड़ की लागत से बन रहा अत्याधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

-कछुआ चाल से कार्य, अभी तक80 फीसदी ही हो पाया निर्माण

धौलपुर.सीवरेज के चैम्बरों और नालों से उफन रहे गंदे पानी से फिलहाल शहरवासियों को निजात मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। 70 करोड़ की लागत से बना तगावली स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का अपग्रेडशन कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो पाया है, नतीजा प्लांट पर इक_ा हो रहे पानी को दो सालों से पंप के सहारे ही फेंका जा रहा। इस दौरान लाखों रुपए डीजल के नाम पर भी फूंक दिए गए।

परिषद के ढुलमुल रवैए के कारण तगावली स्थित पुराने एसटीपी प्लांट दो साल के बाद भी प्रारंभ नहीं हो सका। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण अमृत 2.0 योजना के तहत कराया जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य कछुला चाल से चल रहा है। देखा जाए तो अभी तक 8 प्रतिशत ही कार्य हो पाया है, फिलहाल हॉर्स पॉवर हाउस में अभी सिस्टम ही अपग्रेड नहीं हो सका यानी अभी मशीनों का सेटअप ही नहीं लगा है। हालांकि विभाग का कहना है कि प्लांट तक36केवी विद्युत लाइन डाल दी गई है। सिविल का कार्य भी लगभग पूर्ण हो चुका है तो वहीं मेकेनिकल कार्य भी पूर्ण होने के कगार पर है। यह ट्रीटमेंट प्लांट शहर के विस्तार लेने और आने वाले समय में सीवरेज से अधिक पानी प्लांट तक पहुंचने को ध्यान में रखते हुए निर्माण हो रहा है। नए एसटीपी प्लांट में चौबीस घंटे में 10 एमएलडी पानी ट्रीट हो सकेगा। वहीं, पुराने प्लांट में भी इतना ही पानी ट्रीटमेंट होकर बाहर फेंका जाएगा।

पानी फेंकने डीजल पर खर्च किए लाखों रुपए

दो सालों से ज्यादा वक्त के बाद भी प्लांट का शुभारंभ नहीं हो पाया है। इस दौरान परिषद लाखों रुपए अतिरिक्त खर्च भी कर दिए। गत वर्ष पहले जब एसटीपी प्लांट पर मोटल केबिल में फॉल्ट आ जाने के बाद कई माहों तक पंपों को डीजल के सहारे चलाया गया। इस दौरान प्रतिदिन लगभग 280 लीटर डीजल की खपत की गई। यानी परिषद पानी निकालने के नाम पर एक दिन के 25000 रुपए खर्च किए गए थे। ऐसा एक-दो नहीं बल्कि कई माहों तक चला था। जानकारी के अनुसार इस पर लगभग 40 लाख रुपए डीजल के ऊपर व्यय किया गया था, हालांकि अब विद्युत के जरिए पंपों से पानी फेंका जा रहा है। गनीमत है कि इक_े होते पानी को आसपास के किसान अपनी खेती के लिए पंपों की सहायता से उपयोग में ले रहे हैं, अन्यथ पानी और इक_ा होने की सूरत में परिषद को अतिरिक्त पंप और रखने को मजबूर होना पड़ता।

दूषित पानी ट्रीट कर खेती योग्य बनेगा

शहर के चेम्बरों में बहने वाले दूषित पानी को खेती योग्य बनाने के लिए तगावली स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की आधारशिला रखी गई थी, लेकिन कुछ खामियों के चलते एसटीपी प्लांट का अत्याधुनिक तरीके से पुन: निर्माण कराया जा रहा है, दो सालों से जनता इसके पूर्ण होने की राह देख रही है। ज्ञात हो कि शहर में चेम्बरों से जल निकासी ना होने के कारण जगह-जगह चेम्बर उफान मार रहे हैं। जिस कारण शहरवासी भी प्लांट जल्द बनने की राह देख रहे हैं, जिससे उन्हें गंदे उफनते नालों से मुक्ति मिलेगी।

एसटीपी प्लांट का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। प्लांट तक36केवी विद्युत लाइन डाल दी गई है। सिविल का कार्य भी लगभग पूर्ण हो चुका है तो वहीं मेकेनिकल कार्य भी पूर्ण होने के कगार पर है। जल्द ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की शुरुआत की जाएगी।

-दीपक गोयल, एइएन नगर परिषद धौलपुर