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विश्व पाइल्स दिवस: खानपान बिगडऩे से बिगड़ा कब्ज, लोगों में बढ़ रहा मर्ज

- देश में हर साल 10 मिलियन लोग हो रहे पाइल्स की समस्या से पीडि़त   #World Piles Day news: धौलपुर. विश्व पाइल्स दिवस मनाने का उद्देश्य आम नागरिकों को अधिकाधिक इस बीमारी के बारे में जागरूक करना जिससे कि उनका डर दूर हो सके तथा उचित निदान कर उसका इलाज किया जा सके। हर साल 20 नवंबर को वल्र्ड पाइल्स डे मनाया जाता है।

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World Piles Day: Constipation worsens due to food spoilage, increasing merge in people

विश्व पाइल्स दिवस: खानपान बिगडऩे से बिगड़ा कब्ज, लोगों में बढ़ रहा मर्ज

विश्व पाइल्स दिवस: खानपान बिगडऩे से बिगड़ा कब्ज, लोगों में बढ़ रहा मर्ज
- देश में हर साल 10 मिलियन लोग हो रहे पाइल्स की समस्या से पीडि़त

#World Piles Day news: धौलपुर. विश्व पाइल्स दिवस मनाने का उद्देश्य आम नागरिकों को अधिकाधिक इस बीमारी के बारे में जागरूक करना जिससे कि उनका डर दूर हो सके तथा उचित निदान कर उसका इलाज किया जा सके। हर साल 20 नवंबर को वल्र्ड पाइल्स डे मनाया जाता है। विश्व में कुल जनसंख्या की 4.5 फीसदी लोगों को पाइल्स के लक्षण दिखाई देते हैं तथा 10 मिलियन लोग भारत में प्रतिवर्ष पाइल्स की समस्या से पीडि़त हैं।

आमतौर पर लोग गुदा मार्ग से होने वाली सभी बीमारियों को बवासीर मानते हैं लेकिन वास्तव में कई प्रकार की बीमारियों में एक जैसे लक्षण खून का आना, दर्द होना, कब्ज आदि होते हैं। पाइल्स से लेकर कैंसर तक बीमारियों में एक जैसे लक्षण हो सकते हैं। गुदा मार्ग में पाइल्स (खून का आना), फिस्टुला (गुदा मार्ग के पास फुंसी होना और मवाद आना, भगन्दर), गुदविद्रधि गुदा मार्ग में में कट लग (फिसर, परिकार्तिका) जाना, गुदा मार्ग का बाहर आना (रेक्टल प्रोलेप्स), अल्सरेटिव कोलाइटिस, रेक्टल पॉलिप, जेनाइटल वाट्र्स, रेक्टल कैंसर आदि बीमारियां होती हैं। इसलिए मनुष्य को सही समय पर उचित चिकित्सक से सलाह लेकर अवश्य दिखाए।

पाइल्स क्या है

पाइल्स को सामान्यत: खूनी और वादी बवासीर, अर्श, मस्सा, हिमरॉइड भी कहा जाता है। बवासीर गुदा मार्ग के निचले हिस्से में मौजूद रक्त शिराओं में आने वाली सूजन है हालांकि यह गुदा मार्ग के अंदर के होती है लेकिन कई बार गुदा मार्ग के बाहर भी उभरे हुए मस्सों के रूप में महसूस कर सकते हैं।

क्या है वजह
- पाइल्स का मुख्य कारण बद्धकोष्ठता है जो कि अनियमित जीवनशैली के कारण होती है।
- खाने में रेशेदार आहार का कम प्रयोग करना
- मल त्याग के समय जोर लगाना
- पुरानी कब्ज (क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन)
- डिसेंट्री, डायरिया
- शारीरिक व्यायाम की कमी
- आन्तरिय उदरीय दाब वृद्धि (इंट्रा एब्डोमिनल प्रेशर का बढऩा), गर्भावस्था, पुरानी खांसी और बहुत भारी वजन उठाना आदि में उदर में दबाव बढ़ता है
- हेमोरॉयडल वेन में वाल्व की अनुपस्थिति
- मोटापा
- अनुवांशिकी
- पोर्टल हाइपरटेंशन
- क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन (पुरानी कब्जी)
- शौच के लिए लंबे समय तक बैठना

पाइल्स के ये हैं लक्षण
- गुदा मार्ग से मल त्याग के समय लाल चमकदार खून का बूंद-बूंद करके या पिचकारी की तरह आना।
- मल त्याग के समय गुदा मार्ग के पास सूजन महसूस होना या मस्सों का बाहर आकर अपने आप अंदर चले जाना या हाथ से अंदर करना
- गुदा मार्ग के पास खुजली का होना, डिस्चार्ज के कारण आसपास की त्वचा पर इरिटेशन होना।
- आभ्यंतर अर्श के कारण अत्यधिक रक्तस्राव के कारण धीरे-धीरे शरीर में खून की कमी हो जाती है जिससे कि सांस लेने में परेशानी, कमजोरी, आलस्य, त्वचा का पीलापन, चक्कर का आना आदि लक्षण प्रकट होते हैं।

ये है इलाज

- पुरानी कब्ज पाइल्स रोग का मुख्य कारण है इसके लिए हम सभी को नियमित जीवन शैली के साथ साथ ऐसे खान पान का सेवन करे जिससे कि कब्ज ना हो।
- पानी अधिक पीये, अत्यधिक रेशेदार आहार का प्रयोग करे।
- खाने में मूंग की दाल, दलिया, खिचड़ी, हरी पत्तेदार सब्जी, छाछ पर्याप्त मात्रा में लें।
- तीखे चटपटे, ज्यादा मसालेदार भोजन, फास्ट फूड का सेवन नहीं करें।
- मल त्याग के समय जोर नहीं लगाएं एवं अधिक समय तक बैठने से बचे।
- पाइल्स रोग यदि औषधि से ठीक नहीं होता है तो अनेक प्रकार की आयुर्वेद और आधुनिक शल्य चिकित्सा भी है। जिनमे क्षार सूत्र, इंफ्रारेड कोगुलेशन, लेजर, स्क्लेरोथेरेपी, क्रायोसर्जरी, रबर बैंडलाईगैशन आदि के द्वारा ऑपरेशन किया जाता है।


क्या कहते हैं चिकित्सक

आयुर्वेद में पाइल्स को अर्श कहा जाता है। आयुर्वेद की संहिताओं में इसका विस्तृत वर्णन है जो मांसाकुर गुदा मार्ग में रुकावट कर शत्रु के समान कष्ट पहुंचाता है उसे अर्श कहते हैं। राजकीय आयुर्वेद औषधालय कासिमपुर के चिकित्सा अधिकारी डॉ.विनोद कुमार गर्ग ने बताया कि बीमारी की चिकित्सा के लिए आयुर्वेद में अग्नि दीपन, पाचन (पाचन तंत्र को सही करने वाली औषधियां) वातानुलोमक, औषधियां का प्रयोग करते हैं। जिससे कि रोगी की कब्ज दूर होती है।

रोग का प्रारंभिक अवस्था में औषधियों के द्वारा उपचार करने से रोग को आगे बढऩे से रोका जा सकता है। साथ ही सर्जरी से बचा जा सकता है।
अर्श रोग में कब्ज, पाचन तंत्र को सही करने वाली त्रिफला चूर्ण, पंचसकार चूर्ण, त्रिफला गुग्गुलु, कांकायन वटी, अभयारिष्ट, द्राक्षासव जात्यादि तेल आदि एवं रक्त स्तंभक औषधि तथा अवगाह न (सेक) के लिए पंचवल्कल क्वाथ, त्रिफला क्वाथ का प्रयोग चिकित्सकीय निर्देशानुसार प्रयोग करते हैं।