15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गेहूं पर पहली बार इल्ली का प्रकोप, कृषि वैज्ञानिक बोले – यह कीट अफ्रीका से आया

धौलपुर. मौसम में आए परिवर्तन के चलते फसलों में इल्ली का प्रकोप बढ़ गया है। जिसमें इल्ली दिनों दिन फसलों को चौपट कर रही है। हैरानी की बात तो यह है कि गेहूं की फसल में पहले कभी भी इल्ली नहीं देखी गई। लेकिन इस बार गेहूं की फसल पर ही इल्ली का प्रकोप है, जबकि इसके पहले वर्षों में केवल चना की फसल में इल्ली का प्रकोप होता था। कृषि विज्ञान केंद्र धौलपुर के कृषि वैज्ञानिक शिवमूरत मीणा ने बताया कि उनको सपैऊ पंचायत समिति के गांव ईट की, कैथरी व उसके आसपास के गांवों के किसानों ने बताया कि गेहूं की फसल को इल्

2 min read
Google source verification
 Worm outbreak on wheat for the first time, agricultural scientist said - this insect came from Africa

गेहूं पर पहली बार इल्ली का प्रकोप, कृषि वैज्ञानिक बोले - यह कीट अफ्रीका से आया

गेहूं पर पहली बार इल्ली का प्रकोप, कृषि वैज्ञानिक बोले - यह कीट अफ्रीका से आया

- आमतौर पर चना मटर में ही दिखता था प्रकोप

धौलपुर. मौसम में आए परिवर्तन के चलते फसलों में इल्ली का प्रकोप बढ़ गया है। जिसमें इल्ली दिनों दिन फसलों को चौपट कर रही है। हैरानी की बात तो यह है कि गेहूं की फसल में पहले कभी भी इल्ली नहीं देखी गई। लेकिन इस बार गेहूं की फसल पर ही इल्ली का प्रकोप है, जबकि इसके पहले वर्षों में केवल चना की फसल में इल्ली का प्रकोप होता था। कृषि विज्ञान केंद्र धौलपुर के कृषि वैज्ञानिक शिवमूरत मीणा ने बताया कि उनको सपैऊ पंचायत समिति के गांव ईट की, कैथरी व उसके आसपास के गांवों के किसानों ने बताया कि गेहूं की फसल को इल्ली लगातार चौपट कर रही है। जिससे किसान परेशान हैं।
मीणा ने बताया कि यह कीट अफ्रीका से भारत आया है। करीब 20 राज्यों में इसका प्रकोप देखा गया है। इसका नाम फाल आर्मी वर्म है। यह पॉलिफैगस कीट है। मुख्य रूप से मक्का को नुकसान पहुंचाता है। केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. माधोसिंह ने बताया कि यह कीट बादल वाले मौसम में अधिक बढ़ता है। साथ ही फसलों को ज्यादा नुकसान करता है। ज्यादा ठंड पडऩे पर कीट का प्रकोप कम हो जाता है। किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। नहीं तो जब बालियां हो जाएंगी तो और भी ज्यादा नुकसान हो सकता है। ऐसे म़े किसानों को दवाओं का छिडक़ाव सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। जिन गांवों में गेहूं की फसल में इल्ली का प्रकोप देखा है। वहां किसानों को तुरंत दवा छिडकऩे की सलाह दी गई है।

किसानों को यह है सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र के कीट वैज्ञानिक डॉ. दिनेश कच्छावा ने किसानों को सलाह दी है कि इस कीट सेे बचने के लिए इन इमा मेक्टिन वेजोएनट 100 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से छिडक़े। इसके अलावा फ्लू वेनडामाइड 50 ग्राम प्रति एकड़ में छिडक़ सकते हैं। कोरामेन 40 ग्राम प्रति एकड़ में छिडक़ सकते हैं।

इनका कहना है
किसी भी फसल में कोई नई बीमारी दिखाई दे तो तुरंत किसान कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों से सम्पर्क कर सकते हैं, ताकि समय रहते फसल का निरीक्षण कर और उचित उपचार किसानों को बताया जा सके।
शिवमूरत मीणा, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, धौलपुर