
मधुमक्खी या ततैया के काटने पर जलन होने पर प्रभावित भाग पर बेलपत्र का रस लगाने से तुरंत आराम मिलता है।
बील का शर्बत पेट को ठंडा रखकर रोगों से बचाता है। इसकी पत्तियां भी फायदेमंद हैं। इसकी पत्तियों के पीसकर पानी के साथ पीने से शरीर को ठंडक के साथ ऊर्जा मिलती है।
बुखार से राहत : बील की पत्तियों का काढ़ा पी सकते हैं। मधुमक्खी या ततैया के काटने पर जलन होने पर प्रभावित भाग पर बेलपत्र का रस लगाने से तुरंत आराम मिलता है।
हृदय रोग : बेलपत्र का काढ़ा नियमित पीने से हार्ट अटैक का खतरा कम होकर अस्थमा रोगियों को राहत मिलती है।
छालों से मुक्ति : शरीर में अधिक गर्मी बढ़ने पर यदि मुंह में छाले हो जाएं तो बील की पत्तियों को मुंह में रखकर चबाएं। इससे छाले धीरे-धीरे कम हो जाएंगे।
बवासीर : बील की जड़ का गूदा पीसकर बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर उसका चूर्ण बनाएं। इस चूर्ण को प्रतिदिन सुबह-शाम ठंडे पानी के साथ लें। बवासीर का दर्द अधिक है तो दिन में तीन से चार बार ले सकते हैं।
Published on:
26 Jul 2019 05:00 pm
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