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छींक को रोकने की गलती न करें

कई लोग छींक आने पर उसे किसी भी तरह रोकने की कोशिश करते हैं। कुछ लोग तो नाक को जोर से दबा लेते हैं।

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कई लोग छींक आने पर उसे किसी भी तरह रोकने की कोशिश करते हैं। कुछ लोग तो नाक को जोर से दबा लेते हैं। लेकिन चिकित्सा विज्ञानियों ने ऐसा न करने की चेतावनी दी है। इनका कहना है कि ऐसा करने से कान का परदा फट सकता है या फिर दिमाग की कोई नस भी फट सकती है।

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यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स ऑफ लीसेस्टर के तीन ईएनटी विशेषज्ञों ने हाल ही एक ऐसे मामले की जानकारी दी है जिसमें एक 34 वर्षीय मरीज ने छींक को रोकने के लिए दोनों नासिकाओं को दबा लिया और अपना मुंह बंद कर लिया।

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ऐसा करते ही उस व्यक्ति की आवाज बंद हो गई, तेज दर्द होने लगा और गले के दोनों ओर सूजन आ गई।

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जांच करने पर पाया गया कि उस व्यक्ति के मुंह और नाक का पिछला हिस्सा जो गले में था, वह फट गया था, जिससे उसे ‘सबक्यूटेनियस एम्फीसेमा’ हो गया। इस सिचुएशन में हवा छाती की अंदरूनी दीवार की स्किन में घुस जाती है, तो बेहद दर्दनाक होता है।