प्रेगनेंसी में बीन्स खाना, गर्भस्थ शिशु के दिल के लिए फायदेमंद

प्रेगनेंसी में बीन्स खाना, गर्भस्थ शिशु के दिल के लिए फायदेमंद
प्रेगनेंसी में बीन्स खाना, गर्भस्थ शिशु के दिल के लिए फायदेमंद

Yuvraj Singh Jadon | Updated: 05 Sep 2019, 04:20:33 PM (IST) डाइट-फिटनेस

गर्भावस्था में बीन्स खाने से गर्भस्थ शिशु के हृदय का विकास होता है और उसे अस्थमा से बचाने में भी यह सहायक है

हरी सब्जियां सेहत के लिए फायदेमंद होती हैं। बीन्स का प्रयोग रुमेटिक, आर्थराइटिस और यूरिनरी ट्रैक्ट से जुड़ी समस्या की दवा बनाने के लिए होता है। इसमें मौजूद फाइबर व पानी शरीर को कई गंभीर रोगों से बचाते हैं।इसमें फ्लेवोनॉएड्स व क्यूरेस्टिन हैं जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं। हफ्ते में 3-4 बार भोजन में इसे खाने से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की आशंका घट सकती है। गर्भावस्था में बीन्स खाने से गर्भस्थ शिशु के हृदय का विकास होता है और उसे अस्थमा से बचाने में भी यह सहायक है।आइए जानते हैं बीन्स के अन्य फायदाें के बारे में :-

बीन्स के अन्य फायदे :-

- हरी बीन्स में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो डायबिटीज को बढ़ने से रोकते हैं। इसमें पर्याप्त मात्रा में डायट्री फाइबर और कार्बोहाइड्रेट्स पाए जाते हैं। मधुमेह के मरीजों के लिए इसे आदर्श सब्जी माना जाता है।

- बीन्स में कैल्शियम पाया जाता है, जो हड्डियों के क्षरण को रोकता है। इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन ए, के और सिलिकॉन भी हड्ड‍ियों के लिए फायदेमंद होते हैं। इन पोषक तत्वों की कमी होने पर हड्ड‍ियां कमजोर हो जाती हैं।

- हरी बीन्स में पर्याप्त मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जिससे इम्यून सिस्टम बेहतर बनता है। ये कोशिकाओं की क्षति को ठीक करके नई कोशिकाओं के बनने को प्रोत्साहित करता है।

- हरी बीन्स में कैरोटीनॉएड्स मौजूद होते हैं जो आंखों के अंदरूनी हिस्से के तनाव को कम करने का काम करते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद कई तरह के लवणों से आंखों की रोशनी भी बेहतर बनती है।

- हर रोज हरी बीन्स के सेवन से एक खास किस्म के कोलोन कैंसर के होने का खतरा कम हो जाता है।

- फ्लेवेनॉएड्स की मौजूदगी की वजह से बीन्स दिल के लिए भी काफी फायदेमंद होते हैं। इनके नियमित सेवन से दिल से जुड़ी बीमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है। साथ ही ये खून का थक्का नहीं जमने देते।

- बीन्स के नियमित सेवन से पेट भी स्वस्थ रहता है। इनके सेवन से पाचन संबंधी समस्याएं होने का खतरा कम हो जाता है और गैस, कब्ज और मरोड़ की परेशानी नहीं होती है।

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