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55 जीआइ से कम वाली चीजें खाएं, वजन-शुगर नियंत्रित रहेगा

हाइ काब्र्स डाइट जैसे गेहूं की रोटी, चावल, जंक और फास्ट फूड डायबिटीज में नुकसान पहुंचाते हैं। इसकी जगह साबुत और मोटे अनाज को आहार में शामिल करें। इससे न केवल डायबिटीज कंट्रोल होगी बल्कि टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा भी घटेगा। गेहूं से बनी मैदा भी ज्यादा नुकसानदेह है।

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जयपुर

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Jyoti Kumar

Sep 23, 2023

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हाइ काब्र्स डाइट जैसे गेहूं की रोटी, चावल, जंक और फास्ट फूड डायबिटीज में नुकसान पहुंचाते हैं। इसकी जगह साबुत और मोटे अनाज को आहार में शामिल करें। इससे न केवल डायबिटीज कंट्रोल होगी बल्कि टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा भी घटेगा। गेहूं से बनी मैदा भी ज्यादा नुकसानदेह है।

फाइबर डाइट क्यों लेना चाहिए
डायबिटीज में फाइबर डाइट लेने से पाचनतंत्र उसे धीरे-धीरे पचाता है जिससे शरीर में शुगर भी धीरे-धीरे बनता है। इस प्रकार से साबुत अनाज का सेवन डायबिटीज के खतरे को कम कर देता है। आइए जानते हैं साबुत अनाज का सेवन किस तरह से करें।


मल्टीग्रेन आटा खाएं
डायबिटीज रोगियों को रागी या नाचनी, बाजरा, जौ, सोयाबीन, ज्वार, चना, रामदाना/राजगीर आदि मिलाकर बने आटे की रोटियां खानी चाहिए। इनमें डायट्री फाइबर अधिक होता है। कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट उच्च मात्रा में होते हैं। यह वजन भी नियंत्रित रखते हैं।

दलिया होता है फायदेमंद
गेहूं से बनाया गया दलिया स्वाद और सेहत दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है। सब्जियां मिलाकर दलिया बनाएं। ओट्स भी अच्छा विकल्प है। साबुत अनाजों को भूनकर खाना भी डायबिटीज में फायदेमंद है।

ज्यादा मात्रा में खाएं दालें
दालों में घुलनशील और अघुलनशील डायट्री फाइबर होते हैं। इनमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट भी अधिक होता है। डायबिटीज के रोगियों को 55 जीआई यानी ग्लाइसेमिक इंडेक्स से नीचे वाली चीजें खानी चाहिए।

जानें किसमें कितना: चना दाल मेंं जीआइ लेवल 28 से कम होता है। इसी तरह राजमा में 19, मूंग दाल में 38, सफेद चने में 33 होता है। लोभिया, सोयाबीन, साबुत मसूर दाल आदि भी लें। इनमें जीआइ लेवल कम होता है। इनमें प्रोटीन, फोलिक एसिड भी होता है जो डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद है।