
केला ही नहीं केले के छिलके में भी हाेते हैं बहुत सारे गुण, यूं ही मत फेंकिए
बच्चाें के खाने में अगर हम पाैष्टिकता को नजरंदाज करते हैं ताे इसका असर उनके स्वास्थ्य व परफॉर्मेंस पर पड़ता है। ऐसे में बच्चे को पौष्टिक खाने खिलाने पर जाेर दे ताकि वह शारीरिक व मानसिक तौर पर भी फिट महसूस करें।
ग्लूकोज की होती रहे सप्लाई
बच्चों की डाइट न तो हैवी और न बहुत हल्की होनी चाहिए। गरिष्ठ भोजन जहां उन्हें आलसी बना सकता है, वहीं हल्का खाना कमजोरी ला सकता है। ऐसे में दाल, एक हरी सब्जी, रोटी व सलाद दें। साथ ही स्नैक्स के तौर पर बीच-बीच में कुछ ऐसी चीजें दें जिनसे उन्हें ग्लूकोज मिलता रहे। ओट्स, उपमा, इडली आदि इसके अच्छे विकल्प हैं। प्रोटीन को बच्चों की डाइट का हिस्सा बनाएं। कार्बोहाइड्रेट की तुलना में प्रोटीन धीरे-धीरे पचता है, जिससे शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती है। दूध, दाल, पालक, सोयाबीन, ब्रोकली प्रोटीन के उच्च स्त्रोत हैं।
दिमाग रहे अलर्ट
फलों में एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो दिमाग को सक्रिय रखने में मदद करते हैं। बच्चों को रोजाना एक मौसमी फल जरूर दें। फू्रट चाट, जूस या शेक के साथ ही सूखे मेवे भी दे सकते हैं। अगर बच्चा देर रात तक पढ़ाई करता है तो भी डिनर रात 8 बजे तक करना जरूरी है। इसके बाद भूख लगने पर सूखे मेवे, ग्रीन-टी आदि ली जा सकती है।
ओमेगा-3
ओमेगा -3 फैटी एसिड याद्दाश्त बढ़ाता है। अलसी, कद्दू के बीज, तिल, सोयाबीन तेल आदि में ओमेगा -3 प्रचुर मात्रा में होता है। इसे डाइट में शामिल करें। चॉकलेट, कुकीज, केक और पेय पदार्थ से बचना चाहिए। ये शरीर में शुगर का स्तर बढ़ाते हैं।
एनर्जी ड्रिंक को कहें ना
नींद व थकान भगाने के लिए कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स या एनर्जी ड्रिंक्स का सहारा लिया जाता है, जो गलत है। ये नींद प्रभावित करते हैं। अनिद्रा की स्थिति में बच्चे तरोताजा न महसूस करने से याद की हुई चीजें भूलने लगते हैं। ऐसे में ताजा फलों का जूस व ग्रीन-टी दें। 8-10 गिलास पानी रोजाना पिलाएं।
Published on:
11 Jul 2019 05:50 pm
बड़ी खबरें
View Allडाइट फिटनेस
स्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
