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वापस मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ की सीमा पहुंचा हाथियों का झुंड

मौजूद रहा वनविभाग का अमला

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Elephant herd reaches back to Madhya Pradesh's Chhattisgarh border

Elephant herd reaches back to Madhya Pradesh's Chhattisgarh border

डिंडोरी/गोरखपुर.करंजिया विखं के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में एक सप्ताह से आतंक मचाने के बाद हाथियों का झुंड शनिवार को विचरण करते हुए जंगल मार्ग से मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ की सीमा तक पहुंच गया हैं। बावजूद इसके प्रदेश की सीमा से लगे जिले के वनपरिक्षेत्रों में जंगली हाथियों के झुण्ड की लगातार दहशत बनी हुई हैं। क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की ओर से आए जंगली हाथियों के झुण्ड ने मंगलवार से गुरूवार तक खेतों में खूब उत्पात मचाया और अनुपपुर जिले में खेत पर रखवाली कर रहें लोगों पर हमला करते हुए कुछ लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में हाथियों के झुण्ड के वापस लौटने की संभावना से दहशत बनी हुई है। बताया गया है कि यह हाथियों का झुण्ड पहली वार एक सप्ताह पहले मार्च में गोपालपुर क्षेत्र के पीछे वाले हिस्से बोईरहा दोमुंहानी होते हुए पहुंचा था। जिसकी दहशत से ग्रामीण घर से बाहर नहीं निकल रहे थे। वन अमले को इन हाथियों के झुण्ड को वापस छत्तीसगढ़ की सीमा तक भेजने में काफी समय लगा था। तब तक किसानों के खेती किसानी के सब काम बंद थे ग्रामीण क्षेत्रों में भय बरकरार था लेकिन हाथियों की वापसी क्षेत्र की जनता के लिए राहत भरी खबर हैं ।
झुंड की पहली दस्तक
क्षेत्रवासियों ने बताया कि यह पहला मौका हैं जब इतनी बड़ी संख्या में हाथियों के झुंड ने दस्तक दी हैं। इसके पहले इस क्षेत्र में कभी हाथियों को लेकर इतना भयभीत माहौल नहीं बना। ग्रामीण क्षेत्रों में तो लोगों ने हाथियों के डर के कारण घरों से निकलना बंद कर दिया था। हालांकि इन सब के बीच यह अच्छी खबर हैं कि करंजिया विखं के गांवों में झुंड ने जनमानस को नुकसान नहीं पहुंचाया हैं। मात्र खेतों में फसलों को आंशिक रूप से तहस नहस किया हैं। जबकि माना जाता हैं कि हाथी आक्रमक होकर आबादी में प्रवेश करते हैं ।
जानकारी के अनुसार हाथियों के झुंड की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग का अमला मौके पर मौजूद रहा। इस दौरान उन्हें कड़ी मशक्कत भी करनी पड़ी। कुछ स्थानों पर अमले पर हाथियों के झुंड ने हमला करने का प्रयास भी किया हैं लेकिन कर्मचारियों के सर्तकता के चलते सही सलामत बचें रहें और पंडरी पानी के जंगल तकझुंड को वापस करने में सफल रहें ।