
Important for 1000 day life cycle from pregnancy
डिंडोरी. जिला मुख्यालय के करीबी ग्राम मुड़की में पोषण माह का महत्वपूर्ण गर्भावस्था से 1000 दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें विस्तार पूर्वक गर्भावस्था से लेकर 1000 दिवस तक पोषण की जानकारी उपलब्ध कराई गई ।जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के अंतर्गत संचालित इकाई कृषि विज्ञान केंद्र डिंडोरी द्वारा महिला बाल विकास विभाग एवं आयुष विभाग डिंडोरी के संयुक्त तत्वाधान में यह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डॉक्टर शैलेंद्र सिंह गौतम प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन में मंजूलता सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास, डॉक्टर संतोष कुमार परस्ते, आयुष अधिकारी के संयुक्त तत्वाधान में संपादित किए गया। रेणु पाठक तकनीकी अधिकारी कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा विस्तार पूर्वक गर्भावस्था से लेकर 1000 दिवस के विषय पर चर्चा की गई। 1000 दिवस से लेकर बच्चों के जन्म के बाद 2 वर्ष तक बच्चे के विकास हेतु बहुत महत्वपूर्ण होते है। संतुलित आहार एवं दिन में 2 घंटे का आराम जरूरी है तथा बच्चे के जन्म के पश्चात 6 माह तक केवल स्तनपान एवं छह माह के बाद स्तनपान के साथ ऊपरी आहार बच्चों के शारीरिक मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए अति आवश्यक होते हैं। कार्यक्रम में श्रीमती नीतू तेलगाम परियोजना अधिकारी महिला बाल विकास के मार्गदर्शन में श्रीमती तारेशवरी धुर्वे द्वारा रंगोली इसी थीम पर बनाई गई। रंगोली में गर्भवती महिला संतुलित आहार लेते हुए तथा इसके बाद गर्भावस्था के तिमाही के द्वारा दर्शाकर महिलाओं को समझाया गया। एतत्पश्चात बच्चे के जन्म के बाद 6 माह, 9 माह, 12 माह, 15 माह एवं 2 वर्ष तक के बच्चे के विकास के अलग.अलग चरण को दर्शाया गया।
कुपोषण दूर करने के प्रयास में आयुष विभाग से डॉ समीक्षा सिंह द्वारा बच्चों को संपुष्टि चूर्ण के उपयोग करने के तरीके को समझाया गया। बच्चों को विशेष प्रकार का औषधि तेल हितग्राहियों को स्वयं मालिश करके बताया गया। मालिश करने से बच्चों की मांसपेशिया एवं हड्डियां मजबूत होती है। इसके साथ ही डॉक्टर सिंह द्वारा कुपोषित बच्चों को वजनए ऊंचाई माप कर चिन्हित बच्चों को परामर्श व दवाइयां उपलब्ध कराई गई। पाठक द्वारा बताया गया डिंडोरी की जिले में स्थानीय खाद्य सामग्री अंतर्गत अलसी जिसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है। यह रक्त में मौजूद केलोस्ट्रोल को कम करने में सहायक होता है अर्थात शरीर में अतिरिक्त वसा को कम करता है। अलसी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और फाइटोकेमिकल बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करता है।अलसी के तेल की मालिश करने से शरीर के अंग स्वस्थ होते हैं व बेहतर तरीके से कार्य करते हैं। तेल की मसाज से चेहरे की त्वचा कांतिमय हो जाती है। कार्यक्रम के समापन के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र से हितग्राहियों को पोषण युक्त फलदार पौधे एवं उनके बीज वितरित किए गए। कार्यक्रम में मंच का संचालन तारेश्वरी धुर्वे द्वारा किया गया। पोषण माह का उदे्दश्य पर्यवेक्षक भूपेश्वरी धुर्वे द्वारा बताया गया एवं आभार प्रदर्शन रजनी परस्ते द्वारा किया गया।
Published on:
24 Sept 2020 02:59 pm
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