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खरमेर बांध को लेकर रूढ़ी प्रथा ग्रामवासियों ने किया धरना प्रदर्शन

फतहसीलदार को ज्ञापन सौंपा ग्रामीण

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Khormera dams were used for stereotype by villagers

Khormera dams were used for stereotype by villagers

समनापुर। जल संसाधन विभाग द्वारा खरमेर बांध प्रोजेक्ट निर्माण किया जा रहा है। बांध की निविदा भी हो चुकी है और दिवाली के बाद कार्य प्रारंभ की तैयारी है। बांध का विरोध डूब प्रभावित ग्रामों के लोग कर रहे हैं। समानापुर बाजार चौक में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर ०७ सूत्रीय मांग ज्ञापन राष्ट्रपति, राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि भूमि अर्जन, पुर्नवास एवं पुर्नव्यवस्थापन अधिनियम २०१३ के तहत किसानों की अनुमति के बिना किसान की जमीन किसी भी प्रयोजन के लिए अधिग्रहित नहीं की जा सकती है। किसानों ने आरोप लगाया कि विभाग के द्वारा बगैर सहमति प्रस्ताव के बंाध बनाया जा रहा है। अधिनियम २०१३ में यह स्पष्ट है, कि अनुसूचित क्षेत्रों में बगैर ग्रामसभा की अनुमति के भू अर्जन कार्रवाई नहीं की जा सकती। भारतीय संविधान के अनुच्छेद १३ (३)(क) में स्पष्ट लिखा है, कि गांव की रूढ़ी प्रथा परंपरा को विधि का बल प्राप्त है। पारंपरिक ग्रामसभा से बगैर अनुमति के कोइ कार्रवाई उक्त ग्रामसभा में नही की जा सकती। साथ ही अनुच्छेद १९ (५)(६) के तहत उक्त रूढ़ी ग्रामों में बगैर अनुमति के किसी प्रकार का व्यापार, घूमना, निवास करना आदि प्रतिबंधित है।
ग्रामीणों ने बताया कि खरमेर नदी पर पूर्व में तीन बांध सिंचाई के लिए बनाये गए जिसमें लगभग ३०-५० करोड़ की राशि खर्च की गई। अब उन बांधों को डुबोया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि आखिर शासन के पैसे की होली क्यों खेली जा रही है।
भारत का उच्चतम न्यायालय सुप्रीम कोर्ट के आदेश वेदांता बनाम उड़ीसा सरकार में कहा है, कि लोकसभा न विधानसभा सबसे ऊंची ग्रामसभा लेकिन जल संसाधन विभाग डिंडोरी ग्रामसभा के बगैर सहमति के बांध बनाने पर अड़ा हुआ है। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट का फैसला वी रामारेडडी १९९८ के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में सरकार एक व्यक्ति के समान है। फिर इस प्रकार अनुसूची क्षेत्रों में पांचवी अनुसूची का उल्लंघन क्यों किया जा रहा है। अधिनियम २०१३ में स्पष्ट यह उल्लेख किया गया है, कि विस्थापन से पहले पुनर्वास अनिवार्य है। जमीन के बदले जमीन, एवं अन्य सुविधाऐं जो अधिनियम में निहित है। पुर्नवास नीति पर किसी प्रकार की कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने दिवाली के बाद जिला मुख्यालय में रैली एवं प्रदर्शन करने की बात कही है। मांगों को लेकर रूढ़ी प्रथा ग्रामसभाओं ने धरना देकर समनापुर वृत्त नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर ग्राम अण्डई, डुगरिया, उमरिया, साल्हेंघोरी, मोहगांव, खाम्ही, सलैया एवं केवलारी ग्राम के ग्राम मुकददम, पटैल, दवान तथा समस्त पंचगण उपस्थित थे।