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आंखों में जन्म से ही रोशनी न होने के बाद भी अपनी कलाकारी में निपुण है यह सख्श

कमजोरी को ताकत बनाकर कर रहे परिवार का पालन पोषणडिंडौरी. जहां चाह वहां राह यह कहावत यथार्थ की है आदिवासी बाहुल्य जिले के बजाग जनपद के मझियाखार संगम टोला निवासी अयोध्या प्रसाद मांझी ने। जन्म से ही दोनों आंखों में रोशनी नहीं हैं, इसे उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। अपने हुनर के दम पर […]

डिंडोरीJul 08, 2024 / 12:13 pm

Prateek Kohre

कमजोरी को ताकत बनाकर कर रहे परिवार का पालन पोषण
डिंडौरी.
जहां चाह वहां राह यह कहावत यथार्थ की है आदिवासी बाहुल्य जिले के बजाग जनपद के मझियाखार संगम टोला निवासी अयोध्या प्रसाद मांझी ने। जन्म से ही दोनों आंखों में रोशनी नहीं हैं, इसे उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। अपने हुनर के दम पर वह अपना जीवन यापन एक सामान्य व्यक्ति की तरह कर रहे हंै तथा दूसरों के लिए भी प्रेरक भी बने हैं। जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत बजाग के मझियाखार ग्राम पंचायत अंतर्गत संगम टोला निवासी अयोध्या प्रसाद मांझी 56 वर्ष चार भाइयो मे सें तीसरे नंबर के है। उनके चार भाइयों मे ंसे तीन भाई जन्म से हि आंखो से विकलांग हैं। इसके बाद भी वह सभी इस विकलांगता को अपनी कमजोरी साबित नहीं होने दिया। अयोध्या प्रसाद मांझी की शादी कोता बाई से हुई जो की एक कुशल ग्रहणी है। इनके एक बच्ची और दो बेटे हं जिनका जीवन यापन इन्ही के सहारे चल रहा है।
कारीगरी में निपुण हैं अयोध्या प्रसाद
अयोध्या प्रसाद मांझी एक निपुण कारीगर है। वह अपने हुनर के दम पर अपने परिवार का बखूबी भरण पोषण कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक वह सीमेंट की बोरी के धागो को निकालकर उसमें से चटाई, बैग, खाट, जैसी घरेलू सामग्री को बड़ी की कुशलता से बनाते है और उसी से अपना जीवन यापन करते हैं। इसके अलावा थोड़ी बहुत खेती किसानी भी करते है।
अब तक नहीं मिला आवास का लाभ
विकलांग होने के बावजूद अयोध्या प्रसाद मांझी को मझियखार ग्राम पंचायत से विकलांग पेंशन के अलावा आज तक अन्य किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल सका है। यहां तक की इनके द्वारा कई बार ग्राम पंचायत मे आवेदन भी दिया गया, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आवास योजना का लाभ भी अभी तक इन्हे नहीं मिल पाया है।
पत्नी है कुशल गृहिणी
अयोध्या प्रसाद मांझी की पत्नी कोता बाई उनका सहारा है। वह एक कुशल ग्रहणी है और अपने घर परिवार को अच्छी तरह से चला रही है। अयोध्या प्रसाद मांझी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है और अपने पति के कढ़ाई बुनाई मे सहयोग करती है।

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