16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सर्वश्रेष्ठ है आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति, मिथक दूर करें और इसे अपनाएं

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को देश के साथ पश्चिमी दुनिया के देशों ने भी श्रेष्ठ माना है।

3 min read
Google source verification
 Ayurvedic medicine

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को देश के साथ पश्चिमी दुनिया के देशों ने भी श्रेष्ठ माना है। लेकिन कुछ भ्रांतियों के कारण हम उस अमूल्य धरोहर को अपनाने से दूर भाग रहे हैं। जल्दी और अच्छा उपचार पाने के लिए हम दौड़-धूप भी बहुत करते हैं। लेकिन, इन सबके बीच जो अपने पास पहले से ही है उसे बिसरा देते हैं। जरूरत है तो बस भ्रांतियों को दूर करने की, सच को जानने की और उसे अपनाने की।

मिथ- आयुर्वेदिक दवाओं में हैवी मेटल्स और स्टेरॉयड तत्व होते हैं!

सच- इस मिथ को दुनिया में काफी तेजी से कुप्रचारित किया गया है। सही बात यह है कि आयुर्वेद के ज्यादातर फॉर्मूले वनस्पतियों, जड़ी-बूटियों और रसों पर आधारित होते हैं। आयुर्वेद चूहों, खरगोशों या दूसरों जानवरों पर फॉर्मूलों को नहीं परखता क्योंकि उसका उद्देश्य मनुष्य को आरोग्य देना है। आयुर्वेद जीवन के हर सक्रिय तत्व के साथ है और संपूर्ण कल्याण के लिए है, ऐसे में इसमें हानिकारक तत्वों का समावेश कोरी धारणा या कतिपय स्वार्थी लोगों की मिलावट से ज्यादा कुछ नहीं।

मिथ- आयुर्वेदिक दवाओं का इलाज लंबा व असर देरी से होता है!

सच- ज्यादातर रोगी आयुर्वेद की शरण में तब जाते हैं जब अन्य पद्धतियों से उन्हें निराशा मिलती है। जड़ों की ओर लौटना अच्छी बात है लेकिन जब कोई जानकार वैद्य इलाज शुरू करता है तो उसके लिए पूर्व उपचारों के दुष्प्रभावों को शून्य करना चुनौती होती है। आयुर्वेद कभी भी क्विक-फिक्स तात्कालिक समाधान की बात नहीं करता क्योंकि इसके सिद्धांत संपूर्ण आरोग्य पर बल देते हैं।

मिथ- दवाएं होती हैं कड़वी, लेना है मुश्किल!

सच- एलोपैथिक और होम्योपैथ की मीठी गोलियों की तुलना में यह कुछ हद तक सही लगता है। हालांकि आयुर्वेद में दवाओं को शहद, तेल, पानी जैसे किसी न किसी माध्यम के जरिये लेने की अनुशंसा करता है। वैसे गौर करने वाली बात है कि आधुनिक तकनीकों, सहूलियत और चलन से मेल बिठाते हुए आयुर्वेद ने दवाइयों के कड़वेपन को काफी हद तक दूर कर लिया है। अब कई मशहूर कंपनियों के आयुर्वेदिक दवाएं आसानी से लिए जा सकने वाली गोलियों व कैप्सूल्स में भी उपलब्ध है।

मिथ- आयुर्वेदिक उपचार केवल बुजुर्ग लोगों के लिए प्रभावी है!

सच- आयुर्वेदिक उपचार हर उम्र के लोगों के लिए उतना ही प्रभावी है जितना कि दूसरी चिकित्सा पद्धतियां। बुजुर्गों को आयुर्वेद के साथ जोडऩा इसलिए आसान है क्योंकि उनके पास जीवन के अनुभवों की वह पोटली होती है जिसमें अच्छे और बुरे की परख का ज्ञान भरा होता है। संभवत: सहज, सस्ता और प्रभावी होने की वजह से अधिकांश बुजुर्ग आयुर्वेदिक नुस्खों को अपनाते हैं इसलिए भी यह मिथक बन गया। आयुर्वेद परिपक्व आयुर्विज्ञान है जिसकी समझ के लिए उम्र भी मायने रखती है। आयुर्वेद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए है क्योंकि यह किसी न किसी रूप में हमारी जीवनशैली और रहन-सहन में समाहित है।

मिथ- आयुर्वेदिक दवाएं महंगी हैं और हर जगह नहीं मिलती!

सच- तथ्य यह है कि सभी आयुर्वेदिक दवाइयों के साथ ऐसा नहीं है, उल्टा आयुर्वेेद तो न्यूनतम खर्च में उपचार करने की क्षमता रखती है। यह रोग विशेेष पर निर्भर करता है और उसकी विलक्षणता के कारण उपचार महंगा हो सकता है। आजकल आयुर्वेदिक दवाइयां भी जेनेरिक और सब्सटीट्यूट रूप में उपलब्ध हैं। आयुर्वेद के साधारण नुस्खे तो घर-आंगन में मिल जाते हैं और कुछ विशेेष दवाइयों के न मिलने की परेशानियां भी अब कम हो गई हैं। नए व प्रसिद्ध निर्माताओं की दवाइयां अब तो गांव-कस्बों तक पहुंचने लगी हैं।

मिथ- आयुर्वेदिक उपचार और ज्ञान बड़ा कठिन है!

सच- आयुर्वेद सहज और सरल ज्ञान देता है। इसमें विज्ञान भी है और जीवन दर्शन के मूल्य भी। इसके नुस्खों की संस्कृत प्रधान भाषा और उनका अन्य भाषाओं में सही अनुवाद न होने से यह भ्रांति पनपी है। आयुर्वेद को आसान बनाने के प्रयास निरंतर जारी है और तकनीक व समर्पित विशेषज्ञों के प्रयासों के परिणाम भी सामने आने लगे हैं। अब आयुर्वेद से जुड़ी जानकारियां इंटरनेट पर पा सकते हैं। पिछले दशक में आयुर्वेद ने भी तकनीकी उन्नति की है और पूर्व की तुलना में यह संपूर्ण दुनिया की पहुंच में है।

मिथ- आयुर्वेदिक दवाएं विषाक्त होती हैं!

सच- लोगों में यह मिथक सबसे ज्यादा फैला हुआ है कि आयुर्वेद औषधियां जैसे रस,भस्म आदि विषाक्त होतीं हैं लेकिन यह भ्रम गलत है। वर्तमान में कई आयुर्वेद फार्मेसी औषधियों का शास्त्रोक्त पद्धति से निर्माण कर रहीं हैं। इसके पीछे यदि कुछ सच भी है तो अज्ञानी और स्वार्थी लोगों की नासमझी। आयुर्वेद हजारों वर्षों से मानव जीवन का रक्षक बना हुआ है और इसकी पद्धतियां भलीभांति जांची-परखी हुई हैं।

इस तथ्य को समझना होगा कि आयुर्वेद हजारों वर्षों पहले महर्षियों के आश्रमों में जन्मा और बहुत धीमी गति से, अप्रचारित रहते हुए ग्रंथों के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचा। ऐसे में वर्तमान पद्धतियों की शोधपरकता के साथ इसकी तुलना करना बेमानी है। आयुर्वेदिक दवाइयां बेहतरीन असर दिखाती है, कई लाइलाज रोगों से छुटकारा दिलाकर चमत्कार कर जाती हैं तो निश्चित रूप से यह बिना शोध के संभव नहीं। आयुर्वेद एक सशक्त और प्रभावी चिकित्सा पद्धति है।