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Anil Agarwal Son Death: अनिल अग्रवाल के बेटे की तरह आपको भी आ सकता है कार्डियक अरेस्ट, जानें ये हार्ट अटैक से कैसे अलग है?

Anil Agarwal Son Death: वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का हाल ही में न्यूयॉर्क में कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया है। आइए जानते हैं कि कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में क्या अंतर होता है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?

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भारत

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Nidhi Yadav

Jan 08, 2026

Anil Agarwal Son Death

Anil Agarwal Son Death (image@XAnilAgarwal_Ved)

Anil Agarwal Son Death: वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे, जो कि मात्र 49 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के कारण यह दुनिया छोड़कर चले गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अग्निवेश अग्रवाल का न्यूयॉर्क में अचानक कार्डियक अरेस्ट आने के कारण निधन हुआ। वे एक स्कीइंग दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती थे और वहीं उनकी मृत्यु हो गई।

अब सोचने की बात यह है कि इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले इतने ज्यादा बढ़ रहे हैं, जिनमें से कुछ लोग ही मौत को हराकर जीवित बच पाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ज्यादातर लोग कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। आइए जानते हैं कि ये दोनों स्थितियां एक-दूसरे से कैसे अलग हैं और इनके लक्षण क्या हैं?

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर क्या है?(Cardiac vs Heart Attack)

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में सबसे बड़ा अंतर यह है कि जब किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है, तो उसके हृदय का रक्त प्रवाह (Blood Flow) बाधित हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ, जब किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट आता है, तो हृदय की धड़कन चलाने वाले विद्युत संकेत (Electrical Signals) रुक जाते हैं। हार्ट अटैक में दिल धड़कता रहता है, लेकिन कार्डियक अरेस्ट में दिल पूरी तरह धड़कना बंद कर देता है। हार्ट अटैक के दौरान मरीज अक्सर होश में रहता है, लेकिन कार्डियक अरेस्ट के दौरान मरीज कुछ ही सेकंड में बेहोश होकर गिर जाता है।

हार्ट अटैक के लक्षण क्या होते हैं?(Heart Attack Symptoms)

  • सीने में बहुत तेज चुभन या दबाव महसूस होना।
  • दर्द का बाजू, गर्दन या जबड़े तक फैलना।
  • मरीज को बहुत अधिक बेचैनी और पसीना आना।

कार्डियक अरेस्ट के लक्षण क्या होते हैं?(Sudden Cardiac Arrest)

  • मरीज अचानक बेहोश होकर गिर जाता है।
  • सांसें पूरी तरह रुक जाती हैं।
  • मरीज की आंखें स्थिर हो जाती हैं और नब्ज मिलना बंद हो जाती है।

बचाव और तुरंत उपचार के उपाय(Heart Prevention)

  • सीपीआर (CPR) की प्रक्रिया जान बचाने में सबसे कारगर है।
  • अपने शरीर और हृदय की नियमित जांच करवाते रहें।
  • तनाव को हमेशा कम रखें।
  • नींद की पूर्ति रखें।
  • डीफिब्रिलेटर (AED) के बारे में जानकारी जरूर रखें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।