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Natural Heart Test: क्या आप जानते हैं प्रेग्नेंसी के ये मामूली लक्षण भी हो सकते हैं हार्ट अटैक का संकेत?

Natural Heart Test:प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली सभी दिक्कतों को हम अक्सर यह कहकर टाल देते हैं कि ये बच्चे के जन्म के बाद ठीक हो जाएंगी। लेकिन असल में वे हमें 50 की उम्र के बाद होने वाली बीमारियों का संकेत देती हैं। आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी 'स्ट्रेस टेस्ट' की तरह कैसे काम करती है और यह किन बीमारियों का संकेत देती है?

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भारत

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Nidhi Yadav

Jan 08, 2026

Natural Heart Test

Natural Heart Test (image- geminiAI)

Natural Heart Test: गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक ऐसी महिला की तस्वीर आती है जो अपने बच्चे को दुनिया में लाने के लिए कई परेशानियों को बर्दाश्त करती है। जन्म के बाद वह इन समस्याओं को भूल जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गर्भावस्था के दौरान होने वाली यही छोटी-छोटी समस्याएं आपके भविष्य में आने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी देती हैं।

फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में एडल्ट कार्डियक सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट और एचओडी (HOD) डॉ. समीर भाते के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान जो महिलाएं बिल्कुल स्वस्थ होती हैं, उनके दिल पर भी काफी दबाव पड़ता है। आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली कौन-कौन सी समस्याएं भविष्य में आपको हार्ट अटैक और अन्य दिल की बीमारियों का शिकार बना सकती हैं।

प्रेग्नेंसी का आगे के जीवन से संबंध(Pregnancy Stress Test)

गर्भावस्था के दौरान शरीर में अनेक छोटे-छोटे बदलाव होते हैं और हम उन सभी को सामान्य समझकर बच्चे के जन्म के बाद नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि यह स्थिति आपको भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक और अन्य बीमारियों के बारे में संकेत दे रही होती है। आज के विज्ञान का मानना है कि गर्भावस्था महिला के शरीर पर एक 'स्ट्रेस टेस्ट' की तरह काम करती है, जो उन बीमारियों का संकेत देती है जो महिलाओं में 50 की उम्र के बाद होने वाली हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले असामान्य लक्षण(Pregnancy Complications)

  • प्री-एकलम्पसिया (Pre-eclampsia)
  • गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes)
  • सांस फूलना और घबराहट

50 की उम्र के बाद कौन सी बीमारियां हो सकती हैं?(Future Health Warning Signs)

  • क्रोनिक हाइपरटेंशन
  • कोरोनरी आर्टरी डिजीज
  • हार्ट फेलियर
  • टाइप-2 डायबिटीज
  • मेटाबॉलिक सिंड्रोम

इन बीमारियों से बचने के लिए क्या करें?(Pregnancy Complications Prevention)

  • डिलीवरी के बाद कम से कम एक साल तक अपना ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर टेस्ट नियमित रूप से करवाते रहें।
  • जितना हो सके अपना वजन नियंत्रित रखें और संतुलित आहार लें।
  • अपनी प्रेग्नेंसी की सभी मेडिकल रिपोर्ट्स संभालकर रखें ताकि भविष्य में डॉक्टर को आपकी सेहत का इतिहास पता रहे।
  • तनाव को कम करने के लिए योग और पर्याप्त नींद का सहारा लें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह जरूर लें।