
brain stroke causes and symptoms and treatment
दिमाग की आर्टरी में ब्लॉकेज को बे्रन स्ट्रोक कहते हैं। यह उम्रदराज लोगों के साथ ही युवाओं को भी होने लगा है। इसलिए इसे यंग स्ट्रोक कहते हैं। मोटापा, स्मोकिंग, अल्कोहल, खराब जीवनशैली तनाव इसका कारण हैं।
इंजेक्शन लगना जरूरी -
ब्रेन स्ट्रोक की पहचान होने पर मरीज को थ्राबोलाइसिस इंजेक्शन जितना जल्दी लग जाता है उतना शरीर में नुकसान कम होता है। बे्रन स्ट्रोक दो तरह का होता है। मिनी स्ट्रोक में मरीज को बोलने में दिक्कत होती है। शरीर एक तरफ का हिस्सा काम करना बंद कर देता है। 24 से 48 घंटे में ठीक हो जाता है। फुल फ्लैज्ड स्ट्रोक में चेहरा टेढ़ा, बोलने में दिक्कत या आवाज चली जाती है। अटैक मेन आर्टरी पर तो 50 फीसदी मामलों में ही मरीज की रिकवरी हो पाती है।
पहले माइनर स्ट्रोक आता -
ब्रेन स्ट्रोक अक्सर सुबह के समय आता है क्योंकि उस समय ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है। कई बार ब्रेन स्ट्रोक से पहले माइनर अटैक आते हैं जैसे कुछ समय के लिए आवाज लडख़ड़ाना, हाथ बेजान से महसूस होना जैसे लक्षण हो सकते हैं। 40% लोग स्ट्रोक के बाद विकलांगता का शिकार होते हैं क्योंकि वो समय रहते अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते हैं।
पहचानें बे्रन स्ट्रोक लक्षण -
शरीर के हिस्से पर लकवा आना।
चेहरा टेढ़ा हो जाना, न बोल पाना ।
हाथ या पैर सुन्न हो जाना ।
चक्कर, जी मिचलाना, उल्टियां ।
देखने में दिक्कत होती है ।
याददाश्त जाने की समस्या ।
Published on:
06 Dec 2019 04:16 pm
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