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Celiac Disease: गेहूं खाने से हाेती है ये बीमारी, पेट फूलने के साथ रहती है थकान

Celiac Disease: पेट फूलने के साथ हर समय रहती है थकान, तो इस बीमारी के हैं संकेत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों के अनुसार, सीलिएक रोग भारत में छह से आठ मिलियन लोगों को प्रभावित करता है। सीलिएक रोग वह स्थिति है जिसमें ग्लूटेन का सेवन छोटी आंत को नुकसान पहुंचा सकता है

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Celiac Disease Symptoms, Risk Factor And Treatment

Celiac Disease: गेहूं खाने से हाेती है ये बीमारी, पेट फूलने के साथ रहती है थकान

Celiac Disease In Hindi: पेट फूलने के साथ हर समय रहती है थकान, तो इस बीमारी के हैं संकेत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों के अनुसार, सीलिएक रोग भारत में छह से आठ मिलियन लोगों को प्रभावित करता है। सीलिएक रोग वह स्थिति है जिसमें ग्लूटेन का सेवन छोटी आंत को नुकसान पहुंचा सकता है। यह एक तरह का ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। अनुमान है कि 100 में से हर 1 व्यक्ति सीलिएक रोग से पीड़ित है।

विशेषज्ञों के अनुसार सीलिएक रोग ( Celiac Disease ) की रोकथाम और उपचार में सबसे बड़ी बाधा, लोगों में इसके प्रति जागरूकता की कमी है। पिछले दो दशक में सामने आई नई बीमारियों में ‘सीलिएक रोग’ प्रमुख है। जिसके लिए ग्लूटेन ( Gluten ) नामक प्रोटीन जिम्मेदार होता है। बच्चों में खासतौर पर ग्लूटेन के कारण पाचन संबंधी, खून की कमी, थकान व अन्य समस्याएं देखने को मिलती हैं।


सीलिएक की वजह है ग्लूटेन
ग्लूटेन नामक प्रोटीन के कारण सीलिएक बीमारी होती है जो रोगी को पेट की समस्याओं से परेशान रखती है। सीलिएक से पीड़ित लोगों को गेहूं और जौ में मौजूद ग्लूटेन नामक प्रोटीन से एलर्जी होती है। इस बीमारी के वंशानुगत होने की आशंका सामान्य के मुकाबले 10 फीसदी तक ज्यादा होती है।


छोटी आंत को होता है नुकसान
सीलिएक जानलेवा नहीं है, लेकिन समय रहते इलाज नहीं होने पर यह दूसरे जटिल रोगों में तब्दील हो सकती है। ग्लूटेन हमारी डाइजेस्टिव ट्रैक्ट की आंतरिक झिल्ली को क्षतिग्रस्त करता है, जिससे पोषक तत्व अवशोषित नहीं हो पाते और पेट संबंधित बीमारियां होने लगती हैं।


लक्षण, कैसे हो जांच
इस बीमारी के मुख्य लक्षणों में दस्त, पेट फूल जाना, भूख ज्यादा या कम लगना, लंबाई रुक जाना, खून की कमी, कार्यक्षमता में कमी और बच्चे का विकास रुक जाना शामिल हैं। रोग के लंबे समय तक जारी रहने पर आंतों के कैंसर और लिम्फोमा का खतरा हो जाता है। एक साधारण ब्लड टेस्ट से इस रोग का पता चल जाता है और पुष्टि के लिए एंडोस्कोपी की जाती है।


ग्लूटेन से ऐसे करें बचाव
ग्लूटेन के मामले में सजगता ही बचाव है। ग्लूटेन की एलर्जी मुख्य रूप से आंत को प्रभावित करती है। आहार में ग्लूटेन के तमाम स्रोतों को हटाकर उनकी जगह ग्लूटेन से मुक्त पौष्टिक खाद्य पदार्थों से इस रोग से बचा जा सकता है। इसके लिए सबसे बढ़िया विकल्प है कि गेहूं के आटे की जगह बेसन का इस्तेमाल किया जाए। ग्लूटेन से मुक्त आहार के लिए चावल, मक्का, ज्वार, सभी प्रकार की फलियां, फल-सब्जियां, दूध और उससे बने उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा खाद्य सामाग्री की पैकिंग पर लिखे गए विवरण को ध्यान से पढ़ें ताकि अनजाने में कहीं आप एलर्जिक फूड का शिकार न हो जाएं।

इनको कहें ना
खाने में गेहूं-जौ और रागी से बनी चीजें जैसे मैदा, आटा,सूजी और कस्टर्ड से परहेज करें। बाजार में मिलने वाले बिस्किट, पेटीज, नूडल, पास्ता, बे्रड, गेहूं के फ्लेक्स, सूप पाउडर, चॉकलेट, डिब्बाबंद सब्जियां-चटनी आदि से परहेज करें।


इनकाे करें डाइट में शामिल
अनाज : चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन, साबुदाना, राजगिरी, कुट्टू व सिंगाड़े के आटे से बनने वाली रोटी या मुरमुरा, चिवड़ा, मक्की का प्रयोग करें।

फास्टफूड : इडली, डोसा, आलू की टिक्की, भुना हुआ चना, चीला, खिचड़ी और दलिया आदि खाएं।

मीठा : खीर, गाजर या मूंग का हलवा, शहद, गुड़, घर में बनी मावे की मिठाइयां, रबड़ी, बेसन से बनने वाले लड्डू भी खाए जा सकते हैं।