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Child Health Problems: प्रतिस्पर्धा आपके बच्चे को बना सकती है मानसिक बीमार

Child Health Problems: Child Health: Child Mental Health: 2030 तक दुनिया में अवसाद (depression) महामारी बन जाएगा। मेंटल हैल्थ फाउंडेशन ने आगाह किया है कि अवसाद और तनाव जैसे मानसिक रोगों से परेशान बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ज्यादातर कारणों में पढ़ाई व प्रतिस्पर्धा में अव्वल रहने का दबाव, स्कूल या घर में डांट-फटकार, परिवार में आर्थिक संकट, माता-पिता में अनबन या प्रियजन की मौत। ऐसे में जरूरत है कि अभिभावक बच्चों की मनोदशा को समझें व सावधानी बरतें।

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जयपुर

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Vikas Gupta

Jul 05, 2019

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Child Health Problems: 2030 तक दुनिया में अवसाद (depression) महामारी बन जाएगा। मेंटल हैल्थ फाउंडेशन ने आगाह किया है कि अवसाद और तनाव जैसे मानसिक रोगों से परेशान बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ज्यादातर कारणों में पढ़ाई व प्रतिस्पर्धा में अव्वल रहने का दबाव, स्कूल या घर में डांट-फटकार, परिवार में आर्थिक संकट, माता-पिता में अनबन या प्रियजन की मौत। ऐसे में जरूरत है कि अभिभावक बच्चों की मनोदशा को समझें व सावधानी बरतें।

Child HealthProblems: आजकल बच्चे छोटी सी बात को लेकर तनाव (depression) में आ जाते हैं जो गंभीर रूप लेकर उन्हें मानसिक (Child Mental Health ) रूप से बीमार बना रहा है। इसके ज्यादातर कारणों में पढ़ाई व प्रतिस्पर्धा में अव्वल रहने का दबाव, स्कूल या घर में डांट-फटकार, परिवार में आर्थिक संकट, माता-पिता में अनबन या प्रियजन की मौत। ऐसे में जरूरत है कि अभिभावक बच्चों की मनोदशा को समझें व सावधानी बरतें।

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2030 तक दुनिया में अवसाद (depression) महामारी बन जाएगा। मेंटल हैल्थ फाउंडेशन ने आगाह किया है कि अवसाद और तनाव जैसे मानसिक रोगों से परेशान बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

लक्षण: अकारण चिल्लाना या रोना, बच्चे की खाने की आदतें बदलना, भूख न लगने की बात कहना, तुतलाना, अकारण पेटदर्द के अलावा व्यवहार में बदलाव होना जैसे उदास रहना, अंधेरे से डरना, बात-बात पर गुस्सा करना, अकारण चिल्लाना या रोने लगना, लोगों से मिलने में कतराना व अकेले शांत रहना।

इलाज : बच्चों को समझाएं-
पेरेंट्स पहले बच्चे की समस्या को जानें व सकारात्मक नजरिए से उसे सुलझाएं। बच्चों संग समय बिताए, उनसे बातचीत करें व सवाल पूछने की आजादी दें। उनकी आलोचना न करें और न ही डराएं। उनकी दूसरे बच्चों से तुलना न करें। कमियों व फेल होने पर दंडित करने की बजाय उन्हें समझाएं। उनकी सफलता को सेलिब्रेट करें।

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