
किडनी में दिक्कत की वजह से आंखाें के आसपास हाे सकती है सूजन
डायबिटीज के मरीजों में किडनी से जुड़ा संक्रमण (पाइलो नेफ्राइटिस) हो सकता है। मधुमेह का किडनी पर तीन तरह से असर होता है-
- यूरिन के जरिए कम या अधिक मात्रा में प्रोटीन निकलना।
- किडनी की कार्यप्रणाली असामान्य होना।
- रक्तसंचार प्रभावित होने पर अप्रत्यक्ष रूप से किडनी द्वारा अपशिष्ट पदार्थ बाहर न निकाल पाना।
डायबिटीज के रोगियों में न केवल यूरिन के संक्रमण का खतरा बढ़ता है बल्कि वे हृदय रोगों, फेफड़ों के संक्रमण और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ज्यादा घिरे होते हैं। इससे किडनी पर दबाव बढ़ जाता है। जिन्हें डायबिटीज है उनकी किडनी सामान्य लोगों की तुलना में जल्दी खराब होती है।
अन्य खतरे
इन मरीजों में रोग प्रतिरोधक तंत्र कमजोर होने से यूरिन में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यूरिन में सामान्य व गंभीर संक्रमण (पाइलो नेफ्राइटिस) की आशंका भी रहती है।
किडनी संबंधी समस्याओं में लक्षण
यूरिन में प्रोटीन निकलने से रक्त में प्रोटीन की मात्रा कम होना। इससे आंखों के आसपास सूजन आ जाती है। यह सूजन सुबह उठते समय ज्यादा होती है। पैरों में सूजन आने के साथ पूरे शरीर पर सूजन दिखती है। इसके अलावा काम में मन न लगना, कमजोरी व उल्टी आने जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। गंभीर स्थिति में किडनी यूरिन का निर्माण नहीं कर पाती व मरीज को यूरिन कम आता है।
किडनी को सेहतमंद रखने के लिए क्या करें
रक्त में शुगर का स्तर जितना नियंत्रित रहेगा उतना ही किडनी पर दबाव कम होगा। डायबिटीज के रोगी हैं तो डायबिटोलॉजिस्ट के अलावा नेफ्रोलॉजिस्ट को भी दिखाएं। बताई गई दवा नियमित लें। खानपान में परहेज बरतें और दिनचर्या में सुधार करें। समय-समय पर किडनी संबंधी जांचें कराते रहें।
Published on:
28 Jun 2019 10:00 am
