जानिए दवा सेवन का सही तरीका क्या होना चाहिए

जानिए दवा सेवन का सही तरीका क्या होना चाहिए
Know about the right way to consume medicine

Vikas Gupta | Updated: 11 Oct 2019, 03:16:05 PM (IST) डिजीज एंड कंडीशन्‍स

डॉक्टरी सलाह से दवाएं बदलते रहें ताकि रोगी पर इसका बेहतर असर दिख सके। दवाओं और उसके प्रयोग के तौर तरीकों पर विशेषज्ञों द्वारा दी गई राय के अंश-

दवाएं फायदा पहुंचाती हैं लेकिन अगर इन्हें गलत तरह से लिया जाए तो नुकसान भी उतना ही होता है। कई बार मरीज के लंबे समय तक दवा लेने के बाद भी उसमें सुधार नहीं दिखता। ऐसे में समय-समय पर डॉक्टरी सलाह से दवाएं बदलते रहें ताकि रोगी पर इसका बेहतर असर दिख सके। दवाओं और उसके प्रयोग के तौर तरीकों पर विशेषज्ञों द्वारा दी गई राय के अंश-

कई तरह से लेते दवाएं -
मर्ज की स्थिति के अनुसार दवाएं देते हैं। इमरजेंसी में आईवी रूट, इंजेक्शन, ओरल डोज के अलावा हृदय रोगियों को दवा मुंह में दबाकर रखने के लिए कहते हैं। इससे दवा घुलकर तकलीफ वाले हिस्से तक पहुंच जाती है। वर्ना ओरल तरीके से देने पर दवा लिवर, आंत और रक्त तक होते हुए हृदय तक पहुंचती है। वैसे हर दवा का असर करने का समय अलग-अलग होता है। ज्यादातर ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिसका असर कम से कम 24 घंटे तक रहे।

दवा लेने से पहले ध्यान रखें -
दवा खाने से आधे घंटे पहले व बाद में नशीले पदार्थ न लें।
होम्योपैथिक दवा ले रहे हैं तो कच्चे प्याज, लहसुन, कॉफी, पिपरमिंट और सुगंधित वस्तुओं से परहेज करना चाहिए।
दवा खाने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट जांच लें। आयुर्वेदिक दवाओं की एक्सपायरी डेट ड्रग एंड कॉस्मेटिक रूल के तहत इस प्रकार है- जड़ी बूटी की एक्सपायरी तीन साल, आंवला च्यवनप्राश की तीन साल, भस्म की दस साल और चूर्ण की एक साल होती है।

एलोपैथी : दवा हाथ में न लें वर्ना संक्रमण से दवा के असर करने की क्षमता घटती है।
एक से अधिक दवा है तो थोड़े-थोड़े अंतराल पर खाएं। एक साथ 3-4 दवाएं न निगलें।
बच्चों की दवा उनकी पहुंच से दूर रखें।

आयुर्वेद : आयुर्वेदिक दवाएं द्रव्य, भस्म और ठोस रूप में होती हैं। द्रव्य-भस्म तेजी से शरीर में पहुंचकर खून में मिलते हैं। इसमें दवाएं पानी, दूध, शहद के साथ लेते हैं। इससे दवा का असर दोगुनी तेजी से होता है।

होम्योपैथी-
इन दवाओं का शरीर पर नुकसान नहीं होता है।
इनमें पचास गुना अधिक तेजी के साथ काम कर रोग को जड़ से मिटाने की ताकत होती है।
ये दवाएं सीधे नसों के माध्यम से शरीर में पहुंचती हैं और बीमार कोशिका को दुरुस्त करती हैं।

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