
लेमन जूस डाइट नींबू के पारंपरिक गुणों का आधुनिक रूप है।
स्टेनले बरोघ नाम के एक वैज्ञानिक ने 1941 में लेमन डाइट को पश्चिमी देशों में मशहूर किया और अब यह एक ऐसी डाइट थैरेपी बन चुकी है जो बेहद सस्ती, सुरक्षित और अपनाने में आसान है। यह डाइट उनके लिए है, जो बढ़े वजन से परेशान हैं और बहुत ज्यादा खर्च या कसरत नहीं कर सकते। लेमन जूस डाइट नींबू के पारंपरिक गुणों का आधुनिक रूप है।
सुबह व रात में नींबू पानी
सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीएं। स्वाद और गुण बढ़ाने के लिए दो चम्मच शहद भी मिलाया जा सकता है, लेकिन चीनी मिलाने से बचें, इसी तरह रात को पीएं। इस डाइट प्लान को शुरू करने के साथ ही आपको पूरे दिन भरपूर पानी पीना होता है। आप जितना पानी पीते हैं, शरीर से विकार उतनी जल्दी दूर होते जाते हैं।
ज्यादा फल-सब्जियां खाना
इस डाइट के साथ खाने में फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ानी होगी। नाश्ता, लंच, स्नैक्स और तली हुई चीजों की जगह फल-सब्जियां व साबुत अनाज से बनी चीजें खाएं।
बर्न होगी कैलोरी -
नींबू पानी से शरीर को विटामिन-सी मिलता है। यह विटामिन शरीर में घुलनशील होता है इसलिए लेमन जूस की अधिकता से शरीर को कोई नुकसान भी नहीं होता। गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से शरीर की मेटाबॉलिक रेट बढ़ जाती है और शरीर कैलोरी को बर्न करने लगता है।
25 मिनट का नियम -
लेमन जूस डाइट को अपनाने वाले बहुत से लोगों को ज्यादा भूख लगने लगती है। उन्हें'25 मिनट इंतजार का नियम याद रखना चाहिए। यदि एक बार खाने के बाद 25 मिनट इंतजार किया जाए तो अतिरिक्त खाने से बचा जा सकता है।
लेमन जूस डाइट -
इस डाइट का उद्देश्य नींबू के रस से शरीर में जमा कचरे को बाहर निकालना है। ये कचरा गलत खानपान और दिनचर्या के कारण जमा होता जाता है। लेमन जूस इसी कचरे को बाहर निकालता है।
अनसैचुरेटेड फैट से दोस्ती -
शरीर को फैट्स की भी उतनी ही जरूरत होती है, जितनी बाकी पोषक तत्वों की। ऐसे फैट्स लें जो अनसुचैरेटेड हैं और जिनका स्रोत जानवर नहीं पौधे हैं, जैसे-सूरजमुखी का तेल, सभी तरह के गिरी वाले फल आदि। सैचुरेटेड फैट्स शरीर में कोलेस्ट्रोल बढ़ाते हैं वहीं अनसेचुरैटेड संतुलित करते हैं।
ब्लड शुगर पर नियंत्रण -
नींबू से ब्लड शुगर का लेवल 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। अपने आहार में चीनी का प्रयोग कम ही करें।
नींबू के अन्य फायदे -
नींबू रस से फटे दूध को पीने से दस्त में आराम मिलता है। काले नमक के साथ नींबू लेने से अपच की समस्या नहीं रहती। सलाद में भी नींबू डालकर खाया जा सकता है। कुछ लोग जो किसी बीमारी के कारण मसाले वाला खाना नहीं खा पा रहे, वे सब्जी या दाल में नींबू का प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि अगर आपको खाली पेट खट्टी चीजें लेने से एसिडिटी होती है तो नींबू का प्रयोग डाइटीशिन की सलाह के अनुसार ही करें।
नींबू के हैं कई फायदे
बीपी
लेमन में पोटेशियम होता है जो बीपी को नियंत्रित करता है। नींबू के प्रयोग से जी घबराने और चक्कर आने की समस्या दूर होती है।
तनाव
नींबू पानी पीने से तनाव में कमी आती है और आप फे्रश फील करते हैं। अगर थ्रोट इंफेक्शन में नमक के पानी से आराम नहीं मिलता तो लाइम वाटर से गरारे करें।
कफ
नींबू इस्तेमाल करने से कफ ठीक होता है, इससे अस्थमा के रोगियों को आराम मिलता है।
पथरी
रोजाना नींबू पानी पीने से यूरिन साइट्रेट की मात्रा बढ़ जाती है। यह एसिड गुर्दे में पथरी होने से रोकता है।सर्दी में कोहनियां फटकर खुरदरी हो गई हों तो बेकिंग सोडा में नींबू मिलाकर लगाने से फायदा होगा।
झुर्रियां
चेहरे पर झुर्रियां न हों इसके लिए नींबू पानी रोजाना पीएं। इससे मसूड़ों से खून निकलने की समस्या में भी आराम होता है।

Published on:
23 Nov 2018 04:43 pm
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