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Malaria – सफाई से इस तरह दें मलेरिया को मात

मलेरिया, प्लाजमोडियम परजीवी की पांच प्रकार की प्रजाति से फैलने वाला रोग है, जिसका वाहक मादा एनाफिलीज मच्छर होता है।

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Malaria - सफाई से दें मलेरिया को मात

मलेरिया, प्लाजमोडियम परजीवी की पांच प्रकार की प्रजाति से फैलने वाला रोग है। जिसका वाहक मादा एनाफिलीज मच्छर होता है। मलेरिया मादा मच्छर एनाफिलिज के काटने से यह संक्रमण होता है। यह रोग होने पर तेज बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, थकावट, उल्टी, खून की कमी व आंखों में पीलापन हो जाता है।

इलाज : अगर मरीज की स्थिति नियंत्रण में हो तो डॉक्टरी सलाह से दी जा रही दवाइयों, उचित खानपान और साफ-सफाई का ध्यान रखकर घर पर ही इलाज संभव है। लेकिन यदि लो ब्लड प्रेशर, जी घबराना, सांस लेने में तकलीफ, प्लेटलेट्स कम होना, तेज बुखार, बेहोशी, दिमागी बुखार, पेशाब न आना या काले रंग का आने पर अस्पताल में भर्ती करना जरूरी होता है।

बचावः
- अगर मरीज को डिहाइड्रेशन की समस्या हो रही है तो पर्याप्त पानी और खानपान में लिक्विड चीजों से पूर्ति करानी चाहिए।
- दवाओं से मलेरिया का पूरी तरह से इलाज हो जाता है। मलेरिया होने पर कई प्रकार की दवाइयां प्रभावी होती हैं। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार क्लोरोक्विन, आर्टीसुनेट्स आदि दवाएं देते हैं और कई बार जरूरत के अनुसार इंजेक्शन भी लगाए जाते हैं।

महत्वपूर्ण जांचें
दो प्रकार से खून की जांच की जा सकती है। रेपिड एंटीजन टेस्ट से मलेरिया का तुरंत पता लगाया जाता है। दूसरा, पेरीफेरल ब्लड फिल्म (पीबीएफ ) टेस्ट से परजीवी को माइक्रोस्कोप से देखकर पता लगाते हैं। सामान्य स्थिति में दवाओं व इंजेक्शन से घर पर ही इलाज किया जा सकता। लेकिन मरीज की गंभीर अवस्था में उसे अस्पताल में भर्ती करके भी उपचार करते हैं।

इससे जुड़े खतरे
कई बार यह रोग थोड़े समय में दवाओं से ठीक हो जाता है लेकिन समय रहते इसका इलाज न कराया जाए तो यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है। खून की कमी, किडनी का खराब होना, हार्ट फेल्योर और दिमागी बुखार के कारण दौरे आना, चक्कर आदि मलेरिया की गंभीर अवस्था में होने वाली समस्याएं हैं।

सफाई व सावधानी
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मलेरिया रोग से बचाव के तीन मुख्य तरीके हैं।पहला, सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। दूसरा, शरीर को पूरी तरह से कवर करके रखें। तीसरा, त्वचा पर मच्छर भगाने की (रिपेलेंट) क्रीम का प्रयोग करें।
- घर के आसपास गंदा पानी जमा न होने दें।
- कूलर या छत पर रखी पानी की टंकी की नियमित सफाई करें।
- ध्यान रहे कि बारिश का पानी किसी डिब्बे, गमले या टायर आदि में जमा न होता रहे।
- घर में डीटीटी जैसे कीटनाशकों का छिड़काव कराएं।